बीकानेर-सुश्री दक्षता बिन्नाणी ने लिप्पन कला की अनूठी मिसाल प्रदर्शित की
साहित्यकार गोवर्द्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’ की पौत्री है *सुश्री दक्षता बिन्नाणी*
इस कला में मिट्टी से जटिल डिज़ाइन बनाए जाते हैं और उनमें आभला (दर्पण) लगाए जाते हैं, जो घरों को चमकदार और जीवंत बनाते हैं।
बीकानेर (BNE ) जय नारायण व्यास कॉलोनी निवासी बीकानेर के वरिष्ठ साहित्यकार गोवर्द्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’ की पौत्री *सुश्री दक्षता बिन्नाणी* ( सुपुत्री – कोमल समीरकुमार बिन्नाणी) ने लिप्पन कला की एक अनूठी मिसाल प्रदर्शित की है।
लिप्पन कला जो गुजरात के कच्छ क्षेत्र से सम्बन्धित एक पारम्परिक मिट्टी और दर्पण कला है, जिसमें मिट्टी, गोबर और छोटे दर्पणों (‘आभला’) का उपयोग करके दीवारें, खासकर ‘भुंगा’ (गोल मिट्टी के घर), सजाई जाती हैं इस कला में मिट्टी से जटिल डिज़ाइन बनाए जाते हैं और उनमें आभला (दर्पण) लगाए जाते हैं, जो घरों को चमकदार और जीवंत बनाते हैं।
दीपावली के मौके पर चार दिन के अथक प्रयास से यह कलात्मक कृति, जिसके बीच में काॅंच व उसके चारों तरफ लिप्पन कला के हिसाब से से घेरा बनाया है।
यह कृति, काॅंच के टूकड़े सहित सारा सामान उसने अपने पास उपलब्ध सामग्रियों से ही सुश्री दक्षता ने बनाया है।
इस को जिस कलात्मक ढंग से बनाया गया, वह देखने योग्य है और उसके इस कृत्य ने परिवारजनों के अलावा पारिवारिक सम्बन्धियों व पारिवारिक मित्रों को गहराई से प्रभावित कर गया।










