नई दिल्ली-इस क्षेत्र के आदिवासियों ने किया बड़ा दावा, भारत की जमीन पर चीन ने किया कब्जा
‘नाह वेलफेयर सोसाइटी’ ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर दावा किया है।
भारतीय सेना पर पूरा भरोसा है, लेकिन उनके अनुसार ताक्सिंग क्षेत्र में चीनी पीएलए की गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।
नई दिल्ली (BNE ) : अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले से स्थानीय आदिवासी समुदाय के लोगों ने एक बड़ा दावा ाकरते हुए कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के निकट चीनी सेना ने पिछले कुछ वर्षों में उनकी पारंपरिक जमीन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है।‘नाह वेलफेयर सोसाइटी’ ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर दावा किया है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, संगठन का आरोप है कि पिछले छह वर्षों के दौरान चीनी सेना ने उन क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित किया है, जहां स्थानीय लोग वर्षों से खेती और पशु चराने का कार्य करते रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि चीन पिछले 10 से 15 वर्षों से धीरे-धीरे अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा था, लेकिन वर्ष 2020 के बाद इसकी रफ्तार काफी तेज हो गई।
ज्ञापन में संगठन ने ताक्सिंग क्षेत्र के अंतर्गत पांच स्थानों का उल्लेख किया है, जहां कथित तौर पर चीनी गतिविधियां बढ़ी हैं। इनमें ओयिंग, पोत्रंग झील, तिन्दिनतांग (टीजी), पनिआर (चुजार्टा क्षेत्र) और मरपन (मर्नाफे) शामिल हैं। संगठन का कहना है कि वर्ष 2020 तक इन इलाकों पर स्थानीय समुदाय की पहुंच थी, लेकिन अब इन क्षेत्रों पर चीन का नियंत्रण होने का दावा किया जा रहा है।
नाह वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष केरु चादर ने ज्ञापन में कहा कि उन्हें भारतीय सेना पर पूरा भरोसा है, लेकिन उनके अनुसार ताक्सिंग क्षेत्र में चीनी पीएलए की गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चीनी सेना ने भारतीय क्षेत्र के भीतर सड़कें और सैन्य ढांचा भी विकसित किया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस मुद्दे पर नाचो विधानसभा क्षेत्र के विधायक नाकाप नालो ने भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की संप्रभुता से जुड़ा गंभीर विषय है तथा स्थानीय लोगों के आरोपों की जिला प्रशासन और सेना द्वारा आधिकारिक जांच और पुष्टि की जानी चाहिए।
फिलहाल अरुणाचल प्रदेश सरकार, भारतीय सेना या केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।
गौरतलब है कि चीन अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा नहीं मानता और उसे ‘जांगनान’ (दक्षिण तिब्बत) कहकर उस पर दावा करता है। चीन समय-समय पर अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों के चीनी नाम जारी करता रहा है और सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास की गतिविधियां भी बढ़ाता रहा है। वहीं भारत लगातार यह स्पष्ट करता आया है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है तथा चीन के दावों का कोई कानूनी या वास्तविक आधार नहीं है।








