Israel–Iran conflict-अमेरिकी हमले से बौखलाया ईरान -कड़ा सबक सिखाने की दी चेतावनी
क्षेत्र में कोई भी अमेरिकी नागरिक या अमेरिकी संपत्ति सुरक्षित नहीं है-ईरान
international news – -इजरायल-ईरान के तनाव के बीच में अमेरिका भी कूद पड़ा है। अमेरिका द्वारा ईरान के प्रमुख 3 प्रमुख परमाणु ठिकानों पर हमला करने के बाद तनाव और अधिक बढ़ गया है। ईरान ने इस हमले के प्रत्युत्तर में अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि क्षेत्र में कोई भी अमेरिकी नागरिक या अमेरिकी संपत्ति सुरक्षित नहीं है। खबरों के अनुसार, अमेरिकी हमले से आक्रोशित ईरान अमेरिका के विरुद्ध संभावित जवाबी कार्रवाई की योजना बना रहा है।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, दो अमेरिकी अधिकारियों ने इस विषय पर चर्चा करते हुए बताया कि अमेरिका कूटनीतिक माध्यमों से इस समस्या का समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है। हालांकि, कई आकलन यह संकेत दे रहे हैं कि अगले एक या दो दिनों के भीतर ईरान मध्य-पूर्व में अमेरिकी सेना को निशाना बना सकता है।
इससे पहले, शनिवार को अमेरिका ने ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के तहत ईरान के तीन महत्वपूर्ण भूमिगत परमाणु केंद्रों को निशाना बनाया था। अमेरिका ने इस ऑपरेशन में खतरनाक बी-2 बॉम्बर विमानों का उपयोग करते हुए इन परमाणु केंद्रों पर हजारों किलो के बम गिराए। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कार्रवाई वैश्विक शांति के हित में की गई है और ईरान के परमाणु संवर्धन केंद्र को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है। हालांकि, ईरान ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उसके परमाणु केंद्र को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा है, लेकिन इस हमले का जवाब निश्चित रूप से दिया जाएगा।
ईरान की धमकी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ कोई युद्ध नहीं चाहता है, लेकिन यदि ईरान अमेरिका पर पलटवार करता है, तो उसे इसका बहुत ही गंभीर परिणाम भुगतना होगा।
मध्य-पूर्व में इस अमेरिकी हमले के बाद वैश्विक राजनीति में सरगर्मी बढ़ गई है। रूस और चीन सहित कई देशों ने इस कार्रवाई की निंदा की है, जबकि यूरोपीय देशों ने कूटनीति के माध्यम से मुद्दे को हल करने का आग्रह किया है। वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ईरान पर हुए इस हमले से काफी खुश नजर आए। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को धन्यवाद देते हुए कहा कि पहले शक्ति का प्रदर्शन आवश्यक है, उसके बाद ही शांति स्थापित हो सकती है।
गौरतलब है कि ईरान के ये तीनों ठिकाने जमीन से कई सौ मीटर नीचे बनाए गए थे, जिनकी गहराई के कारण इजरायल या किसी अन्य देश के लिए उन्हें नष्ट कर पाना संभव नहीं था। यही कारण है कि जब से ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष शुरू हुआ है, तभी से नेतन्याहू अमेरिकी राष्ट्रपति को इस युद्ध में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे थे, और आखिरकार शनिवार रात अमेरिकी विमानों ने ईरान की धरती पर भारी बमबारी करके क्षेत्र को तहस-नहस कर दिया।










