कुलाधिपति की अध्यक्षता में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झाँसी का 30वाँ दीक्षांत समारोह सम्पन्न हुआ
राज्यपाल ने जनपद झाँसी के लिए 200 तथा जनपद महोबा के लिए 300 आंगनबाड़ी किटों का किया वितरण

दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल जी ने विद्यार्थियों को अनुशासन का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को यह सीखने की आवश्यकता है कि किसी भी भाषण या मार्गदर्शन से क्या ग्रहण करना है और उसे जीवन में किस प्रकार उतारना है। विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई और तैयारी देश को ध्यान में रखकर करनी चाहिए। उन्होंने पुस्तकालय और शोध कार्य को शिक्षा का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि यही प्रयास भारत को विश्व पटल पर शीर्ष स्थान दिला सकते हैं।
राज्यपाल जी ने कहा कि छात्रों की न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होनी चाहिए, अन्यथा उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इस व्यवस्था को कड़ाई से लागू करने हेतु आवश्यकता पड़ने पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा सकते हैं और प्रयोगशाला उपस्थिति की निगरानी रखी जानी चाहिए। अक्सर देखा जाता है कि पहले सेमेस्टर में छात्र नियमित रहते हैं, किंतु बाद के वर्षों में उपस्थिति घटने लगती है। लगातार परीक्षाओं के दबाव के कारण उनके पास पढ़ाई और शोध हेतु पर्याप्त समय भी नहीं बचता। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को समय से कक्षा में पहुँचना चाहिए और विद्यार्थियों को पूरी निष्ठा से अध्ययन कराना चाहिए। शिक्षकों की नियुक्ति में पारदर्शिता होनी चाहिए तथा नियुक्तियाँ केवल आवश्यकता के अनुसार ही की जानी चाहिए, अनावश्यक नियुक्तियों से बचना चाहिए।
राज्यपाल जी ने कहा कि विश्वविद्यालयों में होने वाला अनुसंधान समाज और जनता के प्रत्यक्ष हित में होना चाहिए। शोध कार्य पूरा करके उसे फाइलों तक सीमित कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके निष्कर्षों के आधार पर सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए। रिसर्च प्रोजेक्ट्स को सफल बनाने के लिए फंडिंग एजेंसियों को भी समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने बल देते हुए कहा कि “विश्वविद्यालयों में होने वाला हर शोध जनता के कल्याण और समस्याओं के समाधान के लिए होना चाहिए, तभी उसका वास्तविक महत्व सिद्ध होगा।” विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं, बल्कि अनुभव और प्रेरणा देने वाले रियल हीरो से भी जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने हाल ही में अंतरिक्ष यात्रा कर लौटे ग्रुप कैप्टन श्री शुभांशु शुक्ला का उल्लेख किया।
राज्यपाल जी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पाँच स्थानों पर डिफेंस केंद्र स्थापित हो रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। साथ ही उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय में इसरो परियोजनाओं की उल्लेख करते हुए कहा कि भारत आज स्पेस टेक्नोलॉजी में वैश्विक पहचान बना रहा है। उन्होंने दीक्षांत समारोह की मुख्य अतिथि डॉ. चंद्रिका कौशिक से कहा कि वह अपनी टीम के साथ राजभवन आकर विश्वविद्यालयों के लिए पाठ्य सामग्री और फंडिंग एजेंसियों की नीतियों के निर्धारण में सहयोग करें।
राज्यपाल जी ने चिंता जताई कि विगत दो वर्षों से विश्वविद्यालय विद्यार्थियों की डिग्री और मार्कशीट डिजिलॉकर पर अपलोड कर रहे हैं, फिर भी अब तक हार्ड कॉपी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि “जब तकनीक उपलब्ध है, तो छात्रों को तैयार करना होगा कि वे अपने सभी दस्तावेज डिजिलॉकर से ही प्राप्त करें।”
राज्यपाल जी ने भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर का उल्लेख करते हुए कहा कि गणेश चतुर्थी प्रसंग में गणेश जी का सिर जोड़ा जाना विश्व की पहली शल्य चिकित्सा का उदाहरण माना जा सकता है। इसी प्रकार महाभारत में अभिमन्यु को गर्भ में शिक्षा मिलने का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि गर्भ संस्कार का प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर गहराई से पड़ता है। इस विषय पर विद्यार्थियों हेतु कार्यशालाएँ आयोजित किए जाने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने विश्वविद्यालयों और विद्यार्थियों ये अपेक्षा की कि वे दहेज प्रथा, मद्यपान और भीख माँगने जैसी सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध अभियान चलाएँ। छात्रों को संकल्प लेना चाहिए कि वे दहेज नहीं लेंगे और छात्राओं को संकल्प लेना चाहिए कि वे ऐसे जीवनसाथी का चयन करें जो दहेज और नशे के विरुद्ध हो। उन्होंने कहा कि परिवर्तन के लिए विद्यार्थियों को गाँवों में जाकर आमजन से संवाद करना होगा। छोटे-छोटे बच्चों को भीख माँगते देखना अत्यंत दुखद है। छात्र-छात्राओं और विश्वविद्यालयों का दायित्व है कि ऐसे बच्चों को विद्यालय तक पहुँचाने का प्रयास करें, उनके परिवार से संवाद करें और उनकी मदद करें। उन्होंने गुजरात राजभवन द्वारा चलाए गए ऐसे प्रयासों का उदाहरण भी प्रस्तुत किया।
राज्यपाल जी ने आंगनबाड़ी केंद्रों में सभी आवश्यक सुविधाएँ सुनिश्चित करने पर बल दिया और कहा कि जिलाधिकारी तथा जिला विकास अधिकारी इस पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने झाँसी और ललितपुर में जिलाधिकारियों द्वारा बच्चों को स्वच्छता किट वितरित किए जाने की सराहना की। साथ ही सुझाव दिया कि वरिष्ठ अधिकारी नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्रों, विद्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों और जेलों का औचक निरीक्षण करें। विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि “पढ़ते रहिए और देश को आगे बढ़ाइए।”
राज्यपाल जी ने देवी अहिल्याबाई महिला छात्रावासा, करगुआं जी स्थित कृषि फार्म के 02 कक्षों एवं रेस्टरूम, अर्थशास्त्र एवं वित्त संस्थान के 06 कक्षों, शिक्षा संस्थान भवन के 04 कक्षों, कम्प्यूटर सेन्टर भवन, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा प्राप्त अनुदान से आच्छादित फार्मेसी संस्थान भवन के 02 कक्षों एवं सेमिनार हॉल, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा प्राप्त अनुदान से आच्छादित कृषि विज्ञान संस्थान भवन के 06 कक्षों एंव कान्फ्रेन्स हॉल, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा प्राप्त अनुदान से आच्छादित आउटडोर स्टेडियम की आर.सी.सी. रिटेनिंग वॉल का लोकार्पण तथा उत्तर प्रदेश शासन द्वारा प्राप्त अनुदान से आच्छादित कर्मचारी आवासों के निर्माण कार्य, कृषि विज्ञान संस्थान भवन की कक्षाओं एवं प्रयोगशालाओं का उच्चीकरण कार्य, आवासीय परिसर की बाउन्ड्रीवॉल की मरम्मत के कार्य एवं आउटडोर स्टेडियम में टेनिस कोर्ट एवं हाई मास्ट लाइट के कार्य का शिलान्यास भी किया। राज्यपाल जी ने शिक्षकों का सम्मान तथा विभिन्न पुस्तकों का विमोचन किया। इस अवसर पर विद्यालय के बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए। उन्नत भारत अभियान के अंतर्गत गोद लिये गांवों के विद्यालयों में हुई प्रतियोगिताओं के छात्र- छात्राओं को पुरस्कार वितरित किए गए। राज्यपाल जी ने सभी उपाधियों एवं अंकपत्रों को डिजीलॉकर में अपलोड किया।
समारोह की मुख्य अतिथि डॉ० चन्द्रिका कौशिक, राज्य मंत्री (उच्च शिक्षा) श्रीमती रजनी तिवारी तथा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० मुकेश पाण्डेय ने भी अपने संबोधन में विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर जिलाधिकारी झांसी मृदुल कुमार, विश्वविद्यालय के समस्त संकायाध्यक्ष, कार्यपरिषद एवं विद्यापरिषद के सदस्यगण, आमंत्रित अतिथिगण, शिक्षकगण, विद्यार्थियों, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, बच्चों सहित अन्य महानुभावों की उपस्थिति रही।










