अयोध्या:राम मंदिर चढ़ावा मामला -एसआईटी ने जांच की पूरी,सीएम योगी को जल्दी सौपी जाएगी रिपोर्ट
SIT ने 15 जून से जांच शुरू की थी। मुख्यमंत्री ने मामले में लोगों से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा था कि जांच के बाद सभी तथ्य सामने आएंगे
अयोध्या (BNE ) : धार्मिक नगरी अयोध्या में स्थित राम मंदिर एक बार फिर सुर्ख़ियों में है। मंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर इन दिनों राम मंदिर प्रशसन के लोग शक के दायरे है। राज्य सरकार ने इसकी जाँच के लिए के लिए एसआईटी का गठन किया है। सूत्रों की मानें तो SIT आज अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप सकती है। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने शुरुआती जांच के लिए एक सप्ताह का समय निर्धारित किया था और आज उसकी समयसीमा का अंतिम दिन है। माना जा रहा है कि SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट 150 पन्नों से अधिक की हो सकती है।
SIT ने 15 जून से जांच शुरू की थी। मुख्यमंत्री ने मामले में लोगों से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा था कि जांच के बाद सभी तथ्य सामने आएंगे।
जांच के दौरान नोटों की गणना और चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की गई है। इनमें गणना कर्मी लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष यादव, रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव और राजेश पाठक शामिल हैं। इसके अलावा मंदिर की आंतरिक व्यवस्थाओं से जुड़े रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव से भी पूछताछ की गई।
आभूषणों की देखरेख करने वाले कृष्ण देव तिवारी, एसबीआई शाखा के अधिकारियों तथा दानराशि से जुड़े बैंककर्मियों से भी SIT ने जानकारी जुटाई है। वहीं, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और मंदिर परिसर प्रभारी गोपाल राव से भी पूछताछ की गई है।
सूत्रों के मुताबिक, मंदिर निर्माण और व्यवस्थाओं को लेकर आरोप लगाने वाले पूर्व इंजीनियर दीनानाथ वर्मा को भी SIT पूछताछ के लिए लखनऊ बुला सकती है। उन्होंने ट्रस्टी अनिल मिश्रा पर 40 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप लगाया था।
इधर, मंदिर में दान की गई चांदी की वस्तुओं को लेकर दानदाताओं ने भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। आजतक से बातचीत में दानदाता अनुराग रस्तोगी ने दावा किया कि उन्होंने भगवान रामलला को करीब 60 किलो चांदी की सिल्ली सहित कई बहुमूल्य वस्तुएं दान की थीं, लेकिन वर्तमान में उनकी स्थिति की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
रस्तोगी ने यह भी कहा कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने श्रद्धा स्वरूप एक विशेष चांदी का दीपक भी मंदिर को समर्पित किया था, जो अब मंदिर परिसर में दिखाई नहीं देता। उन्होंने मांग की कि मंदिर को दान में मिली सभी वस्तुओं का रिकॉर्ड और उनकी वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और दानदाताओं की शंकाओं का समाधान हो सके।
उन्होंने SIT जांच पर भरोसा जताते हुए कहा कि यदि उन्हें बयान दर्ज कराने या पूछताछ के लिए बुलाया जाता है, तो वे पूरा सहयोग करेंगे। उनके अनुसार, दान में मिली वस्तुओं की पारदर्शी निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। यह संस्करण समाचार शैली के अनुरूप, संतुलित और व्याकरणिक रूप से परिष्कृत है।










