नई दिल्ली–ममता बनर्जी पर भड़का सुप्रीम कोर्ट ,असली वजह है ये
‘मुख्यमंत्री लोकतंत्र को खतरे में डाल रही हैं’
नई दिल्ली(BNE )-पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के दौरान न्यायिक अधिकारियों के कथित घेराव और बंधक बनाए जाने की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। अदालत ने इसे बेहद गंभीर बताते हुए राज्य की मौजूदा स्थिति को “असाधारण” करार दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के दौरान न्यायिक अधिकारियों के कथित घेराव और बंधक बनाए जाने की घटनाओं पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। अदालत ने इसे बेहद गंभीर बताते हुए राज्य की मौजूदा स्थिति को “असाधारण” करार दिया।
जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत सिर्फ कानूनी सिद्धांतों तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि जमीनी हकीकत को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पीठ ने स्पष्ट किया कि राज्य में जो घटनाएं सामने आ रही हैं, वे न्यायिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक हैं।
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “यह एक असाधारण स्थिति है। हमारे सामने ऐसे मामले आए हैं जहां न्यायिक अधिकारियों को घेर लिया गया और उन्हें बंधक जैसा बना दिया गया। हम इन वास्तविकताओं से आंखें नहीं मूंद सकते।” मामले की अगली सुनवाई अब अगले दिन के लिए तय की गई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। विशेष रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कथित हस्तक्षेप को लेकर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि किसी भी जांच एजेंसी के काम में इस तरह दखल देना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है।
पीठ ने कड़े शब्दों में कहा कि “यह केवल राज्य और केंद्र के बीच का विवाद नहीं है। हमने कभी नहीं सोचा था कि कोई मौजूदा मुख्यमंत्री जांच के दौरान किसी एजेंसी के दफ्तर में इस तरह प्रवेश करेगी।” अदालत ने आगे कहा कि इस तरह की कार्रवाई लोकतंत्र के सिद्धांतों को कमजोर करती है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि कानून-व्यवस्था और न्यायिक स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही या हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।










