NEW DELHI-अब सोशल मीडिया पर ज्ञान बांटना इतना भी आसान नहीं हो पाएगा
चीन की सरकार ने नया कानून लागू किया है जिसके तहत अब कोई भी क्रिएटर अगर..
नई दिल्ली (BNE ) आज के इस डिजिटल दौर में सोशल मीडिया की छाप हर जगह है। सोशल मीडिया का ज्ञान किसी से भी नहीं छिपा है। मसला एंटरटेनमेंट से जुड़ा हो या व्यापार से या फिर आपकी हेल्थ से। आज के समय में हर सवाल का जवाब आपको सोशल मीडिया पर मिलता है। हर कोई एक्सपर्ट बन बैठा है कोई सेहत की सलाह देता है, कोई शेयर मार्केट का गुरु बन जाता है, तो कोई कानून सिखाने लगता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अब सोशल मीडिया पर ज्ञान बांटना इतना भी आसान नहीं हो पाएगा। दरअसल आपने भी कई बार ये देखा होगा कि जिस तरह से लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं उससे कई बार फेक न्यूज, बिना तथ्यों की जानकारी भी काफी तेजी से वायरल हो जाती है, इसी बढ़ती “फेक जानकारी” और “बेवजह की सलाह” पर लगाम कसने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। एक ऐसा कानून लागू कर दिया गया है जिसके चलते अब अगर कोई भी व्यक्ति हेल्थ, फाइनेंस, एजुकेशन या लॉ जैसे गंभीर विषयों पर जानकारी देना चाहता है, तो उसके पास उस विषय की डिग्री या प्रमाणपत्र होना जरूरी होगा। उसे मान्यता प्राप्त योग्यता का सबूत देना होगा। इन दिनों इस नए कानून की खूब चर्चा भी हो रही है।
अब आप सोच रहें होंगे कि आखिर इससे तो कई सारे कंटेट क्रिएटर की दुकानदारी बंद हो जाएगी। तो चौंकिए मत और घबराइए भी मत- कयोंकि फिलहाल ये कानून भारत में लागू नहीं हुआ हैं। दरअसल इस कानून को लागू करने वाला देश कोई और नहीं बल्कि भारत का पड़ोसी देश चीन है। चीन की सरकार ने नया कानून लागू किया है जिसके तहत अब कोई भी क्रिएटर अगर हेल्थ, एजुकेशन, लॉ या फाइनेंस जैसे रेगुलेटेड विषयों पर कंटेंट बनाना चाहता है, तो उसे उस विषय में अपनी योग्यता यानी डिग्री या लाइसेंस दिखाना होगा। इस कानून को Cyberspace Administration of China (CAC) ने तैयार किया है। जिसका मानना है कि यह कदम आम जनता को भ्रामक सलाह और झूठी सूचनाओं से बचाने के लिए उठाया गया है। यही नहीं चीन में यह नया नियम 25 अक्टूबर से लागू भी हो गया है। ये बात तो आप जानते ही हैं कि चीन के लोग इंस्टग्राम, फेसबुक या यूट्यूब यूज नहीं करते, चीन में WeChat, Xiaohongshu (लिटिल रेड बुक), Douyin, Weibo, QQ, Youku और BiliBili app यूज किए जाते है। अब चीन में चल रहे इन तमाम प्लेटफॉर्म को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि जो व्यक्ति सलाह दे रहा है, उसके पास सही प्रमाणपत्र हो। प्लेटफॉर्म को यह भी ध्यान रखना होगा कि वीडियो या पोस्ट में दी गई जानकारी के स्रोत और संदर्भ साफ-साफ बताए गए हों। यहीं नहीं कहा तो ये भी जा रहा है कि नए कानून के अनुसार, अगर कोई इन्फ्लुएंसर अपने कंटेंट में AI-Generated Material या किसी रिसर्च स्टडी का इस्तेमाल करता है तो उसे वीडियो या पोस्ट में यह स्पष्ट रूप से बताना होगा। इसके अलावा, यहा मेडिकल प्रोडक्ट्स, हेल्थ फूड्स और सप्लीमेंट्स से जुड़े विज्ञापनों पर भी प्रतिबंध लगाया है। ताकि प्रमोशन को रोका जा सके। इस कदम का उद्देश्य ऑनलाइन पारदर्शिता और जिम्मेदारी बढ़ाना है ताकि दर्शक यह जान सकें कि उन्हें जो जानकारी दी जा रही है वह प्रमाणिक है या नहीं। गलत जानकारी और लोगों को गुमराह करने से रोकने के लिए ही य कानून बनाया गया था।
हालांकि इस कानून के लागू होने के बाद यह भी कहा जा रहा है कि यहा विरोध के स्वर भी उठना शुरु हो गए हैं, कई लोग इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बता रहे हैं। उनका कहना है कि इस नियम से आम लोग या अनुभवी व्यक्ति, जो बिना डिग्री के भी काम जानते हैं, सोशल मीडिया से बाहर हो जाएंगे। इसके अलावा यह डर भी है कि सरकार इस नियम का इस्तेमाल विरोधी आवाज़ों को दबाने में कर सकती है। वहीं कहा जा रहा है कि कुछ लोग इस फैसले से खुश भी हैं। क्योंकि उनका कहना है कि यह सही समय पर लिया गया कदम है जिससे प्लेटफॉर्म पर सिर्फ जानकार और योग्य लोग ही गंभीर मुद्दों पर राय देंगे। खैर चीनी सरकार भविष्य में क्या करेगी क्या नहीं, सोश्ल मीडिया प्लेटफोर्म पर वो किसे बोलने देगी किसे नहीं ये तो वक्त बताएगा। लेकिन इस बात में कोई दो राय नहीं कि बढ़ते सोशल मीडिया के क्रेज के बीच फेक न्यूज का चलन बढ़ा है। फिर चाहे वो चीन हो या भारत। भारत की ही बात करें तो यहां भी सोशल मीडिया पर गलत जानकारी और झूठी मेडिकल सलाह आम है। तो क्या भारत में भी इस तरह के किसी कानून को लाने की जरूरत है.. यकीनन ये सवाल काफी बड़ा है। हो सकता है इस पर लोगों की राय भी मिली जुली हो। लेकिन ये तो साफ है कि समय के साथ कुछ हद तक तो बदलाव होना चाहिए, ताकि फेक न्यूज पर कंट्रोल किया जा सके। अब तो भारत में AI जेनरेटिड वीडियो भी इतनी तेजी से वायरल हो रहे हैं कि पता लगा पाना मुश्किल है कि ये टेक्नोलॉजी का कमाल है या हकीकत. जाहिर है इससे लोग गुमराह होते हैं कई बार वो उन बातों को सच मान लेते हैं जो कभी घटित हुई ही नहीं।










