NEW DELHI-सरकार सोशल मीडिया पर पाबंदी के लिए बना रही है ये नया प्लान
उम्र के हिसाब से बन सकते हैं नियम
कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की सरकारें पहले ही उठा रही कदम
Children’s Social Media Use: वर्तमान समय में नवयुवक सोशल मीडिया की गिरफ्त में जकड़े हुए है। केंद्र सरकार के साथ देश के तमाम राज्यों ने इस संकट को गंभीरता से लिया है। सरकार सोशल मीडिया पर पावंदी लगाने के लिए नया नियम बनाने पर विचार कर रही है। इन बनने वाले नए नियमो में अलग-अलग उम्र के बच्चों के लिए अलग-अलग नियम होंगे।
क्या है सरकार का प्लान?
केंद्र सरकार बच्चों को तीन आयु वर्गों में बांटकर उन पर पाबंदियां लगाने का प्रस्ताव तैयार कर रही है:
8 से 12 साल: इस उम्र के बच्चों के लिए सबसे कड़े नियम होंगे।
12 से 16 साल: इस वर्ग के लिए मध्यम स्तर की पाबंदियां होंगी।
16 से 18 साल: इस आयु वर्ग के किशोरों के लिए नियमों में थोड़ी ढील दी जाएगी।
किन पाबंदियों पर हो रहा है विचार?
प्रस्तावित कानून के तहत कई कड़े कदम उठाए जा सकते हैं:
टाइम लिमिट: बच्चे दिन में कितने घंटे सोशल मीडिया इस्तेमाल कर सकते हैं, इसकी सीमा तय की जा सकती है।
नाइट कर्फ्यू: देर रात या शाम के समय बच्चों के लॉग-इन करने पर रोक लगाई जा सकती है।
पेरेंटल कंसेंट: नाबालिगों के अकाउंट के लिए माता-पिता की अनिवार्य मंजूरी लेनी होगी।
सुरक्षा फीचर्स: सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसे सिस्टम लगाने होंगे जो बच्चों की उम्र की पहचान कर सकें और उन्हें उम्र के हिसाब से ही कंटेंट दिखाएं।
कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की सरकारें पहले ही उठा रही कदम
केंद्र के अलावा कई राज्य सरकारें भी अपने स्तर पर कड़े कदम उठा रही हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 2026-27 के बजट में घोषणा की है कि राज्य में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की योजना है। वहीं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने संकेत दिया है कि वे अगले 90 दिनों में 13 या 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंधित करने पर विचार कर रहे हैं।
कंपनियों को सता ही इस बात की चिंता
मेटा (Meta) जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियों और डिजिटल अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्थाओं ने इन पाबंदियों पर सवाल भी उठाए हैं। कंपनियों का तर्क है कि अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग नियमों से पालन करना मुश्किल होगा। साथ ही, डर है कि बैन की वजह से बच्चे सुरक्षित प्लेटफॉर्म छोड़कर ‘अनरेगुलेटेड’ साइट्स की तरफ न चले जाएं।
वहीं ‘इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन’ का मानना है कि केवल बैन लगाने से समस्या हल नहीं होगी। प्लेटफॉर्म के डिजाइन में बदलाव, डेटा सुरक्षा और डिजिटल साक्षरता पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।
दुनिया भर में बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने का बढ़ता चलन
भारत अकेला ऐसा देश नहीं है जो यह कदम उठा रहा है। कई देशों ने पहले ही सख्त कानून लागू कर दिए हैं। ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध। ऐसे ही फ्रांस और ग्रीस 15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया यूज पर पाबंदी। इंडोनेशिया में 28 मार्च से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए फेसबुक, टिकटॉक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर अकाउंट बनाने पर रोक।










