नई दिल्ली-जन्म मृत्यु पंजीकरण को लेकर सरकार लाने जा रही है ये नया नियम
रजिस्ट्रेशन में देरी करने परहोंगे सख्त नियम
पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (First-Class Judicial Magistrate) के आदेश के बाद ही संभव होगा।
नई दिल्ली (BNE ) :केंद्र सरकार ने जन्म मृत्यु पंजीकरण को लेकर बड़ा बदलाव किया है। प्रस्तावित संशोधन के तहत यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना दो वर्ष के भीतर संबंधित अधिकारियों को नहीं दी जाती है, तो उसका पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (First-Class Judicial Magistrate) के आदेश के बाद ही संभव होगा।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गृह मंत्रालय ने ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम’ में संशोधन का प्रस्ताव बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष रखा। इस बदलाव का उद्देश्य देर से होने वाले पंजीकरण पर सख्ती करना, जन्म और मृत्यु का रिकॉर्ड समय पर दर्ज कराना तथा फर्जीवाड़े और दुरुपयोग पर रोक लगाना है। सरकार का लक्ष्य है कि सभी जन्म और मृत्यु का रिकॉर्ड लगभग रियल-टाइम में डिजिटल प्रणाली के माध्यम से दर्ज हो, जिससे नीतिगत फैसलों और प्रशासनिक कार्यों में सटीक आंकड़ों का उपयोग किया जा सके।
मौजूदा नियमों के अनुसार, प्रत्येक जन्म और मृत्यु का पंजीकरण 21 दिनों के भीतर स्थानीय रजिस्ट्रार के पास डिजिटल सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के जरिए कराना अनिवार्य है। यदि सूचना 30 दिनों के बाद लेकिन एक वर्ष के भीतर दी जाती है, तो जिला रजिस्ट्रार या अधिकृत अधिकारी की लिखित अनुमति, निर्धारित शुल्क और स्वयं प्रमाणित (सेल्फ-अटेस्टेड) दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण किया जा सकता है।
वर्तमान में एक वर्ष से अधिक की देरी होने पर संबंधित क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट (DM), उपमंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या कार्यकारी मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) की अनुमति से पंजीकरण संभव है। प्रस्तावित संशोधन के तहत दो वर्ष तक की देरी होने पर यही व्यवस्था लागू रहेगी, लेकिन दो वर्ष से अधिक की देरी होने पर पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश से ही किया जा सकेगा।
प्रस्तावित संशोधन को जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।










