लोक कलाएं भारतीय परम्परो का दस्तावेज हैं इनमे हमारी पीढ़ियों की विरासत छुपी है
सनातन संस्कृति और भारतीय परम्पराओ को जीवंत रखने में लोक कलाएं सहायक
ग्रीष्मकालीन लोककला शिविर के अंतर्गत गत का आयोजन मधुबनी ,गोंड ,वर्ली ,चैक पुरना लोक कलाओं का प्रशिक्षण

LUCKNOW (BNE)। कमला दयाल फाउंडेशन एवं कला निकेतन सोसयटी के सहयोग से कलाकथा लोककला ग्रीष्मकालीन 10 दिवसीय कला शिविर का आयोजन किया गया है। कला शिविर का उद्देश्य मधुबनी ,गोंड ,वर्ली ,चैक पुरना जैसी लोक कलाओं के द्वारा बच्चों को अपनी संस्कृति, परंपराओं और जीवन के बारे में जानने, कलात्मक कौशल विकसित करने और अपने समुदाय के बारे में एक गहरी समझ विकसित करना है। कला शिविर का आयोजन सेन्ट मैरी कन्वेंट स्कूल लखनऊ, डी0 पी0 कॉन्वेंट स्कूल एम0डी0 इंटर काॅलेज , में वर्कशाप कोअर्डिनेटर व विशिष्ट कला अध्यापको आरती वर्मा , प्रदीप ब्याहुत सुनील झा , दिलीप प्रधान के निर्देशन में किया जा रहा है। कार्यशला में मधुबनी, गोंड एवं उत्तर प्रदेश की लुप्त होती लोककला चौक पूरना के बारे में इनमें छुपी परम्परों , इनकी विशेषताओं से परिचित कराया गया
इस अवसर पर कला निकेतन संस्था एवं ललित कला अकादमी से सदस्य अभिनवदीप ने कहा लोक कला की यह कृतियां उनमे छुपी कहानियों के साथ बच्चो को उन की परम्पराओ से परिचित कराएगी।
मीडिया काउंसिल ऑफ इंडिया के सचिव श्रीश सिंह ने कहा इस तरह की लोक कला कार्यशला लुप्त होती कला परंपराओं को युवा कलाकारों द्वारा सीखने और अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि इन्हें अंततः एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके।
कमला दयाल फाउंडेशन की अध्यक्ष कमला गुप्ता ने कहा .कलाकथा लोक कला शिविर सांस्कृतिक विरासत और कलात्मक अभिव्यक्तियों में से एक है जो समृद्ध परंपराओं से भरी दुनिया को संरक्षित करता है और यह सुनिश्चित करता है कि बदलती दुनिया में भी ऐसी परंपराएँ बनी रहें। और यह अपनी जड़ों के प्रति सम्मान बनाए रखते हुए विकसित होता है, यह शिविर आने वाले कई वर्षों तक भारतीय लोककला की कई विरासतों को बढ़ावा देने और बनाए रखने के लिए सशक्त बना रहेगा।
भारतीय लोक कलाएं अपने भीतर भरतीय परम्परो का पूरा दस्तावेज सहेजे हैं हमारी कोशिश अमूल्य विरासत को आगे बढ़ा सकें।
कलाकार संजीव गुप्ता ने सभी उपस्थित लोगों की सक्रिय भागीदारी और समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया, एवं कार्यशाला को सफल बनाने के लिए प्रो अरूण श्रीवास्तव, आभा सिंह, रोहित कश्यप, शिवम सिंह, अन्य उपस्थित लोगों के सहयोग अतुलनीय रहा।










