
रिश्ते में अलगाव के बाद भी सहज ज़िंदगी जीने की उम्मीदें
डॉ विजय गर्ग
तलाकशुदा महिलाओं के लिए अपने न दिखाई देने वाले ज़ख्मों से उबरना आसान नहीं होता है। खासकर तब जब किसी विवाह के कष्टकारी रिश्ते के टूटने के साथ ही वे खुद भी भीतर से टूट जायें। ऐसे में आपके पास आपबीती सुनाने यानी अपना दर्द साझा करने के लिए कोई उपयुक्त व्यक्ति चाहिये। कोई ऐसा जो उस ट्रॉमा को समझ सके। जिससे आपको लगे कि वो रिश्ता टूटने के बाद भी जिंदगी को बेहतर ढंग से जीना है। इसी मकसद से जुड़ी पहल है ‘ब्रेक फ्री स्टोरीज’।
उमा की शादी मात्र 21 वर्ष की आयु में कर दी गई थी। लेकिन जब उसके विवाह ने भयावह मोड़ लिया तो वह डिप्रेशन में चली गई। आठ साल के उत्पीड़न व मानसिक क्रूरता से वह इतना तंग आ गई थी कि उसने ख़ुदकुशी का प्रयास किया, लेकिन उसके पिता ने उसकी जान बचा ली। आखि़रकार उसने ज़हरीले संबंध पर विराम लगाया, अपनी शिक्षा मुकम्मल की और उसे दुबई में फार्मासिस्ट का जॉब मिल गया। अब वह स्वतंत्र प्रोफेशनल है, लेकिन अब भी अपने भावनात्मक उपचार की कोशिश में लगी हुई है। तलाकशुदा महिलाओं के लिए अपने न दिखाई देने वाले ज़ख्मों से उबरना आसान नहीं होता है और अब 36 साल की हो चुकीं उमा को अपने दुःख को प्रोसेस करने के लिए एक आदर्श जगह जगह मिली है- ब्रेक फ्री स्टोरीज, जोकि तलाकशुदा कलेक्टिव (समूह) है, जिसे मालाप्पुरम, केरल की राफ़िया अली ने आरंभ किया है। उमा बताती हैं, ‘अपनी कहानी को उन लोगों के साथ साझा करने से जो वास्तव में मेरे दर्द को समझते हैं और जो बिना फैसलाकुन टिप्पणी के सुनते हैं, एक पूर्णतः नया अनुभव था मेरे लिए। वर्षों की थैरेपी की तुलना में मुझे इससे अधिक लाभ मिला।’
ऑफ़लाइन कैंप की सकारात्मक पहल
मई 2025 में लगभग 20 महिलाएं इदुक्की ज़िले (केरल) के पहाड़ी कस्बे वागामोन में ब्रेक फ्री स्टोरीज द्वारा आयोजित पहले ऑफ़लाइन कैंप में एकत्र हुई थीं। तब तक यह समूह व्हाट्सएप व इंस्टाग्राम पर सक्रिय था। कुछ महिलाएं पहली बार अकेले यात्रा करके इस कैंप में पहुंचीं थीं। समूह में तलाकशुदा, विधवा और अपने जीवनसाथियों से अलग हुई महिलाएं थीं। वे टेंट में ठहरीं, ट्रैकिंग के लिए गईं, गेम्स खेले और ठंडेपन को तोड़ने वाले सत्रों में शामिल हुईं ताकि एक-दूसरे को बेहतर तरीके से जान व समझ सकें। उन्होंने अपने गहरे व्यक्तिगत अनुभवों को साझा किया।
विवादों में क़ानूनी मदद भी
राफ़िया ने बताया, ‘मैंने संख्या को 20 के नीचे रखने का प्रयास किया; क्योंकि छोटे समूह में लोग आसानी से खुल जाते हैं। मदद के लिए हमारे पास एक क़ानूनी सलाहकार भी है, विशेषकर उन मामलों के लिए जिनमें महिलाएं लम्बे क़ानूनी विवाद में फंसी हुई हैं। लेकिन मैं यह भी जानती हूं कि अनेक बाधाओं की वजह से बहुत सी महिलाएं इस प्रकार के कैंप में हिस्सा नहीं ले सकतीं। उनके लिए मैं ऑनलाइन सत्रों का आयोजन करती हूं।’ इसके बाद इस प्रकार के कैंप अनेक जगहों पर आयोजित किये गये और एक अंतर्राष्ट्रीय कैंप का आयोजन दुबई में भी हुआ। दुबई में संयोग से कैंप का आयोजन उस समय हुआ था, जब यह खबर सुर्खियों में थी- शारजाह में केरल की एक 32-वर्षीय महिला विपनचिका मणियान अपनी 18 माह की बेटी के साथ दहेज उत्पीड़न की वजह से मृत पायी गई थी।
दुबई शिविर में साझा किये ट्रॉमा
राफ़िया का कहना है कि तलाक के बाद बहुत सी महिलाएं ट्रॉमा व कलंक से बचने के लिए विदेश चली जाती हैं। राफ़िया के अनुसार, ‘मेरे पास बहुत सारी कॉल दुबई से आ रही थीं। इसलिए दुबई में एक रात, दो दिन के स्टेकेशन की योजना बनायी गई, लेकिन उस रात कोई भी नहीं सोया, महिलाएं रोती रहीं, एक -दूसरे को गले लगाती रहीं और पुष्टि करती रहीं कि उनका ट्रॉमा वास्तविक था व उनकी कोई गलती नहीं थी। तब से उन्होंने एक अति सक्रिय सपोर्ट ग्रुप बना लिया है।’ दरअसल, राफ़िया तलाक के कारण अपने व्यक्तिगत दुःख से उबरने का प्रयास कर रही थीं, जिसने उन्हें ब्रेक फ्री स्टोरीज के गठन की प्रेरणा दी। वह बताती हैं, ‘मैं स्वयं एक तलाकशुदा महिला हूं और अपने परिवार व दोस्तों के मज़बूत सपोर्ट सिस्टम के बावजूद मेरे लिए अपनी त्रासदी से उबर पाना अविश्वसनीय रूप से बहुत कठिन था। बाद में जब मैं ऑनलाइन कंटेंट तैयार करने लगी, तो बहुत महिलाएं मुझसे संपर्क करने लगीं। मुझे जल्द ही अहसास हो गया कि अनगिनत महिलाएं तलाक के कारण तनाव व दुःख से जूझ रही हैं और उनके पास सपोर्ट नाम की कोई चीज़ नहीं है। इस बात ने ही मुझे पहला कैंप आयोजित करने के लिए प्रेरित किया था।’
सशक्त होने का अहसास
कैंप में बहुत सी महिलाएं संकोच व संदेह के साथ आयी थीं, लेकिन जल्द ही उन्होंने आरामदायक व सहयोगी वातावरण खोज लिया। उमा ने बताया, ‘यह वह जगह है जहां आप आसानी से अपने मन का बोझ उतार देती हैं। हम उन महिलाओं से घिरी हुईं थीं, जिन्होंने बिना कुछ बोले तुरंत हमारी परेशानियों को समझा। उनसे बात करके लगा कि वे हमारी अपनी हैं और मुझे सशक्त होने का अहसास हुआ। साथ ही यह अच्छा अनुभव रहा कि महिलाएं अपने खोल से बाहर निकलीं और पहली बार उन्होंने अपनी हक़ीक़त को गले लगाया।’
एक मकसद से उपजा समुदाय
ब्रेक फ्री स्टोरीज अब एक समुदाय बन गया है। हज़ारों महिलाएं इसके इंस्टाग्राम पेज को फॉलो करती हैं। हालांकि आगामी कैम्पों और वीडियोज के नोटिफिकेशंस को हज़ारों व्यूज मिलते हैं, लेकिन इस प्लेटफार्म को नकारात्मक कमेंट्स भी मिलते हैं, जैसे महिलाओं को कैम्पों की बजाय नये जीवनसाथी तलाशने पर फोकस करना चाहिए। राफ़िया कहती हैं, ‘मेरे इंस्टाग्राम पेज का कमेंट सेक्शन बहुत बुरा है, लेकिन ठीक है, जिसकी जैसी सोच। शादी बहुत सुंदर है अगर सही व्यक्ति मिल जाये, लेकिन संबंध पर विराम लगाना ज़िंदगी का अंत नहीं है और मैं केवल यही संदेश फैलाना चाहती हूं।’
डॉ विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब
Post Views: 36