
गर्मी बढ़ा रहे हैं घटते हुए बादल -विजय गर्ग
पृथ्वी के लिए बादलों के आवरण का विशेष महत्व है। बादल न सिर्फ धरती की प्यास बुझाते हैं, बल्कि सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करके हमारे ग्रह को ठंडा रखने में भी मदद करते हैं, लेकिन अब घने काले बादलों का क्षेत्र सिकुड़ने लगा है। इन बादलों को स्टार्म क्लाउड भी कहा जाता है। चिंता की बात यह है कि यह सिकुड़न अधिक सौर विकिरण को अंदर आने दे रही है। नासा के नेतृत्व में किए गए एक नए अध्ययन से पता चलता है कि पृथ्वी की हाल में गर्मी बढ़ने का यह सबसे बड़ा कारण है।
उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों और भूमध्य रेखा तथा ध्रुवीय क्षेत्रों के बीच के इलाकों में काले बादलों के क्षेत्र प्रति दशक 1.5 प्रतिशत से तीन प्रतिशत तक सिकुड़ गए हैं। ये क्षेत्र पहले बहुत अधिक मात्रा में सूर्य के प्रकाश को वापस अंतरिक्ष में परावर्तित करते थे। बादलों के गायब होने से अधिक गर्मी पृथ्वी की सतह तक पहुंच रही है। आस्ट्रेलिया के मोनाश विश्वविद्यालय के प्रोफेसर क्रिश्चियन जैकब ने कहा कि यह खोज स्पष्ट करती है कि पृथ्वी अब कितनी अतिरिक्त सौर ऊर्जा अवशोषित करती है। विशेषज्ञों ने अपने अध्ययन 2001 से 2023 तक के उपग्रह डाटा का उपयोग किया। उन्होंने बादलों के आवरण और सौर विकिरण पर बादलों के प्रभाव को मापा । इस प्रभाव को ‘शार्टवेव रेडिएशन इफेक्ट’ कहा जाता है। विज्ञानियों का एक उद्देश्य यह पता लगाना था कि बादल सूर्य की कितनी रोशनी वापस लौटाते हैं। अधिक नकारात्मक संख्या का मतलब है कि अधिक सूर्य की रोशनी परावर्तित हो रही है, लेकिन विज्ञानियों ने यह भी पाया कि मजबूत रेडिएशन प्रभाव वाले क्षेत्र सिकुड़ रहे हैं।
इन सबका नतीजा अधिक गर्मी के रूप में सामने आ रहा है। प्रति दशक अवशोषित सौर ऊर्जा में कुल वृद्धि में बड़ा हिस्सा सिकुड़ते बादल क्षेत्रों का था। बादल वाले क्षेत्र में छोटी सी कमी भी पृथ्वी के ताप पर बड़ा प्रभाव डालती है । अध्ययन के अनुसार अधिकांश गर्मी काले बादलों के क्षेत्र में कमी के कारण आई है। बादलों के भीतर के परिवर्तनों के कारण ऐसा नहीं हुआ। काले बादल क्यों सिकुड़ रहे हैं? विज्ञानियों का कहना है यह मुख्य रूप से वैश्विक पवन पैटर्न परिवर्तनों के कारण हो रहा है। हैडली सेल (भूमध्य रेखा से उठने वाली हवा ) चौड़ी हो रही है तथा जेट स्ट्रीम (वायुमंडल में तेज बहने वाली हवा) ध्रुवों की ओर बढ़ रही है। ये रुझान जलवायु माडल द्वारा ग्रह के गर्म होने की भविष्यवाणी से मेल खाते हैं। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि जेट स्ट्रीम में गर्मी से प्रेरित बदलाव के कारण ध्रुवीय क्षेत्रों के आसापास के क्षेत्रों में काले बादल पीछे हट रहे हैं। अध्ययन हाल में देखी गई असाधारण गर्मी की पहेली को समझने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और तत्काल जलवायु कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर देता है।
विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब
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