
फलदार वृक्ष लगाने से गर्मी को कम करने और खाद्य सुरक्षा को भी मिलेगा नया आयाम
जिन शहरों में पेड़ की संख्या अधिक वहां गर्मी कम होती है
प्रोफेसर आर एस सेंगर
निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ
: शहर और कस्बे अपने आस-पास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में आमतौर पर एक से 3 °C अधिक गर्म रहते हैं। इसका प्रमुख कारण कंक्रीट दामामर की सड़कें और ईंट जैसी निर्माण सामग्री है जो सूरज की गर्मी को तेजी से सोकर धीरे-धीरे वातावरण में छोड़ती रहती है। कई बड़े शहरों में, यह तापमान अंतर 7 °C तक पहुंच जाता है। इसी प्रभाव को अर्बन हीट आइलैंड यानी शहरी ऊष्मा द्वीप कहा जाता है। जलवायु परिवर्तन के दौर में यह स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पेड़ वास्तव में शहरों की गर्मी कम करने में सहायक हो सकते हैं?
इन्हीं सवालों को ध्यान में रखते हुए, वैज्ञानिकों ने दुनिया भर के लगभग नौ हजार शहरों के तापमान और पेड़ों की सघनता से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया।अध्ययन में पाया गया है कि पेड़ अर्बन हिट आइलैंड प्रभाव से पैदा होने वाली गर्मी को लगभग आधा कर देते हैं, और कई शहरों में तापमान को 0.5 से 1.5 °C तक कम कर सकते हैं। पेड़ प्रकृति के सबसे प्रभावी नेचुरल एयर कंडीशनर माने जाते हैं। उनकी घनी छाया जमीन, सड़कों और इमारतों को सीधे सूरज की तपिश से बचाती है, जिससे डामर और कंक्रीट कम गर्म होते हैं, साथ ही पेड़ अपने पत्तों के माध्यम से जलवाष्प छोड़ते हैं जो आस-पास की हवा को ठंडा करने में मदद करती है। यही कारण है कि गर्म दिनों में पेड़ों से घिरे इलाके अपेक्षाकृत अधिक ठंडे महसूस होते हैं। यही वजह है कि पेड़ों से भरपूर इलाके कई डिग्री तक ठंडे महसूस होते हैं। फिर भी, केवल पेड़ लगाना पर्याप्त नहीं होगा। शोध के अनुसार, मौजूदा शहरी पेड़ इस सदी के मध्य तक जलवायु परिवर्तन से पड़ने वाली अतिरिक्त गर्मी का केवल लगभग 10% हिस्सा ही कम कर पाएंगे। बड़े पैमाने पर वृक्षों पर होने पर यह आंकड़ा 20% तक पहुंच सकता है पर समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी, इसलिए पेड़ों के साथ-साथ बेहतर शहरी डिज़ाइन भी जरूरी है। ऐसी निर्माण सामग्री का उपयोग जो गर्मी कम सूखे और अधिक परिवर्तित करे, हरित क्षेत्रों का विकास, हरित छतें, छायादार छड़ें और इमारतों के बीच बेहतर वायु प्रभाव जैसी रणनीतियां तापमान कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। आखिरकार, पेड़ गर्मी को काफी हद तक कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं, इसलिए सरकार और जनता को इस बात का ध्यान रखना होगा कि अधिक से अधिक वृक्षारोपण करके
गर्मी को कम करने में अपना योगदान दे। साथ ही यदि प्रत्येक परिवार कोशिश करे तो उसको एक फलदार वृक्ष लगाकर उसका पालन पोषण करना है तो निश्चित रूप से गर्मी तो कम ही होगी। साथ ही खाद्य सुरक्षा को बल मिल सकेगा और लोगों की इम्युनिटी को बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।इसके लिए शहरी तथा ग्रामीण इलाकों में सामूहिक रूप से इस वर्ष प्रयास करना होगा कि अधिक से अधिक अपनी मेड़ों पर सड़क के किनारे घर के पीछे पड़ी हुई, खाली जमीन पर फलदार वृक्षों का रोपण करें और अपने भविष्य को सुरक्षित करने में अपनी भागीदारी दें
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