वाशिंगटन-अमेरिका में 13.5 फीसदी घटी भारतीय छात्रों की संख्या
सक्रिय अंतरराष्ट्रीय छात्रों में भारत की हिस्सेदारी लगभग 28.5 प्रतिशत से घटकर लगभग 26.6 प्रतिशत हो गई है।
नेपाल से अमेरिका में पढ़ाई कर रहे छात्रों की संख्या 35,273 से घटकर 33,992 रह गई है।
वाशिंगटन (BNE): अमेरिकी सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वहां रह रहे सक्रिय भारतीय छात्रों की संख्या एक साल में लगभग 13.5 प्रतिशत घटकर 3,16,893 रह गई है। इसमें सबसे बड़ी गिरावट ‘मास्टर्स’ (स्नातकोत्तर) स्तर पर देखी गई है, हालांकि इसके बावजूद भारत अभी भी अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है।
स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर इंफॉर्मेशन सिस्टम (एसईवीआईएस) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2026 में भारत से सक्रिय छात्रों की संख्या 316,893 थी, जो अक्टूबर 2025 में 366,258 थी यानी इसमें 49,365 की कमी आई है।
यह गिरावट कुल गिरावट के मुकाबले कहीं अधिक थी। एसईवीआईएस में कुल सक्रिय अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या 1,283,240 से घटकर 1,192,572 हो गई, जो लगभग 7.1 प्रतिशत की कमी है।
चीन से आने वाले छात्रों की संख्या में भी कमी आई है। ये दूसरा सबसे बड़ा समूह है, और इसमें लगभग 10.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। ये 245,038 से घटकर 220,157 रह गईं।
सक्रिय अंतरराष्ट्रीय छात्रों में भारत की हिस्सेदारी लगभग 28.5 प्रतिशत से घटकर लगभग 26.6 प्रतिशत हो गई है।
भारतीय छात्रों में यह गिरावट मुख्य रूप से मास्टर्स (स्नातकोत्तर) प्रोग्राम में देखी गई, जहां भारतीय छात्रों का सबसे बड़ा हिस्सा नामांकित होता है। मास्टर्स प्रोग्राम में भारतीय छात्रों की संख्या 292,929 से घटकर 234,034 रह गई, जो लगभग 20 प्रतिशत की कमी है।
इसके विपरीत, डॉक्टोरल (पीएचडी) स्तर पर नामांकन में वृद्धि हुई है। डीएचएस के आंकड़ों के अनुसार, डॉक्टोरल स्तर पर भारतीय छात्रों की संख्या 28,609 से बढ़कर 41,729 हो गई।
अक्टूबर 2026 में स्नातक (बैचलर) स्तर पर भारतीय छात्रों की संख्या 36,011 थी, जबकि एक साल पहले यह 38,522 थी।
कुल भारतीय छात्रों में 195,341 पुरुष और 121,552 महिला छात्र शामिल थे।
एसईवीआईएस के आंकड़ों में उन छात्रों को गिना जाता है जिनके रिकॉर्ड सिस्टम में सक्रिय हैं, जिनमें ‘ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग’ (ओपीटी) वाले छात्र भी शामिल हैं। ये आंकड़े किसी एक महीने की स्थिति को दर्शाते हैं, न कि पूरे साल का कुल योग।
यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब अमेरिका में छात्र वीजा की जांच-पड़ताल सख्त हो गई है, ओपीटी और स्टेम एक्सटेंशन पर नई फीस लगाने का प्रस्ताव है, और कानूनी आव्रजन (इमिग्रेशन) के रास्तों पर भी सख्ती बढ़ाई जा रही है।
भारतीय मूल के नेताओं के एक गैर-लाभकारी नेटवर्क, ‘इंडियास्पोरा’ ने 30 अक्टूबर को एक बयान में कहा कि “अमेरिका में पढ़ाई करने के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या कम हो रही है।” उन्होंने इस रुझान को मौजूदा चुनावी मौसम में चल रही “भारत-विरोधी बयानबाजी” से जोड़ा है।
दक्षिण एशिया के अन्य देशों से भी अमेरिका जाने वालों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। नेपाल से अमेरिका में पढ़ाई कर रहे छात्रों की संख्या 35,273 से घटकर 33,992 रह गई है।










