नई दिल्ली-इन तीन चमत्कारिक मंत्रो से खुश होंगी मां लक्ष्मी और कुबेर देव
जाने जप का सही समय और विधान ,धन की होगी बारिश
महालक्ष्मी मूल मंत्र: तंगहाली और कर्ज से मुक्ति दिलाने वाला महाउपाय
नई दिल्ली (BNE): सनातन परंपरा में देवी-देवताओं की आराधना और विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मंत्र जप को सर्वोपरि साधन माना गया है। शास्त्रों के अनुसार शुद्ध अंतःकरण और विधि-विधान से किए गए जप में वह शक्ति होती है जो जीवन की दिशा बदल सकती है। आज के भौतिकवादी दौर में हर इंसान अपने परिवार के लिए अथाह धन-दौलत, ऐश्वर्य और कर्जमुक्त जीवन की कामना करता है। कठिन परिश्रम और ईमानदारी के साथ यदि ज्योतिष में बताए गए कुछ खास शक्तिशाली मंत्रों का नियमित पाठ किया जाए, तो आर्थिक संकट के बादल छंट जाते हैं और घर में धन की देवी मां लक्ष्मी व धन के अधिपति कुबेर देव का स्थाई बसेरा होता है।
महालक्ष्मी मूल मंत्र: तंगहाली और कर्ज से मुक्ति दिलाने वाला महाउपाय
मां लक्ष्मी को प्रसन्न कर दरिद्रता को जड़ से समाप्त करने के लिए उनका मूल मंत्र अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। साधक को नियमित रूप से ‘ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नमः’ अथवा इसके संक्षिप्त स्वरूप ‘ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ का श्रद्धापूर्वक जप करना चाहिए। इस मंत्र के निरंतर पाठ से जातक के जीवन में धन, वस्त्र और अन्न का अभाव हमेशा के लिए दूर हो जाता है। लंबे समय से चल रही तंगहाली, भारी कर्ज और जीवन में आने वाली अचानक बाधाएं इस मंत्र के प्रभाव से कट जाती हैं। कार्यक्षेत्र या व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होकर सफलता के नए रास्ते खुलने लगते हैं और परिवार में शांति व सकारात्मकता का संचार होता है।
कुबेर धन मंत्र: संचित पूंजी की रक्षा और बचत बढ़ाने का साधन
मां लक्ष्मी जहां धन के आगमन का मार्ग बनाती हैं, वहीं देवों के कोषाध्यक्ष कुबेर उस धन को संचित और स्थिर रखने की क्षमता प्रदान करते हैं। धन के ठहराव और फिजूलखर्ची पर अंकुश लगाने के लिए ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः’ मंत्र का उच्चारण विशेष रूप से फलदायी है। इस मंत्र का नियमित स्मरण करने से व्यक्ति को अनावश्यक खर्चों से मुक्ति मिलती है और बचत में तेजी से इजाफा होता है। यदि लंबे समय से किसी के पास आपका धन अटका हुआ है, तो इस मंत्र के शुभ प्रभाव से उसकी वापसी के मार्ग प्रशस्त होते हैं। यह मंत्र व्यापार और नौकरी में निरंतर तरक्की के योग बनाकर आर्थिक चिंताओं और मानसिक तनाव से राहत दिलाता है।
लक्ष्मी बीज मंत्र: आय के नए रास्ते खोलने और मान-सम्मान बढ़ाने की कुंजी
सनातन धर्म में बीज मंत्रों को समस्त ऊर्जा का मूल केंद्र माना जाता है, इसलिए इनका प्रभाव बेहद तीव्र और चमत्कारी होता है। आर्थिक उन्नति और समृद्धि के लिए ‘ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः’ का जप सर्वोत्तम बताया गया है। इस दिव्य बीज मंत्र के स्मरण से जीवन की दरिद्रता दूर होती है और आय के कई नए स्रोत खुलते हैं। व्यापार में निरंतर हो रहे नुकसान या मंदी से उबरने में यह मंत्र ढाल बनकर काम करता है। इसके निरंतर उच्चारण से साधक के भीतर का आलस्य, नकारात्मकता और अवसाद खत्म होता है तथा समाज में पद, प्रतिष्ठा और यश में अप्रत्याशित बढ़ोतरी देखने को मिलती है।
मंत्र जप के जरूरी नियम और सही दिशा का ध्यान
मंत्रों का संपूर्ण आध्यात्मिक और भौतिक फल तभी प्राप्त होता है जब उन्हें तय नियमों के अनुसार जपा जाए। इसके लिए प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर किसी शांत, पवित्र स्थान पर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार इन धन प्रदायक मंत्रों का कम से कम 108 बार यानी एक माला जप करना अनिवार्य माना गया है। जप के लिए कमलगट्टे या स्फटिक की माला का प्रयोग सबसे उत्तम फलदायी रहता है। इसके साथ ही मन की एकाग्रता, शुद्ध भावना और सात्विक आचरण का पालन करने से यह मंत्र शीघ्र सिद्ध होकर जीवन को सुख-समृद्धि से परिपूर्ण कर देते हैं।










