Yogini Ekadashi :आज कर लें ये पुण्य का काम ,88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने जितना मिलेगा पुण्य
तुलसी कोट और मुख्य द्वार पर करें दीपदान,पूजा घर और रसोई में जगमगाएं प्रकाश
पीपल के नीचे दीपक जलाने से दूर होंगे भारी दोष
नई दिल्ली (BNE ):आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का सनातन धर्म में अत्यंत गहरा और विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की सच्चे मन से आराधना करने वाले भक्तों के जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं और उनके जीवन में सुख-समृद्धि का स्थायी वास होता है। शास्त्रों में यहां तक कहा गया है कि इस एकादशी का व्रत और पूजन करने से व्यक्ति को 88 हजार कुलीन ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान महापुण्य की प्राप्ति होती है। अगर आप भी श्रीहरि की विशेष कृपा और अपने घर में अटूट बरकत चाहते हैं, तो ज्योतिष और वास्तु के अनुसार आज शाम कुछ विशेष स्थानों पर दीपक जलाना बिल्कुल न भूलें।
तुलसी कोट और मुख्य द्वार पर करें दीपदान
वास्तु शास्त्र के जानकारों का मानना है कि योगिनी एकादशी के दिन घर के पवित्र स्थानों पर प्रकाश करने से सकारात्मक ऊर्जा का तेजी से संचार होता है। मान्यता है कि तुलसी में साक्षात माता लक्ष्मी का वास होता है, इसलिए आज शाम तुलसी के पौधे के पास शुद्ध घी का दीपक जरूर प्रज्वलित करें। इससे घर में सुख-शांति और सौभाग्य के द्वार खुलते हैं। इसके साथ ही, सूर्यास्त के समय अपने घर के मुख्य द्वार पर भी एक दीप अवश्य जलाएं। यह अचूक उपाय आपके घर में किसी भी तरह की नकारात्मक शक्तियों को प्रवेश करने से रोकता है और सकारात्मकता को आमंत्रित करता है।
पूजा घर और रसोई में जगमगाएं प्रकाश
घर के पवित्र मंदिर में आज के दिन अखंड ज्योति या फिर गाय के शुद्ध घी का दीप जलाना अत्यंत फलदायी माना गया है। ऐसा करने से सभी देवी-देवताओं का सीधा आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर का माहौल हमेशा खुशनुमा और भक्तिमय बना रहता है। इसके अलावा, रसोईघर को भी हिंदू धर्म में बहुत पावन माना गया है क्योंकि वहां माता अन्नपूर्णा का वास होता है। आज रात रसोई में भी एक दीपक जरूर जलाएं। शास्त्रों के अनुसार, इस छोटे से उपाय से देवी अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं और परिवार में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती है।
पीपल के नीचे दीपक जलाने से दूर होंगे भारी दोष
योगिनी एकादशी के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा और दीपदान का भी विशेष विधान है। जो व्यक्ति आज शाम पीपल के पेड़ की जड़ के पास श्रद्धापूर्वक दीपक जलाता है, उसे शनि दोष और पितृ दोष जैसी भयंकर बाधाओं से चमत्कारी रूप से मुक्ति मिल जाती है। इसके प्रभाव से जीवन के लंबे समय से रुके हुए काम फिर से गति पकड़ लेते हैं। हालांकि, इन सभी स्थानों पर दीप प्रज्वलित करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि हमेशा शुद्ध गाय के घी या सरसों के तेल का ही इस्तेमाल हो। दीपक जलाते समय अपने मन को पूरी तरह शांत रखें और श्रद्धापूर्वक भगवान विष्णु के स्वरूप का ध्यान करें।









