
बारिश का मौसम विषाणुओं के पांव -विजय गर्ग
बरसात के दिनों में मच्छरों के काटने से सिर्फ डेंगू और मलेरिया ही नहीं फैलता, लोगों को चिकनगुनिया भी हो जाता है । यह कभी – कभी घातक हो जाता है। एशिया और अफ्रीका महाद्वीप में चिकनगुनिया से बड़ी संख्या में लोग पीड़ित होते हैं। यह रोग संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है। समय रहते लक्षणों की पहचान कर ली जाए, तो चिकनगुनिया का इलाज संभव है। अगर एहतियात बरत लें, तो इससे बचा जा सकता है। मच्छरों के काटने का असर सात दिनों में दिखने लगता है। संक्रमण के दौरान जोड़ों और मांसपेशियों में अत्यधिक दर्द होता है। मरीज को तेज बुखार होता है। कभी-कभी यह जानलेवा साबित होता है। चिंता की बात यह है कि चिकनगुनिया की कोई विशिष्ट दवा नहीं है। लिहाजा लक्षणों के आधार पर ही चिकित्सक इस रोग का उपचार करते हैं। संक्रमित व्यक्ति में चिकनगुनिया का विषाणु लगभग एक हफ्ते तक रहता है । इस दौरान कोई मच्छर काट ले तो वह भी संक्रमित हो जाता है। इसके बाद वह मच्छर जिसे भी काटता है, उसे चिकनगुनिया हो जाता है। लक्षण सिर्फ बुखार नहीं अचानक तेज बुखार आना ही चिकनगुनिया का लक्षण नहीं है। इसके लक्षण हफ्ते भर से ज्यादा रह सकते हैं। इसके लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मरीज को थकान अधिक महसूस हो, सिर में दर्द हो और चक्कर आने के साथ उल्टी आए, तो इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। मरीज को इस दौरान बहुत कमजोरी महसूस होती है। जोड़ो और मांसपेशियों में दर्द होता है। कभी – कभी शरीर में चकत्ते और दाने निकल आते हैं। जोड़ों का दर्द लंबे समय तक बना रह सकता है। कमजोरी और थकावट भी कई हफ्ते तक रहती है।
जोखिम की कई वजह चिकनगुनिया फैलाने वाले मच्छर जल जमाव वाले इलाकों में खास तौर से पनपते हैं। ऐसी जगह रहने वाले लोगों को संक्रमित होने का खतरा अधिक होता है। निर्माण स्थलों और झुग्गी-झोपड़ी इलाकों में चिकनगुनिया अधिक फैलता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से भी लोग इसकी चपेट में आ जाते हैं। खास तौर से गर्भवती महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग । जटिलता बढ़ने पर न केवल यकृत विकार बल्कि मस्तिष्क संबंधी समस्याएं पैदा होती हैं। गुर्दे के नुकसान का भी जोखिम बना रहता है। उपचार और एहतियात मच्छरों से बचाव ही चिकनगुनिया से बचने का सर्वोत्तम उपाय है। छतों पर टूटे-फूटे बर्तनों और पक्षियों के लिए रखे मिट्टी के बर्तनों में जमा पानी को साफ करते रहना चाहिए। घरों के बाहर लेमनग्रास जैसे पौधे लगाएं जो मच्छरों को दूर रखते हैं। चिकित्सक बुखार कम करने, जोड़ो और मांसपेशियों में दर्द को कम करने के लिए संबंधित दवाएं देते हैं। मरीज के शरीर में पानी कम न हो, इसका ध्यान रखना चाहिए। उसे पर्याप्त नारियल पानी दिया जाना चाहिए।
आहार का असर
चिकनगुनिया के मरीज के आहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कुछ खाद्य पदार्थ सूजन बढ़ा देते हैं। इससे रोग ठीक होने में समय लगता है। अधिक चीनी वाले पदार्थ जैसे बोतलबंद शीतल पेय, फलों का रस, मिठाइयां, केक आदि नहीं लेना चाहिए। ये पदार्थ प्रतिरक्षा तंत्र को कमजोर करते हैं। मरीज को वसायुक्त भोजन और मांसाहार बचना चाहिए। शराब भी प्रतिरक्षा प्रणाली
कमजोर करती है। मरीज को मसालेदार और अम्लीय पदार्थ भी नहीं लेना चाहिए। इस रोग उबरने में संतरा, पपीता और जामुन मदद करते हैं। मरीज को सब्जियों में पालक, केला और गाजर दिया जाना चाहिए। भोजन में दाल, मछली और वसारहित चिकन दिया जा सकता है। सूखे मेवे में बादाम का सेवन किया जा सरकता है।
विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब
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