
सफाई कर्मियों की सुरक्षा: कानून से ज़्यादा ज़मीनी कार्रवाई की ज़रूरत
डॉ विजय गर्ग
स्वच्छ और स्वस्थ समाज का सपना तभी साकार हो सकता है, जब हमारे शहरों और गांवों को स्वच्छ रखने वाले सफाई कर्मियों का जीवन भी सुरक्षित और सम्मानजनक हो। हर दिन लाखों सफाई कर्मी सड़कों, नालियों, सीवरों, कूड़ा-घरों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई करते हैं। उनके कठिन परिश्रम के कारण ही हमारे आसपास स्वच्छता बनी रहती है, लेकिन विडंबना यह है कि स्वयं उनकी सुरक्षा आज भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।
देश में सफाई कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई कानून और नियम मौजूद हैं। सीवर और सेप्टिक टैंक की मैनुअल सफाई पर प्रतिबंध लगाने तथा ऐसे कार्यों में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कानूनी प्रावधान किए गए हैं। इसके बावजूद आए दिन सीवरों और सेप्टिक टैंकों में दम घुटने या जहरीली गैसों के कारण सफाई कर्मियों की मौत की खबरें सामने आती रहती हैं। यह स्थिति बताती है कि कानून बनने भर से समस्या का समाधान नहीं होता, जब तक उनका ईमानदारी से पालन न हो।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि अनेक स्थानों पर सफाई कर्मियों को बिना सुरक्षा उपकरणों के ही जोखिम भरे कार्यों में उतार दिया जाता है। हेलमेट, ऑक्सीजन मास्क, गैस डिटेक्टर, सुरक्षा सूट, दस्ताने, जूते और सेफ्टी बेल्ट जैसी मूलभूत सुरक्षा सामग्री या तो उपलब्ध नहीं होती या उनका नियमित उपयोग सुनिश्चित नहीं किया जाता। कई बार ठेका प्रणाली के कारण जिम्मेदारी तय करना भी कठिन हो जाता है।
तकनीक के इस युग में सीवर सफाई के लिए रोबोट, सक्शन मशीनें, जेटिंग मशीनें और अन्य आधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं। कई नगर निकाय इनका उपयोग भी कर रहे हैं, लेकिन देश के अधिकांश हिस्सों में अभी भी पारंपरिक और जोखिमपूर्ण तरीके अपनाए जाते हैं। यदि आधुनिक मशीनों का व्यापक उपयोग किया जाए तो मानव जीवन को खतरे में डालने की आवश्यकता काफी हद तक समाप्त हो सकती है।
सुरक्षा केवल उपकरण उपलब्ध कराने से नहीं आती। सफाई कर्मियों को नियमित प्रशिक्षण देना, आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की जानकारी देना और कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन कराना भी उतना ही आवश्यक है। किसी भी सीवर या सेप्टिक टैंक में प्रवेश से पहले गैस की जांच, पर्याप्त वेंटिलेशन और बचाव दल की उपलब्धता अनिवार्य होनी चाहिए।
सफाई कर्मियों के स्वास्थ्य की नियमित जांच भी आवश्यक है। वे लंबे समय तक गंदगी, जहरीली गैसों, धूल, रसायनों और संक्रमण के संपर्क में रहते हैं, जिससे उन्हें श्वसन रोग, त्वचा रोग, संक्रमण और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है। इसलिए उन्हें स्वास्थ्य बीमा, नियमित चिकित्सा परीक्षण और गुणवत्तापूर्ण उपचार की सुविधाएं मिलनी चाहिए।
समाज की सोच में बदलाव भी उतना ही जरूरी है। सफाई कर्मियों को अक्सर केवल सेवा प्रदाता के रूप में देखा जाता है, जबकि वे सार्वजनिक स्वास्थ्य के सबसे महत्वपूर्ण प्रहरी हैं। उनके प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और समान व्यवहार समाज की जिम्मेदारी है। स्वच्छता अभियान तभी सफल माना जाएगा, जब स्वच्छता के इन वास्तविक नायकों को गरिमा और सुरक्षा दोनों मिलें।
सरकार, नगर निकायों, निजी ठेकेदारों और नागरिक समाज—सभी की संयुक्त जिम्मेदारी है कि किसी भी सफाई कर्मी को बिना सुरक्षा के जोखिमपूर्ण कार्य करने के लिए मजबूर न किया जाए। प्रत्येक दुर्घटना की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों की जवाबदेही तय हो और पीड़ित परिवारों को समय पर उचित सहायता एवं मुआवजा मिले।
आज आवश्यकता केवल नए कानून बनाने की नहीं, बल्कि मौजूदा कानूनों को पूरी सख्ती से लागू करने की है। जब तक हर सफाई कर्मी को सुरक्षित उपकरण, आधुनिक तकनीक, नियमित प्रशिक्षण, स्वास्थ्य सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य वातावरण नहीं मिलेगा, तब तक स्वच्छ भारत का सपना अधूरा रहेगा।
स्वच्छता केवल साफ सड़कों और चमकते शहरों का नाम नहीं है। वास्तविक स्वच्छता तब होगी, जब उन्हें स्वच्छ बनाने वाले हर सफाई कर्मी का जीवन भी सुरक्षित, सम्मानपूर्ण और गरिमापूर्ण होगा। यही एक संवेदनशील और विकसित समाज की पहचान है।
डॉ विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब
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