दीक्षांत समारोह में 64 प्रतिशत पदक छात्राओं द्वारा प्राप्त किए जाने पर राज्यपाल जी ने हर्ष व्यक्त करते हुए सभी विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने जिन विद्यार्थियों को पदक नहीं मिले, उन्हें निराश न होने का संदेश देते हुए कहा कि परिश्रम और ज्ञान प्राप्ति को हमेशा अपना लक्ष्य बनाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को अधिक से अधिक पुस्तकें पढ़ने का निर्देश देते हुए कहा कि पुस्तकें ज्ञान का भंडार होती हैं और जीवन में उपयोगी साबित होती हैं।
राज्यपाल जी ने अपने सम्बोधन में कहा कि दीक्षांत समारोह का यह अवसर विद्यार्थियों के लिए न केवल अपनी उपलब्धियों पर गर्व करने का है, बल्कि भविष्य में निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में आगे बढ़ने की शुरुआत भी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के प्रयास और उपलब्धियाँ उनके माता-पिता, शिक्षकों, विश्वविद्यालय और प्रदेश का नाम रोशन करेंगी।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल उपाधियाँ प्रदान करने तक सीमित न रहे, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि विद्यार्थी इन उपाधियों के योग्य बनें और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में योगदान दें।
राज्यपाल जी ने विश्व के वर्तमान परिदृश्य पर विचार रखते हुए कहा कि आज कई देश युद्ध की विभीषिका से प्रभावित हो रहे हैं, जबकि भारत अपने दूरदर्शी नेतृत्व के कारण शिक्षा, शोध, कौशल और नवाचार को आधार बनाकर प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षित और जागरूक नागरिक ही शांतिपूर्ण और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।
उन्होंने विश्वविद्यालयों की भूमिका पर बल देते हुए कहा कि संस्थानों को विद्यार्थियों में जिज्ञासा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए। साथ ही, विद्यार्थियों के नवीन विचारों को मूर्त रूप देने के लिए उनके विचारों की पहचान और प्रोत्साहन करना चाहिए।
समारोह में कुलाधिपति जी ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया तथा कहा कि विद्यार्थियों द्वारा किए गए कार्यों में समाज और देश का कल्याण निहित होना चाहिए।
उन्होंने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति और ज्ञान की विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों ने कई शोध और आविष्कार किए हैं, जिनका लाभ आज दुनिया उठा रही है। राज्यपाल जी ने ऋषि भारद्वाज का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने विमान का आविष्कार किया था, लेकिन इसका श्रेय अन्य देश को मिल गया और अब इसे राइट ब्रदर्स का आविष्कार माना जाता है। राज्यपाल जी ने कहा कि हमारे प्राचीन ग्रंथों में ऐसे अनगिनत ज्ञान छिपे हुए हैं, जिन्हें विद्यार्थियों को पढ़ने और समझने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि विद्यार्थियों को हमारी प्राचीन पुस्तकों के अध्ययन के लिए प्रोत्साहित करें, ताकि उन्हें यह समझ में आ सके कि हमारे पूर्वजों ने कितना अद्वितीय शोध और आविष्कार किया था। क्योंकि ये पुस्तकें ज्ञान का भण्डार हैं।
कुलाधिपति जी ने रामपुर रजा लाइब्रेरी का जिक्र करते हुए कहा कि इस लाइब्रेरी में प्राचीन पुस्तकों का अनमोल संग्रह है, जिनमें ऐसे चित्रांकन हैं, जो आज भी जीवंत हैं। उन्होंने कहा कि इन चित्रों में प्रयुक्त रंगों का निर्माण वनस्पतियों के माध्यम से किया गया था, जो आज भी खराब नहीं हुए हैं। राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि इन पुस्तकों का अध्ययन कराया जाए और उनका अनुवाद विभिन्न भाषाओं में किया जाए, ताकि यह ज्ञान सभी तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि भारत बुद्ध की धरती है और हम युद्ध के बजाय शांति के मार्ग को पसंद करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आज शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ की आबादी वाले इस देश को प्रधानमंत्री जी कुशलता से मार्गदर्शन दे रहे हैं और उनकी नीति से आज भारत को पूरे विश्व में अलग पहचान मिल रही है।
राज्यपाल जी ने वर्तमान बजट में शिक्षा के लिए आवंटित बड़ी राशि का उल्लेख करते हुए विश्वविद्यालयों को इस दिशा में प्रोजेक्ट बनाने और विद्यार्थियों को इसका लाभ पहुँचाने का निर्देश दिया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालय राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग में अच्छा प्रदर्शन कर रहे है। विश्वविद्यालयों द्वारा नैक तथा एन0आई0आर0एफ0 रैंकिंग में स्थान प्राप्त करना यह दर्शाता है कि मेहनत से और भी बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। इसके लिए राजभवन तथा विश्वविद्यालयों ने टीम भावना के साथ कठिन परिश्रम किया। उन्होंने बताया कि नैक मूल्यांकन में उत्तर प्रदेश के 7 राज्य विश्वविद्यालयों को ‘ए प्लस प्लस‘, 4 को ‘ए प्लस‘ एवं ‘ए‘ ग्रेडिंग प्राप्त हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि 6 विश्वविद्यालयों को क्यू0एस0 एशिया रैंकिंग में स्थान प्राप्त हुआ है, उत्तर प्रदेश के 5 राज्य विश्वविद्यालयों को यू0जी0सी0 द्वारा ग्रेड 1 विश्वविद्यालय घोषित किया गया है। जिसके परिणामस्वरूप 14 विश्वविद्यालयों को लगभग 740 करोड़ रूपये की ग्राण्ट प्राप्त हुई है। विश्वविद्यालयों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्राप्त ग्रांट का सीधा लाभ विद्यार्थियों को मिले।
उन्होंने विद्यार्थियों को केवल नौकरी के पीछे न भागने का सुझाव देते हुए कहा कि उन्हें अपने कौशल का विकास करना चाहिए और स्वरोजगार के माध्यम से अन्य लोगों की भी सहयोग करना चाहिए। राज्यपाल जी ने बजट में इंटर्नशिप प्रावधान की सराहना की और कहा कि इसके माध्यम से प्रधानमंत्री जी युवाओं को रोजगार देने का प्रयास कर रहे हैं।
राज्यपाल जी ने कृषि को रोजगार का बड़ा क्षेत्र बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय को संविधान दिवस के अवसर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन करने और विजेता विद्यार्थियों के मध्य राजभवन में भी प्रतियागिता कराने तथा उनको सम्मानित करने का निर्देश दिया।
समारोह में राज्यपाल जी ने पुस्तकालय के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को पुस्तक पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए और उन्हें अपने परिवार के सदस्यों को भी पुस्तक पढ़ने के लिए प्रेरित करने का संस्कार देना चाहिए।
इस अवसर पर राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिये गये स्कूलों तथा आगनवाड़ी केन्द्रों के बच्चों के मध्य करायी गयी विभिन्न प्रतियोंगिताओं में सर्वाेच्च स्थान प्राप्त करने वाले बच्चों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। उन्होंने विद्यालयों के अध्यापकों को राजभवन की तरफ से विद्यालय की लाइब्रेरी के लिए पुस्तकें तथा अध्यापकों एवं मुख्य अतिथि प्रो0 शिशिर सिन्हा को राजभवन में हो रहे नवाचारों पर आधारित पुस्तक ‘हमारा राजभवन‘ प्रदान की। इसके साथ ही उन्होंने मुख्य अतिथि प्रो0 शिशिर सिन्हा को डी0 लिट0 की मान्द उपाधि से भी विभूषित किया। राज्यपाल जी ने बच्चों में स्वच्छता का संस्कार विकसित करने के लिए हेल्थ किट प्रदान किया, जिसमें साबुन, नेल कटर, रूमाल, दवाएं, कंघी, आईना, सुई-धागा आदि जरूरी सामान था। उन्होंने जनसहयोग से ऐसी हेल्थ किट हर आंगनवाड़ी में उपलब्ध कराये जाने का निर्देश दिया। उन्होंने आंगनवाड़ी केन्द्रों को सशक्त बनाने के लिए आगनवाड़ी किटों का वितरण करते हुए आगनवाड़ी कार्यत्रियों से कहा कि प्राप्त किटों की सहायता बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करें।
राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक गतिविधियों एवं अवस्थापना सुविधाओं में वृद्धि हेतु आज यहाँ 03 वर्चुअल कक्षाओं, 150 के०वी०ए० का सोलर पैनल, महिला छात्रावास के बेसमेंट में निर्मित लैब सहित अन्य भवनों में स्थापित निर्मित लैब, समर्थ ई०आर०पी० के क्रियान्वयन के लोकार्पण साथ ही ऑडिटोरियम, 02 लिफ्ट एवं 07 रैम्प का शिलान्यास भी किया। उन्होंने विश्वविद्यालयों के शिक्षकों द्वारा लिखी पुस्तकों का विमोचन और विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित स्वच्छता पखवाड़ा में उत्कृष्ठ कार्य करने वाले छात्रों का प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया।
दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि एवं केन्द्रीय पेट्रोरसायन अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के महानिदेशक प्रो0 शिशिर सिन्हा, विशिष्ट अतिथि प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय, प्रदेश की उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी तथा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 एन0बी0 सिंह ने भी छात्र-छात्राओं को सम्बोधित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कार्य परिषद और विद्वत परिषद के सदस्यगण, शिक्षक एवं अधिकारीगण, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियाँ, अतिथिगण, छात्र-छात्रायें तथा स्कूली बच्चे आदि उपस्थित रहे।










