NEW DELHI-युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच ने अखिल भारतीय सहित्योत्सव, पुस्तक लोकार्पण एवं सम्मान समारोह आयोजित किया
युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’ को भी सम्मानित किया गया।
कार्यकारी अध्यक्ष विजय प्रशांत ने दिन भर चले इस समारोह में पधारे सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया |

नई दिल्ली(BNE)दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी, दिल्ली के गीतांजलि हाल में रविवार को युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच ने 12वां अखिल भारतीय सहित्योत्सव, पुस्तक लोकार्पण एवं सम्मान समारोह आयोजित किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ सुश्री शारदा मदरा के सरस्वती स्तुति और मंचस्थ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के बाद सुश्री मिलन सिंह द्वारा युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच के गीत का गायन किया गया | संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामकिशोर उपाध्याय ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि सहायक महासचिव मनोज मिश्र कप्तान ने संस्था महासचिव की प्रगति रिपोर्ट सदन के समक्ष प्रस्तुत की। इसके बाद युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच के वर्ष 2025 के शिखर सम्मान से शैलेंद्र कपिल, पूर्व आईआरटीएस की अध्यक्षता तथा डॉ. महेश दिवाकर, (मुख्य अतिथि) डॉ,विनोद प्रकाश गुप्ता, पूर्व आईएएस (प्रमुख अतिथि) डॉ. विनय कुमार दास ,डॉ, जय प्रकाश तिवारी एवं अरविन्द कुमार सिंह, सुश्री कुसुम भट्ट प्रकाश प्रजापति, सुरेशपाल वर्मा, एवं चन्द्र मणि ब्रह्मदत्तके कर कमलों द्वारा प्रदान किये गए।
इस वर्ष का ‘भारतेंदु हरिश्चंद्र शीर्षस्थ सम्मान (पुरस्कार राशि -11000/-रुपये) प्रो. (डॉ.) मनोज कुमार कैन ,दिल्ली को, ‘महादेवी वर्मा शीर्षस्थ महिला लेखन सम्मान’ ( पुरस्कार राशि -7100/-रुपये) मृदुला श्रीवास्तव, शिमला को. डी पी चतुर्वेदी स्मृति लाइफ टाइम सम्मान’(पुरस्कार राशि – 5100/- रुपये) कोटा राजस्थान के डॉ. प्रभात कुमार सिंघल को, ‘स्व.विनोद झा एवं आकाश झा स्मृति साहित्य सम्मान ’ (पुरस्कार राशि – 5100/- रुपये) इंदौर,के चरण सिंह अमी को. ‘केदार नाथ शर्मा अमीर ख़ुसरो युवा सम्मान’ (पुरस्कार राशि – 5100/- रुपये) प्रयागराज, के डॉ.प्रभांशु कुमार को, देवेन्द्र शर्मा स्मृति मुंशी प्रेमचंद कथा सम्मान’ (पुरस्कार राशि – 5100/- रुपये) हैदराबाद की डॉ. रमा द्विवेदी को दिया गया। उत्कृष्ट बाल साहित्य सृजन के लिये कमलेश प्रशांत स्मृति बाल साहित्य सम्मान बस्ती के लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव को तथा काव्य तथा हास्य-व्यंग्य विधा में उल्लेखनीय मौलिक सृजन के लिए प्रथम ‘अनूप श्रीवास्तव स्मृति हास्य -व्यंग्य’सम्मान दिल्ली के डॉ.ब्रजपाल सिंह संत को दिया गया।
युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’ को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर कई पुस्तकों का लोकार्पण भी हुआ जिनमें युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच की वार्षिकी -2025 ,रामकिशोर उपाध्याय के प्रेम-कहानी संग्रह ‘लालटेन’, शैलेन्द्र कपिल के कविता संग्रह –‘पत्थर से उभरे अवतार’,कुसुम भट्ट के कहानी संग्रह ‘जोगणी’, मिलन सिंह के चारू संग्रह – चितरंजिनी तथा शारदा मदरा के गीत संग्रह -असावरी एवं उपन्यास जीवन की विजय के डॉ.वीरेन्द्र कुमार चन्द्रसखी कृत हिंदी अनुवाद उल्लेखनीय है |
इस कार्यक्रम में एक साहित्यिक परिचर्चा भी आयोजित की गई है, जिसमें डॉ. महेश दिवाकर ‘साहित्य के वैराट्य’ डॉ. विनय कुमार दास -नए दौर की कहानियां, डॉ, जय प्रकाश तिवारी- रसिक भक्ति काव्य परंपरा एवं अरविन्द कुमार सिंह -हिंदी समाचार पत्रों से विलुप्त होता साहित्य पर मुख्य वक्तव्य दिया | अरविंद कुमार सिंह, वरिष्ठ पत्रकार एवं अति विशिष्ट अतिथि ने ‘समाचार पत्रों से विलुप्त होता साहित्य’ विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि आज देश में लगभग डेढ़ लाख पत्र ओर पत्रिकाएं होने के बावजूद साहित्य हाशिये पर चला गया हैं |इसके बरक्स 1949 में केवल लगभग आठ हज़ार पत्र और पत्रिकाएं पंजीकृत थी लेकिन उनमें साहित्य का प्रकाशन भरपूर होता था | तभी तो समाचार पत्रों ने अनेक बड़े लेखकों को जन्म दिया | अतीत में अधिकांश साहित्यकार ही समाचार पत्र -पत्रिकाओं के संपादक हुआ करते थे या लगभग हर समाचार पत्र में एक साहित्य संपादक हुआ करता था – अज्ञेय से लेकर रघुवीर सहाय तक जैसे अनेक मूर्धन्य साहित्यकारों ने अख़बारों में साहित्य को खूब प्रकाशित किया | आज बहुत कम अख़बारों में साहित्य- संपादक हैं और इनका न होना समाचार पत्रों से विलुप्त होते साहित्य का एक कारण है | यह स्थिति बहुत ही चिंताजनक है | आज भारतीय भाषाओं में किताबें खूब छप रहीं है | उन्होंने
पुराने लेखकों की 1952-54 की उस अपील का जिक्र करते हुए कहा कि पाठकों की कमी का जो संकट उस काल में था, आज भी वही स्थिति बनी हुए | दिल्ली के पुस्तक मेले में लोग की भीड़ तो जुटती है लेकिन लौटते समय उनके थैले में किताब का और कैटेलॉग अधिक होते है | आज की प्रमुख चिंता साहित्य को जन -जन तक पहुँचाने है |लेकिन जैसे मैनस्ट्रीम मीडिया की जगह सोशल मीडिया / यू ट्यूब ने ले ली, वैसे ही हमें विकल्प तलाशने होंगे |इसमें राज्य की सरकारों का साहित्यकारों को प्रोत्साहन करना आवश्यक है | ‘नए दौर की कहानियाँ’ विषय पर बोलते हुए डॉ.विनय कुमार दास ,वरिष्ठ कथाकार ने कहा कि जहाँ तक नए दौर की कहानियों की बात है, हिंदी पट्टी में सेवन सिस्टर्स अर्थात पश्चिमोत्तर भारत की सामाजिक चिंताएं भी प्रमुखता से दर्ज हो रही हैं । प्रेम जैसा कभी न खत्म होने वाला विषय आज भी कहानियों के लिए रेलेवेन्ट' बना हुआ है | आज के वैयक्तिक और सामाजिक जीवन को सोशल मीडिया, व्हाट्अप, इन्सटाग्राम , फेसबुक अन्यान्य ने कितनी गहराई तक प्रभावित किया है कि जीवन-शैली ही बदल गई है। हालाँकि प्रेम का पारंपरिक रंग-रूप बदल गया । ‘रसिक भक्ति काव्य परंपरा’ पर डॉ. जयप्रकाश तिवारी,अति विशिष्ट अतिथि ने अपना सारगर्भित वक्तव्य दिया | मुख्य अतिथि डॉ.महेश दिवाकर ने ‘साहित्य का वैराट्य विषय पर अपने सार्थक संबोधन में हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं में सृजन-धाराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आज कविता के अतिरिक्त गद्य विधाओं में अधिक लिखने की आवश्यकता है | उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब , मध्य प्रदेश, तेलंगाना ,राजस्थान, दिल्ली, बिहार और हिमाचल प्रदेश भर से पधारे के अनेक कवि /कवयित्रियों ने में भाग लिया | कार्यक्रम का संचालन महासचिव, ओम प्रकाश शुक्ल,
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ.पवन विजय और काव्य गोष्ठी का शानदार सञ्चालन विवेक चौहान /बादल बाजपुरी ने किया | कार्यकारी अध्यक्ष विजय प्रशांत ने दिन भर चले इस समारोह में पधारे सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया |










