एकीकृत सिंगल विंडो क्लियरेंस से MSMEs के लिए कारोबार करना होगा आसान: एसोचैम रिपोर्ट*
*DELHI-,(BNE) एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (ASSOCHAM) ने “भारतीय राज्यों में *ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस”* पर अपने प्रतिष्ठित अध्ययन के दूसरे चरण की रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में व्यवसायिक नियमों को सरल बनाने, मंजूरी प्रक्रियाओं में सुधार करने और देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की वृद्धि को गति देने के लिए तेज़ सुधार लागू करने की जरूरत पर जोर दिया गया है।
रिपोर्ट बताती है कि डिजिटाइज्ड और समयबद्ध सिंगल विंडो सिस्टम निवेश माहौल सुधारने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाकर और अनावश्यक देरी कम करके ऐसे सिस्टम दक्षता और पारदर्शिता दोनों को बढ़ाते हैं। रिपोर्ट में भूमि उपयोग और ज़ोनिंग नियमों को सरल करने, मंजूरी शुल्क को तर्कसंगत बनाने और बिजली, सड़क और पानी जैसे अंतिम छोर (लास्ट माइल) के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की सिफारिश भी की गई है।
राष्ट्रीय स्तर पर, रिपोर्ट एक एकीकृत वार्षिक MSME अनुपालन फॉर्म लाने का सुझाव देती है, जिसमें AOC-4, MGT-7A, DIR-3 KYC, MSME Form-I और DPT-3 जैसे कई फाइलिंग को एक साथ शामिल किया जाए। इसके अलावा, MSMEs के लिए कंपनियों अधिनियम के तहत दो वर्ष या तीन वर्ष में एक बार फाइलिंग का विकल्प देने की भी अनुशंसा की गई है।
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि जटिल अनुपालन प्रक्रियाओं का सबसे अधिक असर छोटे उद्यमों पर पड़ता है। MSMEs आज भी भारी जुर्मानों, दोहराए जाने वाले दस्तावेजों और कई तरह की फाइलिंग से जूझ रहे हैं, जिससे औपचारिककरण और विकास में बाधा आती है। इसीलिए रिपोर्ट में सरल रिटर्न, चरणबद्ध (ग्रेडेड) पेनल्टी, अनिवार्य ऑडिट से छूट और कई वैधानिक फाइलिंग को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करने की सिफारिश की गई है, जिससे MSMEs का अनुपालन बोझ कम हो सके।
रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए *श्री निर्मल मिंडा, अध्यक्ष, एसोचैम* ने कहा, “GST जैसे कई क्षेत्रों में सुधार हुए हैं, लेकिन व्यवसायों को अभी भी कई स्तरों के अनुपालन और मंजूरियों से गुजरना पड़ता है। एसोचैम सरकारों के साथ मिलकर नियामक और वित्तीय सुधारों की पहचान और क्रियान्वयन में जुटा है। मिलकर हम एक पारदर्शी, कुशल और निवेश-हितैषी वातावरण बना सकते हैं, जिससे छोटे और बड़े दोनों उद्योग लाभान्वित होंगे और देश की विकास यात्रा और तेज होगी।”
इस पर आगे बोलते हुए *श्री मनीष सिंघल, महासचिव, एसोचैम* ने कहा, “भारत के विकास लक्ष्य MSMEs के लिए कारोबार को आसान, तेज़ और पूर्वानुमानित बनाने पर निर्भर करते हैं। राज्यों की इसमें बेहद महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि राज्य MSMEs को प्राथमिकता देंगे, तो देश में उद्यमिता की अभूतपूर्व ऊर्जा खुलकर सामने आएगी। MSMEs हमारी अर्थव्यवस्था, रोजगार और निर्यात में लगभग एक-तिहाई का योगदान देते हैं। इसलिए, उनके लिए व्यवसाय को सरल बनाना 2047 तक भारत के 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की यात्रा की आधारशिला होगा।”
रिपोर्ट में आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित 18 राज्यों का विश्लेषण शामिल है। निष्कर्ष बताते हैं कि राज्यों में किए जा रहे सुधारों का समन्वयन भारत के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।
सबसे अहम सिफारिशों में से एक यह है कि पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में वास्तविक और प्रभावी सिंगल विंडो सिस्टम बनाए जाएं—जिनमें तय समयसीमा और स्पष्ट जवाबदेही हो। इससे उन बिखरे हुए सिस्टमों की जगह ली जा सकेगी, जो वास्तव में “मल्टीपल विंडोज़” की तरह काम करते हैं।
एसोचैम का अध्ययन दोहराता है कि एक पूर्वानुमानित, तकनीक-आधारित और उद्यमी-हितैषी नियामक ढांचा भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने, घरेलू और विदेशी निवेश आकर्षित करने और रोजगार व समावेशी विकास के नए अवसर पैदा करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
यह अध्ययन द कन्वर्जेंस फाउंडेशन के विश्लेषणात्मक सहयोग से तैयार किया गया है।










