
कर्मचारियों को पेंशन से वंचित करना अनुचित और अन्यायपूर्ण
( हकदारी व विधिमान्यकरण अध्यादेश 2025 वापस ले सरकार )
सुधीर श्रीवास्तव
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त विभाग द्वारा जारी किया गया हकदारी व विधिमान्यकरण अध्यादेश 2025 पूर्ण रूप से अन्यायपूर्ण और अनुचित है। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट ने अपने 11 जून 2025 को आनन्द प्रकाश मणि त्रिपाठी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार प्रकरण मे दिए एक फैसले मे किया है। सरकार द्वारा लाए गए इस अध्यादेश के जरिए बिना मौलिक नियुक्ति और बिना नियमावली के नियमितीकरण किए गए कर्मचारियों को सरकारी सेवा की पेंशन से वंचित कर दिया गया है। चाहे वह कर्मचारी भविष्य निधि के तहत अपना अंशदान जमा कर रहें हो।
वर्कर्स फ्रंट के अध्यक्ष ने यह भी कहा कि यह अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना है। इसलिए कर्मचारी विरोधी इस आध्यादेश को सरकार को तत्काल प्रभाव से वापस लेना चाहिए। संयुक्त रूप से जारी विज्ञिप्त मे वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर दुर्गा प्रसाद और महासचिव रामशंकर ने अपने बयान में कहा कि सरकार ने अध्यादेश के जरिए अस्थाई, दैनिक वेतन और संविदा के ऐसे कर्मचारी जिन्हें नौकरी के दौरान नियमित किया गया है, उन्हें सरकारी पेंशन से वंचित कर दिया है। अध्यादेश में कहा गया है कि संविदा की अवधि को कर्मचारी की सरकारी कार्यावधि में जोड़ा नहीं जाएगा। जबकि आनंद प्रकाश मणि त्रिपाठी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के मुकदमे में 11 जून 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संविदा या दैनिक कार्य की अवधि को भी सेवा में जोड़ा जाएगा। इसके अनुरूप सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी पेंशन के भुगतान के लिए सरकार को निर्देशित किया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि उन्हें पेंशन से वंचित करना अनुचित और अन्यायपूर्ण है।
इसी प्रकार एक अन्य प्रकरण में उत्तराखंड के वन विभाग के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की तरफ से दायर उत्तराखंड उच्च न्यायालय में सुरेश कंडवाल बनाम स्टेट आफ उत्तराखंड में 22 अगस्त 2024 को न्यायमूर्ति रितु बाहरी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने दैनिक वेतन कर्मचारियों की सेवा अवधि को भी सरकारी कार्य की ही सेवा अवधि मानते हुए सरकारी पेंशन देने का आदेश सरकार को दिया है। इन आदेश के बाद भी सरकार व्दारा अध्यादेश 2025 लाकर कर्मचारियो को पेंशन से वंचित करना अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण तथा अन्यायिक है।
अपने बयान में उन्होने कहा कि उत्तर प्रदेश की यह सरकार माननीय सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्टों के आदेशों को भी मानने को तैयार नहीं है। इन न्यायालयों के आदेशों को निष्प्रभावी बनाने के लिए ही यह हकदारी व विधिमान्यकरण अध्यादेश 2025 लाया गया है। वर्कर्स फ्रंट ने उत्तर प्रदेश के सभी कर्मचारी संगठनों और मजदूर संगठनों से अपील की है कि दैनिक वेतन, संविदा कर्मचारियों को पेंशन के अधिकार से वंचित कर उनकी सामाजिक सुरक्षा ख आवाहन किया। वर्कर्स फ्रंट की ओर से राज्य के सभी विपक्षी दलों से भी अनुरोध किया गया है कि वह विधानसभा में इस अध्यादेश को कानून बनने से रोकने मे अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें और कर्मचारियो के हित में आवाज बुलंद कर उनकी सामाजिक सुरक्षा को बचाएं।
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