
इंडिया लिटरेसी बोर्ड मे हुआ अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का आयोजन
( श्रावस्ती, बाराबंकी, सीतापुर एवं लखनऊ में साक्षरता केन्द्रों का शुभारम्भ)
सुधीर श्रीवास्तव
लखनऊ(BNE)साक्षरता एवं वैकल्पिक शिक्षा निदेशालय, उ.प्र. तथा राज्य संसाधन केन्द्र, उ.प्र, इण्डिया लिटरेसी बोर्ड, साक्षरता निकेतन, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस समारोह का आयोजन कानपुर रोड स्थित साक्षरता निकेतन परिसर में किया गया। इस अवसर पर राज्य संसाधन केन्द्र, इण्डिया लिटरेसी बोर्ड की निदेशक सुश्री सन्ध्या तिवारी, आई.ए.एस.(से.नि.), मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति कानपुर एवं बुंदेलखंड विश्वविद्यालय प्रोफेसर जे.वी. वैशम्पायन, साक्षरता एवं वैकल्पिक शिक्षा निदेशालय उत्तर प्रदेश के उपनिदेशक शंभूभान सिंह तथा शिव नाडर फाउंडेशन के कार्यक्रम प्रमुख मयंक सिन्हा की उपस्थिति में दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. जे.वी. वैशम्पायन द्वारा वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य संसाधन केन्द्र, इण्डिया लिटरेसी बोर्ड द्वारा जनपद श्रावस्ती, बाराबंकी, सीतापुर एवं लखनऊ में संचालित किये जाने वाले साक्षरता कार्यक्रमों का ऑनलाइन उद्घाटन किया गया। उन्होने अपने सम्बोधन में कहा कि साक्षरता वो कुंजी है जो शिक्षा के द्वार खोलती है। उन्होंने बताया कि यूनेस्को के द्वारा इस वर्ष अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस की थीम “डिजिटल साक्षरता” निर्धारित की गयी है। वर्तमान मे 21वीं शताब्दी की सबसे बड़ी आवश्यकता डिजिटल साक्षरता की है। उन्होंने कहा कि कम्प्यूटर और उसके बाद मोबाइल फोन ने डिजिटल क्षेत्र में क्रान्ति कर दिया। स्मार्ट फोन आ जाने से संदेशों, ई-मेल का आदान-प्रदान सुगमता से होने लगा। रेल-जहाज होटल आदि की बुकिंग आसान हो गई। डिजिटल क्रान्ति से शिक्षा, सुशासन, स्वास्थ्य, रक्षा-सुरक्षा आदि जैसे सेक्टर्स में अभूतपूर्व सहायता मिली है। उन्होंने साइबर फ्राड जैसे विषयों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए इससे सावधान रहने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

साक्षरता एवं वैकल्पिक शिक्षा निदेशालय, उ.प्र. के उप निदेशक शम्भूभान सिंह ने बताया कि प्रदेश में संचालित नवभारत साक्षरता कार्यक्रम में बुनियादी साक्षरता पर विशेष ध्यान दिया गया है। किसी असाक्षर को साक्षर करने के बाद उसे वित्तीय साक्षरता, विधिक साक्षरता और व्यवसायिक कौशल के साथ अवश्य जोड़ा जाए, यही इस कार्यक्रम का उद्देश्य है।
शिव नाडर फाउंडेशन के कार्यक्रम प्रमुख मयंक सिन्हा के द्वारा असाक्षरों को साक्षर बनाने के सम्बन्ध में उनके फाउन्डेशन द्वारा किये जा रहे कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि साक्षरता कार्यक्रमों की सफलता के लिए प्रदेश सरकार के साक्षरता एवं वैकल्पिक शिक्षा विभाग का सक्रिय सहयोग बहुत आवश्यक है।
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर इण्डिया लिटरेसी बोर्ड के सलाहकार प्रवीन टण्डन ने समारोह में उपस्थित मुख्य अतिथि व अन्य विशिष्ट अतिथियों का स्वागत करते हुए अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए संस्थान द्वारा साक्षरता के क्षेत्र मे किए गए कार्यों की जानकारी प्रदान की। राज्य संसाधन केन्द्र के प्रशासनिक अधिकारी सुधाकर मान सिंह के द्वारा विगत तीन वित्तीय वर्षों में राज्य संसाधन केन्द्र द्वारा साक्षरता कार्यक्रमों के संचालन का विवरण प्रस्तुत किया गया।
इस कार्यक्रम में साक्षरता एवं वैकल्पिक शिक्षा निदेशालय, उ.प्र., इण्डिया लिटरेसी बोर्ड, राज्य संसाधन केन्द्र, उ.प्र., वेल्दी फिशर चिल्ड्रेन्स अकादमी के इच वन, टीच वन कार्यक्रम से जुडे हुए छात्र-छात्राएँ, शिक्षक-शिक्षिकाएँ एवं जन शिक्षण संस्थान के समस्त पदाधिकारी एवं कार्मिकगण भी उपस्थित रहे। जनपद श्रावस्ती, बाराबंकी, सीतापुर एवं लखनऊ ने संचालित साक्षरता कार्यक्रमों के समन्वयक, प्रेरकगण एवं असाक्षर लाभर्थीगण भी ऑनलाइन वीडियो क्रान्फ्रेन्सिंग के माध्यम से सम्मिलित हुए। कार्यक्रम का कुशल संचालन इंडिया लिटरेसी बोर्ड के प्रशासनिक अधिकारी श्री सुधाकर मान सिंह ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन राज्य संसाधन केंद्र के नोडल अधिकारी श्री अनूप कुमार श्रीवास्तव द्वारा किया गया।
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