हैदराबाद/कोलकाता-अब इस संगठन ने बाबरी मस्जिद मेमोरियल बनाने का किया ऐलान
किसी को बाबर के नाम से परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह विरोध केवल एक राजनीतिक हथकंडा है-अध्यक्ष मुश्ताक मलिक
‘तहरीक मुस्लिम शब्बन’ नामक संगठन ने हैदराबाद में ‘बाबरी मस्जिद मेमोरियल’ बनाने का ऐलान कर दिया है
हैदराबाद/कोलकाता (BNE ): बाबरी मस्जिद की बरसी के दिन यानि 6 दिसम्बर को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबबाद में बाबरी मस्जिद की नीव रखने के बाद अब अब ग्रेटर हैदराबाद से एक और बड़ी खबर सामने आ गई है। अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस की 33वीं बरसी के मौके पर ‘तहरीक मुस्लिम शब्बन’ नामक संगठन ने हैदराबाद में ‘बाबरी मस्जिद मेमोरियल’ बनाने का ऐलान कर दिया है। संगठन के अध्यक्ष मुश्ताक मलिक ने घोषणा करते हुए कहा कि इस मेमोरियल का निर्माण कब शुरू होगा, इसकी तारीख का ऐलान जल्द ही किया जाएगा। उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी को बाबर के नाम से परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह विरोध केवल एक राजनीतिक हथकंडा है।
मुश्ताक मलिक ने अपने दावे को सही ठहराने के लिए इतिहास और धर्मग्रंथों का तर्क भी दिया। उन्होंने दावा किया कि गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित ‘रामचरितमानस’ बाबरी मस्जिद के निर्माण के करीब 60 साल बाद लिखी गई थी, लेकिन उसमें राम मंदिर के होने या उसे तोड़े जाने का कोई जिक्र नहीं मिलता। मलिक ने मुगल बादशाह अकबर के शासनकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी हवन-पूजा होती थी और राजा मान सिंह अकबर के सेना प्रमुख थे। तुलसीदास और अकबर के बीच संवाद भी होता था। मलिक ने अफसोस जताते हुए कहा कि इस मुद्दे को बेवजह तूल देकर देश में विभिन्न धर्मों के बीच सदियों पुराने भाईचारे को खत्म कर दिया गया है।
गौरतलब है कि हाल ही में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद की हूबहू नकल बनाने के लिए नींव रखी थी। कबीर ने इस प्रोजेक्ट का बजट करीब 300 करोड़ रुपये रखा है। हालांकि, इस विवादित कदम के बाद टीएमसी ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया है। हुमायूं कबीर का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी माना था कि हिंदुओं ने मस्जिद गिराई थी, लेकिन आस्था को ध्यान में रखकर मंदिर की अनुमति दी गई। उन्होंने कहा कि संविधान उन्हें भी मस्जिद बनाने का अधिकार देता है और जब देश में मंदिर-चर्च बन सकते हैं, तो मस्जिद क्यों नहीं।
इस पूरे मामले पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। बीजेपी ने हुमायूं कबीर और हैदराबाद के संगठन के इस कदम का कड़ा विरोध किया है। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने इसे पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी द्वारा धार्मिक ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा ‘प्रोपेगेंडा’ करार दिया। उन्होंने कहा कि बाबर भारत की संस्कृति पर हमला करने आया था और उसने गुरु नानक देव जी के बारे में भी अपशब्द कहे थे। ऐसे आक्रांता के नाम पर निर्माण देश की संस्कृति के खिलाफ है।










