भ्रष्टाचार, विद्रोह और महाभियोग के बीच राष्ट्रपति कार्यालय की तलाशी का भी आदेश
दक्षिण कोरिया की राजनीति में बड़ा भूचाल आया है। सियोल पश्चिमी जिला न्यायालय ने राष्ट्रपति यूं सुक येओल के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। साथ ही उनके राष्ट्रपति कार्यालय की तलाशी की मंजूरी भी दी गई है। यह वारंट भ्रष्टाचार-विरोधी एजेंसी द्वारा यूं पर लगे विद्रोह और राजद्रोह के आरोपों की जांच के तहत जारी किया गया है।
महाभियोग और विवादास्पद फैसले
14 दिसंबर को विपक्ष-नियंत्रित नेशनल असेंबली ने यूं सुक येओल पर महाभियोग चलाने के लिए मतदान किया था, जिसके बाद उनकी शक्तियां निलंबित कर दी गईं। इसके अलावा, यूं द्वारा मार्शल लॉ की घोषणा ने देश में काफी विवाद पैदा किया। इस कदम को एजेंसी ने विद्रोह का संभावित कार्य मानते हुए जांच शुरू की।
संवैधानिक न्यायालय यह तय करेगा कि यूं को राष्ट्रपति पद से हटाया जाए या बहाल किया जाए। हालांकि, इस बीच, यूं ने जांच अधिकारियों के सवालों का जवाब देने और उनके कार्यालय की तलाशी को अनुमति देने से इनकार कर दिया है।
राष्ट्रपति का विशेषाधिकार और कानूनी अड़चनें
दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति को आपराधिक मुकदमे से छूट का विशेषाधिकार है। लेकिन यह छूट विद्रोह और राजद्रोह के मामलों पर लागू नहीं होती। बावजूद इसके, राष्ट्रपति सुरक्षा सेवा ने तलाशी के अनुरोध को यह कहकर खारिज कर दिया कि राज्य के रहस्यों वाले क्षेत्रों में बिना अनुमति प्रवेश संभव नहीं है।
क्या होगा आगे?
भ्रष्टाचार जांच एजेंसी ने अभी तक तय नहीं किया है कि कोर्ट द्वारा जारी वारंट को कैसे लागू किया जाएगा। कई पर्यवेक्षकों का मानना है कि राष्ट्रपति सुरक्षा सेवा और जांच एजेंसियों के बीच टकराव हो सकता है।
दक्षिण कोरिया की राजनीति में यह घटनाक्रम अभूतपूर्व है। राष्ट्रपति कार्यालय पर तलाशी का आदेश और गिरफ्तारी वारंट ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। यह देखना बाकी है कि न्यायालय और एजेंसियां इस संवेदनशील मामले को
कैसे संभालती हैं।









