
जलवायु परिवर्तन से मिट्टी भी हो रही ख़तरनाक
विजय गर्ग
मिट्टी में एक बड़ा खतरा छिपा हुआ है। एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन न केवल हमारे ग्रह को गर्म कर रहा है, बल्कि यह मिट्टी के सूक्ष्मजीव समुदायों में एंटीबायोटिक रेसिस्टेंट जीन और विषाणु कारकों में ख़तरनाक बढ़ोतरी कर रहा है। ये जीन बैक्टीरिया को सामान्य उपचारों से बचने में मदद करते हैं, जिससे इन्फेक्शन की आशंका बढ़ जाती है।
गर्मी में बढ़ोतरी । ब्रिटेन की डरहम यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने दुनिया भर के विशेषज्ञों के साथ मिलकर यह रिसर्च की है। इसके मुताबिक गर्म परिस्थितियां न केवल प्रतिरोधी बैक्टीरिया को जीवित रहने में मदद करती हैं, बल्कि उनकी ऐसी किस्मों के विकास को भी प्रोत्साहित करती है जो मनुष्यों में अपना रास्ता खोजने से पहले प्राकृतिक वातावरण में रहती हैं। यूनिवर्सिटी के प्रो. डेविड ग्राहम ने बताया कि जलवायु में बदलाव दुनिया भर में मिट्टी में एंटीबायोटिक प्रतिरोध को बढ़ावा देने में’ भी बड़ी भूमिका निभा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं। इसलिए सभी के स्वास्थ्य का ख्याल रखने के लिए ‘वन हेल्थ एप्रोच’ अपनानी बहुत जरूरी है।
नए-नए संक्रमण । अधिकांश लोगों को इस बात का अंदाजा नहीं है कि मनुष्यों में संक्रामक रोग पैदा करने वाले अधिकांश रोगाणु वास्तव में पर्यावरण से उत्पन्न होते हैं। प्रो. ग्राहम ने कहा कि इसलिए मिट्टी में प्रतिरोध बढ़ने से निश्चित रूप से मनुष्यों और पशुओं में नए संक्रमण के स्तर में वृद्धि होगी। यही वजह है कि वन हेल्थ सॉल्यूशन महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों ने पाया कि ठंडे क्षेत्र, जहां बैक्टीरिया कम तापमान के कारण मर जाते थे, अब खतरनाक रोगाणुओं के लिए अधिक अनुकूल होते जा रहे हैं। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, ये बैक्टीरिया लंबे समय तक जीवित रहते हैं, तेजी से विकसित हो सकते हैं। इससे पूरी तरह से नए रोगाणु बन सकते हैं, जिन्हें हमारे एंटीबायोटिक्स छू भी नहीं सकते।
बदलते गुणसूत्र । जलवायु और एंटीबायोटिक प्रतिरोध के बीच संबंध की भविष्यवाणी 2023 की संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट में की गई थी। तापमान में मामूली वृद्धि भी बड़े बदलावों को जन्म देती है। पर्यावरण में व्यापक रूप से मौजूद ई कोलाई बैक्टीरिया पर किए अध्ययन से पता चला कि गर्म परिस्थितियों के कारण इसमें प्रमुख एंटीबायोटिक प्रतिरोधी जीन की अभिव्यक्ति में वृद्धि हुई है। अध्ययन में इस्तेमाल किए गए मशीन लर्निंग मॉडल विचलित करने वाली तस्वीर पेश करते हैं।
इसमें इस सदी के अंत तक दुनिया की मिट्टी में एंटीबायोटिक प्रतिरोधी जीनों के स्तर में 23% तक की वृद्धि हो सकती है। सूक्ष्मजीव समुदायों में जलवायु संचालित परिवर्तन एंटीबायोटिक प्रतिरोध को रोकने के प्रयासों को कमजोर कर सकते हैं। रिसर्चरों ने चेतावनी दी है कि यदि मिट्टी प्रतिरोधी बैक्टीरिया को पोषित करना जारी रखती है, तो प्रतिरोधी गुणों का मानव रोगाणुओं में पहुंचना और भी आसान हो सकता है।
मौन परिवर्तन । कोविड- 19 जैसी पिछली महामारियों ने दिखाया है कि. रोगाणु कितनी आसानी से पर्यावरण से इंसानों तक पहुंच सकते हैं। यही रास्ते एंटीबायोटिक प्रतिरोधी बैक्टीरिया को भी ऐसा करने में मदद कर सकते हैं, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक नया और गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। हमारी मिट्टी में हो रहा मौन परिवर्तन हमें याद दिलाता है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव हमारी नजर से कहीं ज्यादा दूर तक फैले हुए हैं। वे आसपास की अदृश्य दुनिया को भी नया आकार दे रहे हैं, जिससे हमारे जीवन के हर हिस्से को प्रभावित कर सकते हैं।
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