सावधान ! फ्री WI -FI का न करें उपयोग ,वरना आपका निजी डाटा हो सकता है लीक
साइबर हैकर्स ठगी करने को उठा रहे वाईफाई नेटवर्क का फायदा
नई दिल्ली (BNE ) आज के इस डिजिटल दौर में हर इंसान इंटरनेट का उपयोग कर रहा है। खासतौर पर लोग फ्री के चक्कर में सार्वजनिक वाई फाई का उपयोग करते है जो उनके लिए किसी खतरे से खली नहीं है। साइबर ठग आपके डाटा पर गिद्ध दृष्टि लगाए बैठे है जो पल भर में आपका निजी डाटा चुरा रहे है और आप अनभिज्ञ बने हुए है , साइबर क्रिमिनल्स विभिन्न शहरों के पॉश एरिया में जाकर फ्री ओपन वाईफाई नेटवर्क यूजर को उपलब्ध करवाते हैं और जैसे ही यूजर अपनी डिवाइस को उस ओपन नेटवर्क से कनेक्ट करता है, वैसे ही उसका तमाम पर्सनल डेटा साइबर क्रिमिनल के पास अपने आप पहुंचने लगता है, जिसका साइबर क्रिमिनल किसी भी तरीके से गलत इस्तेमाल कर सकता है। ओपन वाईफाई नेटवर्क को लेकर साइबर सेल ने भी एडवाइजरी जारी की है। आज के दौर में मोबाइल, टैबलेट, लैपटॉप, कंप्यूटर व अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट इस्तेमाल करने वाला यूजर पूरी तरह से इंटरनेट कनेक्टिविटी पर निर्भर करता है। चाहे ऑफिस का काम हो, स्टूडेंट की पढ़ाई या अन्य इंटरनेट सर्फिंग, इन तमाम चीजों के लिए यूजर फास्ट इंटरनेट कनेक्टिविटी के अलग-अलग विकल्प तलाशने में लगा रहता है।
इसमें सबसे आसानी से उपलब्ध होने वाला विकल्प फ्री ओपन वाईफाई नेटवर्क है। इसका सर्वाधिक फायदा साइबर हैकर्स व ठगों द्वारा उठाया जा रहा है। यूजर बिना वेरीफाई किए किसी भी फ्री ओपन वाईफाई नेटवर्क से अपने इलेक्ट्रॉनिक गैजेट को कनेक्ट कर लेते हैं, जिसका खामियाजा उन्हें अपनी मेहनत की कमाई को या पर्सनल डेटा को गंवाकर चुकाना पड़ता है। इसके साथ ही साइबर क्रिमिनल यूजर की विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर ट्रोजन भेजते हैं जो यूजर की डिवाइस में एक बोट का काम करता है। इस प्रकार से साइबर क्रिमिनल सैकड़ों की तादाद में विभिन्न डिवाइस पर बोट भेजते हैं, जिसका प्रयोग किसी भी वेबसाइट की बैंडविथ फुल कर उस वेबसाइट को स्लो डाउन करने में किया जाता है जिसके चलते कोई भी व्यक्ति जब उस संबंधित वेबसाइट पर जाकर अपना महत्वपूर्ण काम करना चाहता है तो वह नहीं कर पाता।
वित्तीय ट्रांजैक्शन करने में प्रयोग न फ्री ओपन वाईफाई नेटवर्क
किसी भी तरह की वित्तीय ट्रांजैक्शन करने में फ्री ओपन वाईफाई नेटवर्क का प्रयोग न करें। उन्होंने बताया कि साइबर क्रिमिनल्स यूजर को फ्री ओपन वाईफाई नेटवर्क उपलब्ध कराने के बाद यूजर की डिवाइस को पूरी तरह से अपने हाथ का खिलौना बना लेते हैं। जिसके बाद साइबर क्रिमिनल यूजर की डिवाइस में कीलॉगर के जरिए पैकेट कैपचरिंग करता है, जिसके जरिए यूजर के विभिन्न सोशल नेटवर्किंग साइट, इंटरनेट बैंकिंग व अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं से जुड़ी हुई यूजर आईडी और पासवर्ड को चुरा लिया जाता है। ऐसा करने के बाद साइबर क्रिमिनल यूजर के बैंक खातों से लाखों रुपए का ट्रांजैक्शन कर लेते हैं और इसके साथ ही यूजर की पर्सनल जानकारी का गलत तरीके से इस्तेमाल कर दूसरे लोगों को ठगी का शिकार बनाते हैं।










