राज्यपाल से भारतीय रेलवे प्रबंधन सेवा-यातायात के वर्ष 2022 एवं 2023 बैच के 51 प्रशिक्षु अधिकारियों ने शिष्टाचार भेंट की
राज्यपाल ने जीवन के अनुभवों से दिया कर्तव्यनिष्ठा, संवेदनशीलता और दृढ़ निर्णय क्षमता का संदेश
प्रशिक्षु अधिकारियों ने राज्यपाल महोदया के साथ संवाद किया। प्रशिक्षु अधिकारी सुश्री आकांक्षा गुप्ता एवं सुश्री आकांक्षा सिंह ने अपने प्रशिक्षण के अनुभव साझा किए और बताया कि IRITM में प्रशिक्षण के दौरान उन्हें भारतीय रेल की कार्यप्रणाली एवं प्रशासन के विभिन्न आयामों को समझने का अवसर मिला।
प्रशिक्षु अधिकारी पूर्णिमा सूदन ने राज्यपाल महोदया से उनकी हाल की रेल यात्रा के अनुभव के संबंध में प्रश्न किया। राज्यपाल महोदया ने अपने अनुभवों को विस्तार से साझा करते हुए भारतीय रेल की व्यवस्थाओं की सराहना की। साथ ही उन्होंने स्वच्छता तथा रेलवे स्टाफ से संबंधित कुछ व्यावहारिक समस्याओं की ओर प्रशिक्षु अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया और इन क्षेत्रों में सुधार के लिए संवेदनशीलता एवं सतत प्रयास की आवश्यकता बताई।
प्रशिक्षु अधिकारी मंगेरा कौशिक भानुभाई ने राज्यपाल महोदया से पूछा कि मेहसाणा में एक शिक्षिका से लेकर लखनऊ जन भवन में राज्यपाल के रूप में उनकी सफल यात्रा में गुजरात की शिक्षा, संस्कार और संस्कृति की क्या भूमिका रही तथा उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में अपने दायित्वों के निर्वहन में ये मूल्य किस प्रकार उपयोगी सिद्ध हुए। डॉ. आकांक्षा ने प्रशासन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रश्न रखते हुए पूछा कि कागजों पर बनाई गई नीतियों को प्रभावी ढंग से धरातल पर कैसे उतारा जा सकता है।
इन प्रश्नों के उत्तर में राज्यपाल महोदया ने अपने जीवन और लंबे सार्वजनिक जीवन के अनेक प्रसंग साझा किए। उन्होंने विभिन्न परिस्थितियों में स्वयं द्वारा लिए गए कठिन और निर्णायक फैसलों के उदाहरणों के माध्यम से प्रशिक्षु अधिकारियों को बताया कि किसी भी नीति अथवा संकल्प को वास्तविक परिणाम तक पहुंचाने के लिए स्पष्ट उद्देश्य, दृढ़ इच्छाशक्ति, जमीनी वास्तविकताओं की समझ, सतत निगरानी और आवश्यकता पड़ने पर कठिन निर्णय लेने का साहस आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि किसी नीति की वास्तविक सफलता तभी है, जब उसका प्रभाव धरातल पर दिखाई दे और उसका लाभ उस व्यक्ति तक पहुंचे जिसके लिए वह बनाई गई है।
राज्यपाल महोदया ने युवा अधिकारियों को अपने भावी प्रशासनिक जीवन में ईमानदारी, अनुशासन, संवेदनशीलता और जनहित को सर्वोपरि रखने का संदेश दिया। उन्होंने अधिकारियों को समस्याओं को केवल फाइलों तक सीमित न रखकर जमीनी परिस्थितियों को समझने और समाधानपरक दृष्टिकोण के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर प्रशिक्षु अधिकारियों को जन भवन के संग्रहालय एवं वाटिका के भ्रमण का भी अवसर मिला, जहां उन्होंने जन भवन की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को निकट से जाना।
कार्यक्रम के दौरान IRITM के प्रोफेसर (वित्त) श्री अष्टानन्द पाठक ने राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल की प्रेरक जीवन-यात्रा के अनेक छुए-अनछुए प्रसंगों का भावप्रवण वर्णन किया। उन्होंने उनके साधारण ग्रामीण परिवेश में बीते बचपन, शिक्षा के लिए संघर्ष, एक शिक्षिका के रूप में सामाजिक सरोकारों से जुड़ाव तथा संगठनकर्ता, जनप्रतिनिधि, मंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल तक की उनकी असाधारण यात्रा के विभिन्न पड़ावों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
श्री पाठक ने राज्यपाल महोदया के जीवन की घटनाओं का केवल उल्लेख ही नहीं किया, बल्कि उन कठिन परिस्थितियों में उनके द्वारा लिए गए निर्णयों और उन निर्णयों से निकले जीवन-संदेशों को प्रशिक्षु अधिकारियों के भावी प्रशासनिक जीवन से जोड़ा। उन्होंने रेखांकित किया कि राज्यपाल महोदया की जीवन-यात्रा यह सिखाती है कि परिस्थितियां मनुष्य की संभावनाओं की सीमा तय नहीं करतीं; दृढ़ संकल्प, शिक्षा, अनुशासन और निर्णय लेने का साहस उसे उन सीमाओं से आगे ले जाता है।
उनके जीवन के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से प्रशिक्षु अधिकारियों के समक्ष यह संदेश रखा गया कि कठिन परिस्थितियों से घबराने के बजाय उनका सामना करना, आवश्यकता पड़ने पर कठिन किंतु सही निर्णय लेना, निरंतर सीखते रहना, जनसरोकारों के प्रति संवेदनशील रहना और पद को अधिकार नहीं बल्कि उत्तरदायित्व मानना ही प्रभावी नेतृत्व की पहचान है। श्री पाठक ने राज्यपाल महोदया की जीवन-यात्रा को इस बात का प्रेरक उदाहरण बताया कि संघर्ष जब संकल्प से जुड़ता है, तो वही अनुभव आगे चलकर नेतृत्व की शक्ति बन जाता है।
प्रशिक्षण के अंतिम चरण में आयोजित यह संवाद प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए केवल एक औपचारिक भेंट न होकर जीवन-अनुभवों से प्रशासन सीखने का अवसर बना। राज्यपाल महोदया की जीवन-यात्रा, उनके निर्णयों और उनके साथ हुए सीधे संवाद ने युवा अधिकारियों के समक्ष यह संदेश रखा कि लोकसेवा में पद से अधिक महत्वपूर्ण दायित्व, परिस्थितियों से अधिक महत्वपूर्ण संकल्प और निर्णय से अधिक महत्वपूर्ण उसका जनहितकारी परिणाम होता है।
भारतीय रेलवे परिवहन प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक श्री रंजन प्रकाश ठाकुर ने राज्यपाल जी को बच्चों की सर्वश्रेष्ठ कहानियां पुस्तक एवं स्मृति-चिह्न भेंट किया।
इस अवसर पर विशेष कार्याधिकारी श्री राज्यपाल अपर मुख्य सचिव स्तर डॉ0 सुधीर महादेव बोबडे, प्रोफेसर प्रांजल्य पार्थ लाठे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।










