नई दिल्ली:पीएम मोदी ने देश को फिर से किया आगाह
पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे समय में दुनिया भरोसेमंद और मजबूत सप्लाई चेन की जरूरत महसूस कर रही है
भारत अब दुनिया में एक भरोसेमंद साझेदार और उभरती हुई वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।
नई दिल्ली(BNE )-पीम नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर दोहराया है कि दुनिया लगातार चुनौतियों के दौर से गुजर रही है और अगर समय रहते हालात नहीं बदले गए तो कई दशकों की उपलब्धियां प्रभावित हो सकती हैं।यह बातें उन्होंने नीदरलैंड के द हेग में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए वैश्विक संकटों और बदलती विश्व व्यवस्था पर चिंता जताई।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले दुनिया ने कोरोना महामारी का सामना किया, उसके बाद कई क्षेत्रों में युद्ध की स्थिति बनी और अब ऊर्जा संकट जैसी समस्याएं सामने हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा दशक दुनिया के लिए आपदाओं और अस्थिरता का दौर बनता जा रहा है। अगर इन चुनौतियों का समाधान तेजी से नहीं निकाला गया, तो करोड़ों लोग दोबारा गरीबी और आर्थिक संकट की चपेट में आ सकते हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे समय में दुनिया भरोसेमंद और मजबूत सप्लाई चेन की जरूरत महसूस कर रही है। उन्होंने बताया कि भारत और नीदरलैंड मिलकर पारदर्शी, टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार सप्लाई नेटवर्क विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक साझेदारी और आपसी विश्वास आने वाले समय में सबसे बड़ी ताकत साबित होंगे।
प्रधानमंत्री ने भारत के बदलते स्वरूप का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और देशवासियों की उम्मीदें तथा सपने पहले से कहीं ज्यादा बड़े हो चुके हैं। यही आकांक्षाएं भारत के लोकतंत्र और विकास को नई दिशा दे रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया में एक भरोसेमंद साझेदार और उभरती हुई वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी इस समय पांच देशों की यात्रा पर हैं। अपने दौरे के दूसरे चरण में वह 15 मई को नीदरलैंड पहुंचे। यहां उनका स्वागत विशेष प्रोटोकॉल के तहत किया गया। एयरपोर्ट पर नीदरलैंड के विदेश मंत्री टॉम बेरेन्डसेन, रियर एडमिरल लुडगर ब्रुम्मेलार और नीदरलैंड में भारत के राजदूत कुमार तुहिन ने उनका स्वागत किया।
दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रोब जेट्टेन के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक, रक्षा सहयोग, जल प्रबंधन और ग्रीन एनर्जी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।










