यदि आप हैं प्री -डायबिटीज तो ये खबर आपके लिए है बेहद फायदेमंद
सिर्फ एक्सरसाइज नहीं खानपान भी बदलना होगा
वजन अधिक है तो सात प्रतिशत तक कम करने की कोशिश
हेल्थ डेस्क. डायबिटीज अचानक सामने आने वाली बीमारी नहीं है. कई लोगों में इसके पहले शरीर एक ऐसी स्थिति में पहुंचता है, जिसे प्री-डायबिटीज कहा जाता है. इस अवस्था में रक्त शर्करा सामान्य से अधिक होती है, लेकिन इतनी नहीं बढ़ी होती कि उसे डायबिटीज की श्रेणी में रखा जाए. यही वह समय है जब रोजमर्रा की आदतों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण हो जाता है. लंबे समय तक बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि कम होना और खानपान में लापरवाही जैसी जीवनशैली से जुड़ी आदतें स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं.
प्री-डायबिटीज का पता चलने के बाद हर व्यक्ति के लिए सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आगे क्या किया जाए. उपलब्ध शोध में जीवनशैली में बदलाव और नियमित शारीरिक गतिविधि को महत्वपूर्ण माना गया है. जिस शोध का हवाला दिया गया है, उसमें हर सप्ताह कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि को प्री-डायबिटीज वाले लोगों के लिए उपयोगी कदम बताया गया है. इसका अर्थ यह नहीं है कि केवल व्यायाम करने से हर व्यक्ति की प्री-डायबिटीज निश्चित रूप से समाप्त हो जाएगी, बल्कि नियमित गतिविधि रक्त शर्करा को बेहतर रखने और आगे के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है.
शरीर को सक्रिय रखना क्यों है जरूरी
आज की दिनचर्या में लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करना, वाहन से छोटी दूरी भी तय करना और शारीरिक मेहनत कम होना आम हो गया है. ऐसी जीवनशैली में शरीर की सक्रियता घटती जाती है. इसका असर वजन, शरीर में जमा अतिरिक्त वसा और रक्त शर्करा जैसे कई पहलुओं पर पड़ सकता है.
प्री-डायबिटीज के मामले में यही छोटी-छोटी आदतें महत्वपूर्ण हो जाती हैं. नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर को सक्रिय रखने के साथ वजन को संतुलित रखने में भी मदद कर सकती है. इसलिए विशेषज्ञों की सलाह में केवल जिम या कठिन व्यायाम पर जोर नहीं है, बल्कि ऐसी गतिविधियों को रोज की जिंदगी में शामिल करने पर ध्यान दिया जाता है जिन्हें व्यक्ति नियमित रूप से कर सके.
सप्ताह में 150 मिनट का लक्ष्य क्यों चर्चा में
उपलब्ध रिपोर्ट में प्री-डायबिटीज वाले लोगों के लिए हर सप्ताह 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली एक्सरसाइज का लक्ष्य बताया गया है. इसे एक साथ पूरा करना जरूरी नहीं है. सप्ताह के अलग-अलग दिनों में गतिविधि का समय बांटा जा सकता है.
मसलन, यदि कोई व्यक्ति सप्ताह में पांच दिन करीब 30 मिनट शारीरिक गतिविधि करता है तो कुल समय 150 मिनट तक पहुंच सकता है. यहां महत्वपूर्ण बात नियमितता है. हालांकि किसी व्यक्ति के लिए व्यायाम की उपयुक्त मात्रा उसकी उम्र, शारीरिक स्थिति और अन्य स्वास्थ्य परिस्थितियों पर निर्भर कर सकती है. इसलिए लंबे समय से निष्क्रिय व्यक्ति को अचानक कठिन व्यायाम शुरू करने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे सक्रियता बढ़ानी चाहिए.
शोध में सामने आया चार गुना तक का अंतर
जिस अध्ययन का उल्लेख स्रोत में किया गया है, उसमें 130 प्री-डायबिटिक लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया. ये लोग कार्डियोवैस्कुलर रिस्क रिडक्शन प्रोग्राम में शामिल थे. इस कार्यक्रम में इंटरनल मेडिसिन, न्यूट्रिशन, साइकोलॉजी और फिजियोथेरेपी जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों की सलाह और निगरानी भी शामिल थी.
रिपोर्ट के अनुसार, एक वर्ष बाद किए गए फॉलो-अप में करीब 58 प्रतिशत प्रतिभागी हर सप्ताह 150 मिनट की एक्सरसाइज का लक्ष्य पूरा कर रहे थे. शोधकर्ताओं ने पाया कि इस समूह में कम एक्सरसाइज करने वालों की तुलना में रक्त शर्करा के सामान्य रहने की संभावना लगभग चार गुना अधिक थी.
यह आंकड़ा महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन इसे इस अर्थ में नहीं लेना चाहिए कि 150 मिनट व्यायाम करने वाला प्रत्येक व्यक्ति निश्चित रूप से प्री-डायबिटीज से बाहर निकल जाएगा. अध्ययन एक विशिष्ट कार्यक्रम और प्रतिभागियों के समूह पर आधारित था. इसमें विशेषज्ञों की बहु-विषयक निगरानी भी शामिल थी.
सिर्फ एक्सरसाइज नहीं खानपान भी बदलना होगा
प्री-डायबिटीज के प्रबंधन की चर्चा केवल व्यायाम तक सीमित नहीं है. स्रोत में जीवनशैली में बदलाव के तहत सिंपल कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम करने और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों को अधिक शामिल करने की सलाह का उल्लेख किया गया है.
इसका उद्देश्य खानपान की गुणवत्ता पर ध्यान देना है. रोज के भोजन में क्या और कितनी मात्रा में लिया जा रहा है, यह भी स्वास्थ्य प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है. केवल एक्सरसाइज शुरू कर देने और बाकी आदतों को पूरी तरह नजरअंदाज करने से अपेक्षित परिणाम मिलना जरूरी नहीं है.
इसलिए प्री-डायबिटीज सामने आने पर व्यक्ति को अपनी पूरी दिनचर्या को देखना चाहिए—भोजन, शारीरिक गतिविधि, वजन और लंबे समय तक बैठे रहने की आदत जैसे पहलुओं पर एक साथ ध्यान देना अधिक व्यापक तरीका हो सकता है.
वजन अधिक है तो सात प्रतिशत तक कम करने की कोशिश
स्रोत में जिन लोगों का वजन अधिक था, उनके लिए अपने शरीर के वजन का कम से कम सात प्रतिशत कम करने का लक्ष्य रखने की सलाह का भी उल्लेख किया गया है. वजन कम करने का लक्ष्य हालांकि हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं हो सकता.
इसलिए इसे किसी व्यक्ति के लिए बिना चिकित्सकीय सलाह के अनिवार्य लक्ष्य नहीं माना जाना चाहिए. उम्र, लंबाई, वर्तमान वजन, खानपान, शारीरिक क्षमता और अन्य स्वास्थ्य परिस्थितियों को ध्यान में रखकर वजन प्रबंधन की योजना बनाना अधिक उचित है.
हल्की गतिविधि से शुरू कर सकते हैं दिनचर्या
व्यायाम का नाम सुनते ही कई लोगों के मन में जिम, भारी वजन उठाने या कठिन वर्कआउट की तस्वीर आने लगती है. लेकिन रोजमर्रा की शारीरिक सक्रियता बढ़ाने के लिए शुरुआत अपेक्षाकृत सरल गतिविधियों से की जा सकती है.
तेज चाल से चलना, नियमित वॉक, अपनी क्षमता के अनुसार साइकिल चलाना या ऐसी अन्य मध्यम स्तर की गतिविधियां दिनचर्या का हिस्सा बनाई जा सकती हैं. कौन-सी गतिविधि और कितनी तीव्रता उपयुक्त होगी, यह व्यक्ति की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है.
लक्ष्य यह होना चाहिए कि लंबे समय तक बैठे रहने के बीच शरीर को नियमित रूप से सक्रिय किया जाए और धीरे-धीरे साप्ताहिक गतिविधि का समय बढ़ाया जाए.
प्री-डायबिटीज को नजरअंदाज करना क्यों ठीक नहीं
प्री-डायबिटीज में कई बार व्यक्ति को कोई स्पष्ट परेशानी महसूस नहीं होती. यही कारण है कि इसे गंभीरता से लेना जरूरी है. केवल यह सोचकर कि अभी डायबिटीज नहीं है, जीवनशैली में बदलाव को टालते रहना आगे जोखिम बढ़ा सकता है.
समय रहते रक्त शर्करा की जांच, चिकित्सकीय सलाह और जीवनशैली में आवश्यक परिवर्तन पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है. किसी व्यक्ति को प्री-डायबिटीज की जानकारी मिलने पर अपने डॉक्टर से यह समझना चाहिए कि उसकी स्थिति में कितनी शारीरिक गतिविधि, किस तरह का भोजन और किस प्रकार का वजन प्रबंधन उपयुक्त रहेगा.
एक घंटे की मेहनत नहीं लगातार आदत ज्यादा महत्वपूर्ण
स्वास्थ्य के मामले में कई लोग कुछ दिनों तक बहुत मेहनत करने के बाद पुरानी दिनचर्या में लौट जाते हैं. प्री-डायबिटीज के संदर्भ में उपलब्ध अध्ययन का संदेश नियमित जीवनशैली बदलाव की ओर है. सप्ताह में 150 मिनट का लक्ष्य इसी नियमितता को व्यवस्थित करने का एक तरीका है.
यदि किसी व्यक्ति को 30 मिनट लगातार व्यायाम करना मुश्किल लगता है, तो अपनी क्षमता और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार गतिविधि को छोटे हिस्सों में बांटने के विकल्प पर विचार किया जा सकता है. मुख्य बात शरीर को निष्क्रिय रखने के बजाय नियमित रूप से सक्रिय रखना है.
दवा बंद करने का फैसला खुद न लें
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है. प्री-डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए जीवनशैली में बदलाव उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को दवा की जरूरत नहीं पड़ेगी. यदि किसी व्यक्ति को डॉक्टर ने पहले से कोई दवा दी है, तो केवल व्यायाम या खानपान में बदलाव के आधार पर उसे खुद से बंद नहीं करना चाहिए.
इसी तरह, किसी व्यक्ति की रक्त शर्करा सामान्य दिखाई देने लगे तो भी नियमित चिकित्सकीय निगरानी को अचानक बंद करना उचित नहीं है. उपचार और जीवनशैली में बदलाव का निर्णय व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर होना चाहिए.
छोटी शुरुआत से बन सकती है बड़ी आदत
प्री-डायबिटीज का पता चलना अपने स्वास्थ्य पर दोबारा ध्यान देने का अवसर भी हो सकता है. रोज कुछ समय शरीर को सक्रिय रखने से शुरुआत की जा सकती है. भोजन में अनावश्यक सरल कार्बोहाइड्रेट कम करने, फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देने, वजन संतुलित रखने और नियमित शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या में शामिल करने जैसे कदम व्यापक जीवनशैली सुधार का हिस्सा हो सकते हैं.
150 मिनट का साप्ताहिक लक्ष्य कोई जादुई संख्या नहीं, बल्कि नियमित सक्रियता को दिनचर्या में शामिल करने का एक व्यावहारिक ढांचा है. उपलब्ध अध्ययन में इस लक्ष्य को पूरा करने वाले प्रतिभागियों में रक्त शर्करा सामान्य रहने की संभावना अधिक देखी गई. हालांकि हर व्यक्ति का शरीर और स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है.
इसलिए प्री-डायबिटीज को लेकर सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि इसे टालने के बजाय समय रहते अपनी दिनचर्या पर ध्यान दिया जाए. हल्की लेकिन नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित खानपान और वजन पर नियंत्रण—इन तीनों को साथ लेकर चलना आगे के जोखिम को कम करने की दिशा में उपयोगी कदम हो सकता है.










