वॉशिंगटन:अमेरिका में मध्यावधि चुनाव (मिड टर्म इलेक्शन 2026) के लिए मतदान आज
चुनाव में मुख्य मुकाबला रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच है
अमेरिका में मतदान और मतगणना की प्रक्रिया अलग-अलग राज्यों के नियमों के अनुसार संचालित होती है।
वॉशिंगटन (BNE) : अमेरिका में मंगलवार को मध्यावधि चुनाव (मिडटर्म इलेक्शन 2026) के लिए मतदान हो रहा है। इन चुनावों को राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के दो साल के कार्यकाल के रिपोर्ट कार्ड के तौर पर देखा जा रहा है। चुनाव में मुख्य मुकाबला रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच है। नतीजे तय करेंगे कि ट्रंप को अगले दो साल तक कांग्रेस में अपनी नीतियों और फैसलों को लागू करने के लिए कितना समर्थन मिलेगा या फिर विपक्ष उनके सामने राजनीतिक और विधायी चुनौतियां खड़ी करेगा।
अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट में बहुमत बनाए रखना रिपब्लिकन पार्टी के लिए अहम चुनौती है। फिलहाल दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण है। यदि डेमोक्रेटिक पार्टी हाउस में बहुमत हासिल कर लेती है तो ट्रंप सरकार के विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है। वहीं, सीनेट में बहुमत बदलने से प्रमुख नियुक्तियों और विधायी फैसलों पर भी असर पड़ सकता है।
अमेरिका में मतदाता मुख्य रूप से तीन तरीकों से वोट डालते हैं। पहला पोस्टल मेल-इन बैलेट है, जिसके तहत मतदाता डाक के जरिए अपना वोट भेजते हैं। दूसरा अर्ली इन-पर्सन वोटिंग है, जिसमें लोग मतदान दिवस से पहले ही मतदान केंद्रों पर जाकर वोट डालते हैं। तीसरा तरीका चुनाव के दिन मतदान केंद्रों पर पहुंचकर वोट डालना है।
अमेरिका में मतदान और मतगणना की प्रक्रिया अलग-अलग राज्यों के नियमों के अनुसार संचालित होती है। इसी वजह से सभी राज्यों में मतदान समाप्त होने और नतीजे आने का समय एक जैसा नहीं होता। कई राज्यों में शुरुआती नतीजे चुनाव की रात ही आने लगते हैं, जबकि डाक मतपत्रों और अन्य मतों की गिनती के कारण अंतिम परिणाम आने में अधिक समय लग सकता है।
अमेरिका की संसद को कांग्रेस कहा जाता है, जिसके दो सदन हैं। निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर चुनाव हो रहा है, जबकि उच्च सदन सीनेट की 35 सीटों पर मतदान होना है। इनमें सीनेट की 33 नियमित सीटें और दो विशेष चुनाव वाली सीटें शामिल हैं।
राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल का होता है और हर दो साल में मध्यावधि चुनाव कराए जाते हैं। इनमें कांग्रेस के सदस्यों के अलावा कई राज्यों में गवर्नर और अन्य पदों के लिए भी मतदान होता है।
सीनेट में कुल 100 सीटें हैं। चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी के पास 53, डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 45 और दो निर्दलीय सदस्यों के पास सीटें हैं। ये दोनों निर्दलीय डेमोक्रेट्स के साथ मतदान करते हैं। सीनेट में 50-50 की बराबरी होने पर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का वोट निर्णायक हो सकता है।
वहीं, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत के लिए 218 सीटों की जरूरत है। चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी के पास 218 सीटें थीं, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 214 सीटें थीं। ऐसे में डेमोक्रेट्स यदि बहुमत का आंकड़ा पार कर लेते हैं तो हाउस का नियंत्रण उनके हाथ में जा सकता है। इससे ट्रंप प्रशासन के लिए कानून पारित कराना और अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इस बार के मध्यावधि चुनावों से पहले भारतीय मूल के अमेरिकी मतदाताओं के रुझान को लेकर भी सर्वे किया गया है। कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस और यूगोव की ओर से अक्टूबर 2026 में कराए गए इंडियन अमेरिकन एटीट्यूड सर्वे (IAAS) के अनुसार, अमेरिकी नागरिकता रखने वाले भारतीय मूल के 62 प्रतिशत मतदाताओं ने हाउस चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को वोट देने की इच्छा जताई है। वहीं, 19 प्रतिशत ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन किया है। 12 प्रतिशत मतदाता अभी अनिर्णीत थे।
सीनेट चुनावों में भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को 63 प्रतिशत और रिपब्लिकन उम्मीदवारों को 21 प्रतिशत भारतीय मूल के मतदाताओं का समर्थन मिला। सर्वे 7 से 27 अक्टूबर के बीच 1,000 भारतीय मूल के अमेरिकी वयस्कों के बीच कराया गया था।
इस तरह अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में न केवल कांग्रेस के दोनों सदनों का भविष्य तय होगा, बल्कि इनका असर राष्ट्रपति ट्रंप के शेष कार्यकाल की राजनीतिक दिशा पर भी पड़ेगा।










