मरीज के स्थानांतरण के दौरान उठे सवाल से जन्मा नवाचार, आपातकालीन स्ट्रेचर के डिजाइन को मिला सरकारी पंजीकरण
गंभीर मरीजों के सुरक्षित परिवहन के साथ सीपीआर और अन्य जीवनरक्षक सुविधाओं को एक मंच पर लाने की पहल
लखनऊ | (Bne) 
हर नया आविष्कार प्रयोगशाला में ही जन्म ले, यह जरूरी नहीं। कई बार किसी मरीज के उपचार के दौरान सामने आई वास्तविक समस्या ही ऐसे विचार को जन्म देती है, जो आगे चलकर चिकित्सकीय नवाचार का रूप ले लेती है।
ऐसा ही एक विचार डॉ. लोकेन्द्र गुप्ता, निदेशक–आपातकालीन चिकित्सा एवं आघात देखभाल, मेदांता अस्पताल, लखनऊ एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, SACTEM, और उनकी टीम के मन में आया। टीम द्वारा विकसित समेकित आपातकालीन परिवहन स्ट्रेचर के डिजाइन को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा पंजीकरण प्रदान किया गया है।
इस टीम में डॉ. नयन श्रीरामुला, विभागाध्यक्ष–आपातकालीन चिकित्सा, मेडिकवर अस्पताल, हैदराबाद, तेलंगाना, के साथ डॉ. उत्सव आनंद मणि, डॉ. राधिका रानी चंद्रा, डॉ. यतिन तलवार, डॉ. ओ. पी. संजीव और डॉ. सौरभ सिंह शामिल हैं।
एक मरीज से शुरू हुई नवाचार की कहानी
इस नवाचार की शुरुआत एक गंभीर रूप से बीमार मरीज के स्थानांतरण के दौरान हुई।
मरीज को आपातकालीन विभाग से गहन चिकित्सा इकाई में ले जाया जा रहा था। रास्ते में अचानक उसकी हालत बिगड़ गई और हृदय-फुफ्फुसीय पुनर्जीवन यानी सीपीआर शुरू करना पड़ा।
उसी दौरान चिकित्सकों के सामने एक ऐसी व्यावहारिक समस्या आई, जिससे आपातकालीन चिकित्सा में काम करने वाले डॉक्टर अक्सर परिचित होते हैं। चलते हुए सामान्य स्ट्रेचर पर प्रभावी सीपीआर करना आसान नहीं होता।
प्रभावी छाती दबाव के लिए डॉक्टर को सही स्थिति, पर्याप्त जगह और स्थिर आधार की जरूरत होती है।
इसी परिस्थिति में एक सवाल उठा—
“सीपीआर करने के लिए डॉक्टर को स्ट्रेचर पर चढ़ना ही क्यों पड़े?”
यही सवाल आगे चलकर एक नए डिजाइन की बुनियाद बना।
चिकित्सकों ने सोचा कि क्या ऐसा स्ट्रेचर बनाया जा सकता है, जो मरीज को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के साथ जरूरत पड़ने पर जीवनरक्षक उपचार में भी सहायक हो।
एक विचार आया, उसका चित्र तैयार हुआ, चित्र डिजाइन में बदला और अब उस डिजाइन को भारत सरकार से औपचारिक पंजीकरण मिल चुका है।
सिर्फ मरीज को ले जाने तक सीमित नहीं
समेकित आपातकालीन परिवहन स्ट्रेचर को इस सोच के साथ विकसित किया गया है कि गंभीर मरीज का अस्पताल के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में स्थानांतरण उसके उपचार में रुकावट न बने।
एक ही स्ट्रेचर को अलग-अलग चिकित्सकीय परिस्थितियों के अनुसार इस्तेमाल किया जा सकता है, जिनमें गहन चिकित्सा कक्ष की स्थिति, आपातकालीन उपचार एवं सीपीआर, जांच एवं रेडियोलॉजी, शल्य चिकित्सा एवं प्रक्रिया, कुर्सी एवं अर्ध-बैठी स्थिति तथा परिवहन एवं स्थानांतरण शामिल हैं।
स्ट्रेचर में सीपीआर के लिए विस्तारित मंच, मरीज की निगरानी, ऑक्सीजन एवं सक्शन की सुविधा, आपातकालीन सामान रखने की व्यवस्था, मरीज की सुरक्षा प्रणाली, जांच के लिए पारदर्शी सतह, द्रव एवं अन्य उपकरणों के लिए स्थान, ऊंचाई समायोजन और बैटरी जैसी सुविधाओं को एक ही मंच पर शामिल किया गया है।
इसके पीछे उद्देश्य सीधा है—मरीज को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाते समय भी जरूरी आपातकालीन उपचार की क्षमता बनी रहे।
आपातकालीन चिकित्सा में परिवहन भी उपचार का हिस्सा
आपातकालीन चिकित्सा में मरीज की स्थिति कब बिगड़ जाए, इसका पहले से अनुमान लगाना हमेशा संभव नहीं होता।
मरीज जांच के लिए जाते समय गंभीर हो सकता है, गहन चिकित्सा इकाई में स्थानांतरण के दौरान हृदय रुक सकता है या किसी प्रक्रिया के लिए ले जाते समय अचानक पुनर्जीवन की जरूरत पड़ सकती है।
ऐसी स्थिति में चिकित्सक का ध्यान उपकरणों की सीमाओं से जूझने के बजाय मरीज की जान बचाने पर होना चाहिए। यही सोच इस नवाचार के केंद्र में है।
रोजमर्रा की चिकित्सकीय चुनौती से निकला समाधान
इस डिजाइन की खासियत यह है कि इसका विचार उन चिकित्सकों ने विकसित किया है, जो रोजाना गंभीर मरीजों का इलाज करते हैं, उन्हें पुनर्जीवित करते हैं और अस्पताल के विभिन्न हिस्सों में उनका सुरक्षित स्थानांतरण करते हैं।
यह किसी काल्पनिक या दूर की समस्या का समाधान खोजने का प्रयास नहीं था, बल्कि उस व्यावहारिक कठिनाई का समाधान तलाशने की कोशिश थी, जिसे चिकित्सकों ने स्वयं मरीज के पास खड़े होकर महसूस किया।
यही चिकित्सक-आधारित नवाचार की ताकत भी है।
“आपातकालीन चिकित्सा में सबसे अच्छे नवाचार अक्सर वहीं से जन्म लेते हैं, जहां समस्या सबसे पहले दिखाई देती है।”
समेकित आपातकालीन परिवहन स्ट्रेचर के डिजाइन का पंजीकरण इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। टीम अब इसके आगे तकनीकी विकास, परीक्षण और चिकित्सकीय मूल्यांकन की दिशा में काम करेगी।
एक स्ट्रेचर, कई जरूरतें और हर महत्वपूर्ण क्षण के लिए तैयार रहने की सोच।
एक मरीज से शुरू हुआ सवाल, चिकित्सकीय अनुभव से निकला विचार और अब भारत सरकार से पंजीकृत एक डिजाइन।
क्योंकि आपातकालीन चिकित्सा में हर क्षण महत्वपूर्ण होता है









