नवरात्र स्पेशल:ये चमत्कारिक औषधीय पौधे देता है बल और ऊर्जा
मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा का संबंध चन्द्रसूर (हलीम) नामक औषधीय पौधे से जोड़ा जाता है.
नई दिल्ली (BNE): नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का विधान है। मां चंद्रघंटा को साहस, शांति और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ आयुर्वेद में भी नवरात्र के नौ दिनों का विशेष महत्व बताया गया है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा का संबंध चन्द्रसूर (हलीम) नामक औषधीय पौधे से जोड़ा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम लेपिडियम सैटिवम है।
आयुर्वेद में चन्द्रसूर को पौष्टिक और बलवर्धक माना गया है। पारंपरिक रूप से इसका इस्तेमाल शरीर को पोषण देने और कुछ स्वास्थ्य समस्याओं में सहायक औषधि के रूप में किया जाता रहा है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में भी इसके गुणों का उल्लेख मिलता है।
हड्डियों और जोड़ों के लिए लाभकारी: चन्द्रसूर में कैल्शियम, आयरन और प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह हड्डियों को मजबूती प्रदान करने, जोड़ों के दर्द और वात विकारों को दूर करने में अत्यंत सहायक है। वृद्धावस्था में हड्डियों की कमजोरी और गठिया जैसी समस्याओं में इसका प्रयोग लाभदायक माना जाता है।
शारीरिक शक्ति और ऊर्जा में वृद्धि: यह शरीर की कमजोरी को दूर कर तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है। बढ़ती उम्र के किशोरों में इसके सेवन से लंबाई बढ़ाने और शारीरिक विकास में सहायता मिलती है। यह शरीर में स्फूर्ति और शक्ति का संचार करता है।
पाचन तंत्र के लिए उपयोगी: चन्द्रसूर पेट के कीड़े, अपच, गैस और कफ संबंधी समस्याओं को दूर करने में प्रभावी है। यह पाचन क्रिया को सुधारता है और पेट को स्वस्थ रखता है।
रक्तवर्धक और एनीमिया में राहत: इसमें आयरन की भरपूर मात्रा होने के कारण यह शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को सुधारने और खून की कमी यानी एनीमिया को दूर करने में मदद करता है। विशेष रूप से महिलाओं के लिए यह बहुत उपयोगी औषधि मानी जाती है।
हालांकि चन्द्रसूर या किसी अन्य औषधीय पौधे का सेवन औषधि के रूप में करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है। गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं और किसी बीमारी के लिए दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।










