उ0प्र0 में मिशन शक्ति कार्यक्रम बेटी की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलम्बन को समर्पित
रक्षाबंधन केवल रक्षा का सूत्र बांधने का पर्व नहीं, बल्कि श्रद्धा,विश्वास, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री जी आज यहां अपने सरकारी आवास पर आयोजित ‘बिटिया और बहना यू0पी0 का गहना-स्नेह बन्धन कार्यक्रम’ में विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी को विभिन्न विद्यालयों की छात्राओं ने राखी बांधी। विभिन्न छात्राओं ने मुख्यमंत्री जी से संवाद किया। प्रदेश की सभी जनपदों से वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से माताओं एवं बहनों ने मुख्यमंत्री जी को राखी भेंजकर रक्षा बन्धन की शुभकामनाएं प्रेषित की।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि ‘श्रद्धावान लभते ज्ञानम्’। जीवन में ज्ञान प्राप्त करने के लिए अपने से बड़ों के प्रति सम्मान और श्रद्धा का भाव आवश्यक है। श्रद्धा और सम्मान विश्वास में परिवर्तित होते हैं, विश्वास आत्मसम्मान एवं आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाता है और आत्मनिर्भरता विकास को गति प्रदान करती है। इस प्रकार हमारे पर्व-त्योहार समाज को जोड़ने के साथ ही उसे स्वावलंबन और विकास की दिशा में आगे बढ़ाने का कार्य करते हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज इस कार्यक्रम में कुछ बेटियां अपने हाथों से राखियां बनाकर लाई हैं। कुछ लोगों ने बाजार से राखियां खरीदी होंगी। लेकिन बाजार से खरीदी गई राखी के पीछे भी किसी कारीगर, हस्तशिल्पी और श्रमिक का परिश्रम जुड़ा हुआ है। राखी बनाने के लिए कच्चा माल भी किसी कारीगर या हस्तशिल्पी ने तैयार किया होगा। जब हम स्थानीय उत्पाद खरीदते हैं तो उसका पैसा दुकानदार के माध्यम से उसी कारीगर तक पहुंचता है।
प्रदेश में लगभग 15 करोड़ राखियां तैयार होती हैं। यह राखियां भाई-बहन, आचार्य-शिष्य, पुरोहित-यजमान के सम्बन्धों को मजबूती से आगे बढ़ाती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। इसलिए रक्षाबंधन केवल सामाजिक सम्बन्धों को मजबूत करने वाला पर्व नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और समाज के स्वावलम्बन को मजबूत करने का माध्यम भी है।जब कारीगरों और हस्तशिल्पियों को उनके उत्पाद का मूल्य मिलता है तो वही पैसा पुनः बाजार में आता है और विकास की प्रक्रिया को गति देता है। इस प्रकार समाज की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के विभिन्न पक्ष एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मिशन शक्ति कार्यक्रम बेटी की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलम्बन को समर्पित है। आज विभिन्न विद्यालयों से आई बेटियों ने जिस प्रकार अपनी जिज्ञासाओं और आकांक्षाओं से जुड़े प्रश्न पूछे हैं, वे बदलते उत्तर प्रदेश और बदलते भारत की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि एक समय था जब बेटियां भय के कारण विद्यालय नहीं जा पाती थीं। गरीब परिवारों में संसाधनों की कमी के कारण बेटियों की शिक्षा के साथ भी भेदभाव होता था। कई परिवार बेटे के लिए यूनिफॉर्म, जूते और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था कर लेते थे, लेकिन बेटी के लिए यह सम्भव नहीं हो पाता था।
मुख्यमंत्री बनने के अपने शुरुआती दिनों का स्मरण करते हुए मुख्यमंत्री जी ने बताया कि एक जनपद के दौरे के दौरान उन्होंने सर्दियों के मौसम में कुछ छोटी बच्चियों को फटे हुए बैग के साथ नंगे पैर विद्यालय जाते देखा था। जब उन्होंने बच्चियों से यूनिफॉर्म और जूते के बारे में पूछा तो वे चुप हो गईं। एक बच्ची ने बताया कि उसके भाई के पास जूते और यूनिफॉर्म है, जबकि उसके पास नहीं है। इस घटना ने उन्हें भीतर तक प्रभावित किया और लखनऊ लौटते ही उन्होंने निर्णय लिया कि प्रदेश के बच्चों को शिक्षा के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। आज प्रदेश सरकार प्रतिवर्ष लगभग 1 करोड़ 60 लाख बच्चों को दो यूनिफॉर्म, बैग, पुस्तकें, जूते-मोजे तथा सर्दियों में स्वेटर उपलब्ध करा रही है। आज प्रदेश के बच्चे बेहतर सुविधाओं के साथ विद्यालय जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल विद्यालयों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि बच्चों को ऐसा वातावरण उपलब्ध कराना है जिसमें वे आत्मविश्वास के साथ शिक्षा प्राप्त कर सकें और अपने भविष्य का निर्माण कर सकें। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में गरीब परिवारों की बेटियों को शिक्षा का अवसर मिला, लेकिन पहले इन विद्यालयों में कक्षा-8 तक की शिक्षा के बाद बड़ी संख्या में बेटियों को घर लौटना पड़ता था और उनकी आगे की पढ़ाई बाधित हो जाती थी। प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि इन विद्यालयों को कक्षा-8 से कक्षा-12 तक उच्चीकृत किया जाएगा और यह सुविधा सभी विकासखण्डों तक पहुंचाई जाएगी एवं विद्यालयों से सम्बन्धित सभी विकासखण्डों में विद्यालय निर्माण की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी गई है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से प्रदेश सरकार ने निर्माण श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा के लिए अटल आवासीय विद्यालयों की शुरुआत की है। इसे ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश में 18 अटल आवासीय विद्यालय प्रारम्भ किए गए हैं। प्रदेश सरकार द्वारा अटल आवासीय विद्यालयों में भी बच्चों के लिए बेहतर शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और इनमें बच्चियों की संख्या को बढ़ाया गया है। सरकार का प्रयास है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर वातावरण उपलब्ध हो।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि लखनऊ में परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज पाण्डेय के नाम पर संचालित सैनिक स्कूल उत्तर प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया कि सैनिक स्कूलों में बेटियों को भी प्रवेश का अवसर मिलना चाहिए। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2018 में बेटियों के लिए सैनिक स्कूल का द्वार खोला गया। यह एक महत्वपूर्ण पहल थी। आज देश के अन्य सैनिक स्कूलों में भी बेटियों को प्रवेश का अवसर प्राप्त हो रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना देश और प्रदेश के विकास के लिए अत्यन्त आवश्यक है। एक समय देश में महिलाओं की रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी बहुत कम थी। आजादी के बाद करीब 75 वर्षां तक केवल 12 प्रतिशत महिलाएं नौकरी या रोजगार से जुड़ी थीं। आज महिलाओं की भागीदारी 12 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। प्रदेश के बड़े शहरों में कामकाजी महिलाओं के लिए निःशुल्क छात्रावासों के निर्माण की दिशा में भी सरकार काम कर रही है, ताकि बेटियां और महिलाएं सुरक्षित वातावरण में रहकर शिक्षा एवं रोजगार के अवसरों का लाभ उठा सकें।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज बेटियां यह सवाल कर रही हैं कि यदि पुरुष रात्रि पाली में काम कर सकते हैं तो महिलाएं क्यों नहीं कर सकतीं। यह बदलते आत्मविश्वास का प्रतीक है। बेटियां अब केवल अवसर मांग नहीं रही हैं, बल्कि देश और प्रदेश के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आगे आ रही हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर 27, 28 और 29 अगस्त को तीन दिनों तक उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम तथा नगरीय परिवहन सेवा की बसों में कोई भी बेटी, बहन या माता एक सहयात्री के साथ निःशुल्क यात्रा कर सकेगी। इसके लिए महिला यात्री से किराया नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही आगामी 29 अगस्त के बाद 60 वर्ष से अधिक आयु की प्रत्येक माता को उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा सुविधा की व्यवस्था लागू कर दी गई है। इसके आदेश भी जारी किए जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज जीवन का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है, जिसमें बेटियां आगे न बढ़ रही हों। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में नारी शक्ति वन्दन अधिनियम के माध्यम से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को और मजबूत करने का प्रयास किया गया है। पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी पहले से सुनिश्चित है और आने वाले समय में विधानसभा एवं लोकसभा में भी बेटियों को व्यापक अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल कानून का पालन करने की बात नहीं है, बल्कि कानून बनाने वाली टेबल पर बेटियों के बैठने का विश्वास है। यह बदलते भारत का संकेत है। देश ऐसी दिशा में आगे बढ़ रहा है जहां बेटियां शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता, सामाजिक सेवा और सार्वजनिक जीवन सहित प्रत्येक क्षेत्र में अपनी भूमिका निभाएंगी।
मुख्यमंत्री जी ने विभिन्न विद्यालयों से आई बेटियों के साथ संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी जिज्ञासाएं, प्रश्न और आकांक्षाएं नए भारत की तस्वीर प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने कहा कि बेटियों से मिलकर उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि आने वाले समय में शिक्षा और संस्थानों के विकास के लिए और क्या-क्या किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेटियों के आत्मविश्वास और उनकी आकांक्षाओं से उन्हें भी नई ऊर्जा एवं नई प्रेरणा प्राप्त हुई है। उन्होंने प्रदेश की सभी बेटियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि डबल इंजन की सरकार पूरी मजबूती के साथ बेटियों के साथ खड़ी है। सरकार उन्हें हर सम्भव सहयोग और अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बेटियों से आह्वान किया कि वे मेहनत और परिश्रम के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ें तथा अपने यशस्वी जीवन के साथ प्रदेश और देश के विकास में योगदान दें।
मुख्यमंत्री जी ने कार्यक्रम में छात्राओं द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए सबसे आवश्यक है कि व्यक्ति अपने अन्दर अच्छी सोच पैदा करे। अच्छा करने के लिए स्वयं को तैयार करना होगा। जो लक्ष्य निर्धारित किया है, उसके अनुरूप आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि आज के समय में टेक्नोलॉजी महत्वपूर्ण है, लेकिन उसका उपयोग आवश्यकता के अनुरूप और सीमित रूप में किया जाना चाहिए। स्मार्टफोन आज की पीढ़ी के लिए उपयोगी तकनीक है, लेकिन इसके अत्यधिक उपयोग से बचना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन का उपयोग डिजिटल लाइब्रेरी, अच्छे कंटेंट और ऑनलाइन शिक्षा से सम्बन्धित सामग्री प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है, लेकिन यह आवश्यक नहीं कि उसमें उपलब्ध प्रत्येक सामग्री हमारे हित में हो।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि किसी मशीन या तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता हमारी स्वयं की सोचने और रचनात्मकता की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। एक समय था जब कैलकुलेटर नहीं होते थे तो लोग गिनती और पहाड़े याद रखते थे तथा गणित के प्रश्नों का उत्तर तुरन्त दे देते थे। कैलकुलेटर पर निर्भरता बढ़ने के साथ लोगों की इस प्रकार की स्मरण क्षमता प्रभावित हुई। इसी प्रकार आज स्मार्टफोन पर अत्यधिक निर्भरता से भी हमारी सोचने-समझने की क्षमता कमजोर हो सकती है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग आंखों की रोशनी और मस्तिष्क की कार्यक्षमता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने बच्चों से अपील की कि जो विद्यार्थी प्रतिदिन चार से छह घंटे स्मार्टफोन पर समय बिताते हैं, वे धीरे-धीरे इस अवधि को कम करें। शिक्षा से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण कंटेंट देखना हो या कोई आवश्यक जानकारी प्राप्त करनी हो तो स्मार्टफोन का उपयोग किया जाए। हर समय स्मार्टफोन से चिपके रहने की आदत से स्वयं को दूर रखना चाहिए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अच्छे और बुरे, दोनों प्रकार के कंटेंट उपलब्ध होते हैं। विद्यार्थियों को अपनी आवश्यकता के अनुरूप तथा पाठ्यक्रम एवं प्रतियोगी परीक्षाओं से सम्बन्धित उपयोगी सामग्री को ही प्राथमिकता देनी चाहिए। स्मार्टफोन और सोशल मीडिया पर अनावश्यक समय खर्च करने के बजाय विद्यार्थियों को अच्छी पुस्तकों को पढ़ने की आदत डालनी चाहिए। पाठ्यक्रम से इतर प्रेरणादायी और ज्ञानवर्धक पुस्तकों का अध्ययन भी बच्चों के व्यक्तित्व और ज्ञान के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मुख्यमंत्री जी ने अपने उदाहरण के माध्यम से कहा कि वह स्वयं भी स्मार्टफोन का बहुत कम उपयोग करते हैं। आवश्यक होने पर ही, विशेषकर राज्य से जुड़े किसी महत्वपूर्ण विषय अथवा मुद्दे के लिए, सीमित समय के लिए इसका उपयोग करते हैं। उन्होंने छात्राओं से कहा कि उन्हें उनसे भी अधिक स्मार्टफोन से दूरी बनाकर अपने पाठ्यक्रम, ज्ञान और भविष्य पर पूरा ध्यान केंद्रित करना चाहिए। बच्चों को अपना मन और मस्तिष्क खुला रखते हुए जहां भी पाठ्यक्रम, भविष्य और ज्ञान की दृष्टि से अच्छी जानकारी मिले, उसे ग्रहण करने का प्रयास करना चाहिए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश भारत की सबसे बड़ी आबादी वाला प्रदेश है। प्रदेश में 25 करोड़ से अधिक लोग निवास करते हैं, लेकिन इतनी बड़ी आबादी हमारे लिए चुनौती नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सम्भावनाओं को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। जो लोग प्रदेश की बड़ी आबादी को चुनौती मानते थे, उन्होंने उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य बना दिया था। वर्तमान सरकार ने इसी आबादी को प्रदेश के डेमोग्राफिक डिविडेंड से जोड़ने का काम किया है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में बड़े स्तर पर स्किलिंग के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया गया। स्किलिंग को रोजगार से जोड़ा गया और रोजगार को उत्तर प्रदेश के विकास से जोड़ते हुए प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने का कार्य किया गया। जब इतनी बड़ी आबादी एक साथ आगे बढ़ती है और एक साथ सोचती है तो उसके सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं। आज परिणाम सबके सामने है। अब उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य नहीं है। आज उत्तर प्रदेश देश की टॉप-3 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। लगभग नौ वर्ष पहले उत्तर प्रदेश देश के सबसे पिछड़े राज्यों में गिना जाता था, जबकि आज देश के सबसे प्रगतिशील राज्यों की चर्चा में उत्तर प्रदेश का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि 25 करोड़ लोगों को सुरक्षा, सम्मान और स्वावलम्बन के साथ आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने शुद्ध नीयत और स्पष्ट नीति के साथ कार्य किया, जिसका परिणाम आज दिखाई दे रहा है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि जीवन में भी शुद्ध नीयत और स्पष्ट लक्ष्य होना चाहिए। यदि लक्ष्य स्पष्ट है और उसके लिए निरंतर प्रयास किया जाए तो परिणाम अवश्य प्राप्त होगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर बेटियों के साथ संवाद का यह अवसर अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश की बेटियां जिस सुरक्षित और उन्मुक्त वातावरण में मुख्यमंत्री से सीधे संवाद कर रही हैं, यह उत्तर प्रदेश में आए व्यापक परिवर्तन का प्रतीक है। वर्ष 2017 से पहले बेटियां इस प्रकार सुरक्षित और स्वतंत्र वातावरण में मुख्यमंत्री से सीधे संवाद नहीं कर सकती थीं। आज बड़ी संख्या में बेटियां मुख्यमंत्री आवास पर आकर बिना किसी भय के अपने प्रश्न पूछ रही हैं और अपनी बात रख रही हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में बेटियों की सुरक्षा एक बड़ी चिंता थी। अनेक अभिभावक बेटियों को स्कूल भेजने से भी कतराते थे या उन्हें दूर के प्रदेशों में हॉस्टल में रखने के लिए मजबूर होते थे। आज स्थिति बदली है। प्रदेश की बेटियां सुरक्षित हैं, उनका सम्मान हो रहा है और वे स्वावलंबन के साथ जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह उत्तर प्रदेश के लिए बहुत बड़ा परिवर्तन है कि आज प्रदेश की बेटियां आगे बढ़कर प्रदेश और देश के विकास में अपना योगदान दे रही हैं। प्रदेश सरकार ने बेटी के जन्म से लेकर उसके स्नातक तक की शिक्षा और विकास के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता सुनिश्चित की है। उन्होंने मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि बेटी के जन्म से लेकर उसकी शिक्षा तक सरकार उसके साथ खड़ी है। बेटियों के विवाह के लिए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना संचालित की जा रही है। विद्यालय और महाविद्यालय में अध्ययनरत बेटियों के लिए छात्रवृत्ति की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि मेधावी छात्राओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश की 50,000 मेधावी बेटियों को स्कूटी प्रदान करने की दिशा में भी सरकार आगे बढ़ रही है। आज उत्तर प्रदेश की बेटियां किसी से कम नहीं हैं। वे शिक्षा, रोजगार, प्रशासन, पुलिस और अन्य सभी क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। महिला सशक्तीकरण का प्रभाव प्रदेश की कानून-व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था में भी दिखाई दे रहा है। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश पुलिस में लगभग 10,000 महिला पुलिसकर्मी थीं। आज इनकी संख्या बढ़कर लगभग 45,000 हो चुकी है और आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ाई जाएगी। यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश की बेटियों को अवसर मिलने पर वे हर क्षेत्र में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर सकती हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को सुनिश्चित करने के साथ ही सरकार ने प्रदेश की 25 करोड़ जनता की सामूहिक शक्ति को विकास से जोड़ने का कार्य किया है। यही कारण है कि जो उत्तर प्रदेश कभी बीमारू राज्यों में गिना जाता था, आज वही उत्तर प्रदेश देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण ग्रोथ इंजन बनकर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने छात्राओं को संदेश देते हुए कहा कि जीवन में लक्ष्य स्पष्ट रखें, अच्छी सोच विकसित करें, तकनीक का सीमित और उपयोगी प्रयोग करें तथा पुस्तकों एवं ज्ञान से स्वयं को समृद्ध बनाएं। उन्होंने कहा कि आज की बेटियां आत्मविश्वास, सुरक्षा और स्वावलंबन के साथ आगे बढ़ रही हैं और विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
ज्ञातव्य है कि स्नेह बंधन के इस कार्यक्रम में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय मलिहाबाद, उच्च प्राथमिक विद्यालय महमूदपुर गोसाईगंज, भारत स्काउट एंड गाइड्स, द संस्कृति स्कूल, अटल आवासीय विद्यालय मोहनलालगंज, ए0पी0 सेन मेमोरियल गर्ल्स इंटर कॉलेज, लखनऊ पब्लिक कॉलेज ए-ब्लॉक राजाजीपुरम समेत अनेक विद्यालयों की छात्राएं मौजूद थीं।
मुख्यमंत्री जी को कार्यक्रम में अद्रिका, अर्पिता, अंशिका, जाह्नवी, अंकिता, कोमल, आरोही, खुशी, दिव्या, अनायसा, स्तुति, तंजीम फातिमा आदि छात्राओं ने तिलक लगाकर उनकी कलाई पर राखी बांधी। मुख्यमंत्री जी से शैल कुमारी, अनन्या, समृद्धि वर्मा, आयशा बानो, वैष्णवी पाल, दिव्या, अभिलाषा सिंह, आराध्या, श्रेयसी, सृजा, अग्रिमा, माही, याशिका, अनंशी, सुकैना आदि छात्राओं ने संवाद किया और उनसे प्रश्न भी किए। मुख्यमंत्री जी ने सभी प्रश्नों के उत्तर दिए।










