CBSE से जुड़े लाखों स्कूली छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी और राहत भरी खबर
नई दिल्ली-क्लास सिक्स के छात्रों को नहीं देनी होगी तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा
99 फीसदी स्कूलों में ढांचा तैयार, नीति को 2027 सत्र से लागू करने की तैयारी
नई दिल्ली (BNE) सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) से जुड़े लाखों स्कूली छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और सीबीएसई को स्पष्ट निर्देश दिया है कि कक्षा 7 के छात्रों को तीन-भाषा नीति (Three-Language Formula) से जो छूट प्रदान की गई है, उसका दायरा बढ़ाकर उसे मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों पर भी समान रूप से लागू किया जाए। इस फैसले के बाद अब कक्षा 6 में पढ़ रहे छात्रों को भी भविष्य में 10वीं बोर्ड में तीसरी भाषा की अनिवार्य परीक्षा के मानसिक दबाव से मुक्ति मिल सकेगी।
क्लास 7, 8 और 9 की तरह क्लास 6 को भी मिले समान छूट: सुप्रीम कोर्ट
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए यह अहम निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान केंद्र और सीबीएसई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी के समक्ष पीठ ने दो टूक कहा कि वर्तमान में कक्षा 6 में पढ़ रहे बच्चों को भी वही रियायत मिलनी चाहिए जो कक्षा 7, 8 और 9 के मौजूदा बैच को दी जा चुकी है। सीबीएसई द्वारा 29 जून को जारी परिपत्र के अनुसार, कक्षा 7 से 9 तक के छात्रों को कक्षा 10 में पहुंचने पर तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा देने की अनिवार्यता से पहले ही छूट दी गई थी, जिसे अब कक्षा 6 के लिए भी बढ़ा दिया गया है।
99 फीसदी स्कूलों में ढांचा तैयार, नीति को 2027 सत्र से लागू करने की तैयारी
पीठ ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि सॉलिसिटर जनरल के अनुसार लगभग 99 प्रतिशत स्कूलों ने तीसरी भाषा की नीति को अपना लिया है और आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएं जुटा ली हैं, जबकि केवल 1.2 प्रतिशत स्कूल ही इस प्रक्रिया में पीछे रहे हैं। इससे पहले 17 सितंबर को हुई सुनवाई में भी अदालत ने सीबीएसई को सुझाव दिया था कि कक्षा 6 के लिए अनिवार्य तीन भाषाएं पढ़ने के नियम को 2027 से शुरू होने वाले आगामी शैक्षणिक सत्र से सुचारू रूप से लागू करने पर विचार किया जाए। कोर्ट ने साफ किया कि बदलाव के इस दौर में वर्तमान बैच के छोटे बच्चों पर अचानक नियमों का अतिरिक्त बोझ डालना उचित नहीं होगा।









