
घरेलू खपत और आत्मनिर्भरता की राह- विजय गर्ग
इस समय जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए जा रहे शुल्क के डर से दुनिया के अधिकांश देश अमेरिका के सामने झुक कर उसकी व्यापार शर्तों को मानते हुए दिखाई दे रहे हैं, तब भारत अमेरिका के साथ कारोबार समझौते के तहत अपने करोड़ों किसानों और मछुआरों के हितों के मद्देनजर बिना झुके अपनी शर्तों के साथ अडिग है। ऐसे में पूरी दुनिया यह देख रही है कि भारत अमेरिका के ऊंचे शुल्क का अपनी मजबूत घरेलू खपत के हथियार से मुकाबला कर रहा है। बीते पंद्रह अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी में व्यापक सुधार की घोषणा की और उसके शीघ्र क्रियान्वयन का संकेत दिया। उम्मीद है कि इससे भारत में घरेलू खपत तेजी से बढ़ेगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए पचास फीसद शुल्क से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव विषय पर प्रकाशित वैश्विक रपटों में कहा जा रहा है कि भारत की घरेलू खपत मजबूत है। ऐसे में भारत की विकास दर में किसी चिंताजनक गिरावट की आशंका नहीं है। हाल ही में 13 अगस्त को वैश्विक रेटिंग एजंसी ‘एसएंडपी’ ने कहा कि अमेरिका द्वारा भारत पर पचास फीसद ऊंचे शुल्क लगाने से उसकी आर्थिक तरक्की पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। भारत की अर्थव्यवस्था बढ़ने की प्रवृत्ति बनी रहेगी। भारत की ‘सावरेन रेटिंग’ का नजरिया अभी भी सकारात्मक बना रहेगा। चूँकि भारत एक निर्यात उन्मुख अर्थव्यवस्था नहीं है, ऐसे में उसे फिलहाल शुल्क संबंधी चिंता करने की जरूरत नहीं है। ‘एसएंडपी’ का मानना है कि भारत की विकास दर चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 6.5 फीसद रहेगी। इसी तरह सात अगस्त को ‘मार्गन स्टेनली रिसर्च’ के एक विश्लेषण में भी भारत की घरेलू मांग मजबूत होने की बात कही गई है।
इस समय भारत की विकास दर को मजबूत आंतरिक घरेलू आधार मिला हुआ है। अब इसे लगातार आगे बढ़ाया जाना जरूरी है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की विकास दर 6.4 फीसद रहने का अनुमान लगाया है। यह भी कहा गया है कि भारत की विकास दर वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर से दोगुना से । भी अधिक रहने का अनुमान है। इसी तरह रेटिंग एजंसी ‘क्रिसिल’ ने अपनी रपट में कहा है कि भारत में घरेलू खपत में सुधार, भरपूर खाद्यान्न उत्पादन, बेहतर मानसून, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, महंगाई में कमी, सस्ते कर्ज और अन्य क्षेत्रों में सकारात्मक संकेतों | के कारण इस वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत की विकास दर 6.4 फीसद के स्तर पर होगी।
पिछले दिनों केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने लोकसभा में कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था का उज्वल केंद्र मानती हैं। अमेरिका ने जो शुल्क लगाए हैं, उन्हें ध्यान में रखते हुए सरकार किसानों, निर्यातकों और उद्योगों के हितों की रक्षा करेगी। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में तेज विकास के लिए वित्तीय, श्रम और कृषि सुधारों को लागू करने की डगर पर बढ़ना अब जरूरी है।
गौरतलब है कि हाल ही में प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक खुदरा महंगाई घटने से भी घरेलू बाजार में खपत को बढ़ावा मिल रहा है। खुदरा महंगाई घट कर आठ वर्षों के निचले स्तर पर आ गई है। सस्ते कर्ज से उद्योग कारोबार में उत्साह है। कृषि क्षेत्र में रेकार्ड उत्पादन, मानसून की
अच्छी प्रगति, पर्याप्त जलाशय स्तर और मजबूत खरीफ बुवाई से सकारात्मक परिदृश्य दिखाई दे रहा है। पिछले दिनों प्रधानमंत्री ने रोजगार मेले को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी, सबसे बड़ा लोकतंत्र, नवउद्यम, नवोन्मेष, तेजी से बढ़ता बाजार और सेवा क्षेत्र की ऊंचाइयां ऐसी शक्तियां हैं, जो दुनिया के देशों को भारत के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
खुदरा महंगाई का अनुमान आरबीआइ ने घटाया है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अनुमान 3.7 फीसद से घटा कर 3.1 फीसद कर दिया है। जून 2025 में खुदरा महंगाई घट कर 2.1 फीसद पर आ गई। मई में खुदरा महंगाई दर 2.82 फीसद रही। इतना ही नहीं, जून में थोक महंगाई दर भी 20 महीने में पहली बार ऋणात्मक हुई। यह घट कर 0.13 फीसद रह गई। खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों गिरावट के साथ-साथ विनिर्मित उत्पादों की लागत में भी कमी आई। मई थोक महंगाई दर 0.39 फीसद थी। जहां महंगाई में तेज गिरावट अर्थव्यवस्था के लिए काफी लाभप्रद है, वहीं भारत में सस्ते कर्ज से भी घरेलू उपचार में खपत और आर्थिक रफ्तार बढ़ेगी। विगत छह जून को रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए रेपो रेट में 50 आधार अंकों यानी 0.50 फीसद की कटौती का एलान किया। अब रेपो रेट छह फीसद से घट कर 5.5 फीसद हो गई है। इस वर्ष 2025 में फरवरी से अब तक लगातार तीसरी बार रेपो रेट में कटौती हुई है। इसके साथ ही रिजर्व बैंक ने नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में भी एक फीसद की बड़ी कटौती करते हुए इसे तीन फीसद पर ला दिया है।
निश्चित रूप से मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) भारत की वैश्विक व्यापार उपस्थिति को नया रूप देते हुए दिखाई दे रहे हैं। भारत द्वारा संयुक्त अरब अमीरात, आस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के साथ किए गए समझौते अहम हैं। भारत को संयुक्त अरब और आस्ट्रेलिया के साथ समझौते से लाभ हुआ है। यह भी महत्त्वपूर्ण है कि भारत और ब्रिटेन के बीच बहुप्रतीक्षित एफटीए पर 24 जुलाई को हस्ताक्षर हुए। इस परिप्रेक्ष्य में यह भी उल्लेखनीय है कि हाल ही में दस जुलाई को भारत में स्विटजरलैंड की राजदूत माया तिस्साफी ने कहा कि भारत और चार सदस्य देशों के बीच व्यापार समझौता अक्तूबर 2025 से लागू हो जाएगा। इन सबके साथ-साथ भारत-आसियान के बीच मौजूदा व्यापार समझौते की समीक्षा के लिए चर्चा जारी है। आसियान में ब्रुनोई, कांबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमा, फिलिपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं।
यह बात भी महत्त्वपूर्ण है कि घरेलू वृद्धि को सहारा देने के लिए अब नीतिगत समर्थन बढ़ाना जरूरी होगा। घरेलू खपत बढ़ाने के लिए स्वदेशी अपनाने और स्वदेशी उद्योग कारोबार को हरसंभव तरीके से प्रोत्साहित करना जरूरी होगा। उम्मीद करें कि सरकार घरेलू खपत के इजाफे के लिए की गई घोषणाओं के क्रियान्वयन की डगर पर तेजी से आगे बढ़ेगी। यह भी उम्मीद है कि सरकार अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से भारत पर थोपे गए पचास फीसद शुल्क की चुनौती से मुकाबला करने के लिए घरेलू बाजार की खपत को हर संभव तरीके से और मजबूत बनाते हुए विकास दर को ऊंचाई पर बनाए रखेगी।
विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब
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