UP-इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को दी ये बड़ी राहत
हाईकोर्ट ने दोनों को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दर्ज मामले में अग्रिम जमानत दे दी है
गिरफ्तारी पर लगी रोक… लेकिन कोर्ट ने रख दी ये शर्त!
प्रयागराज (BNE ): इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को यौन शोषण के गंभीर आरोपों में घिरे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी को बहुत बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने दोनों को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दर्ज मामले में अग्रिम जमानत दे दी है। इस अहम फैसले के बाद फिलहाल दोनों की गिरफ्तारी पर रोक लग गई है, जिससे उन्हें एक बड़ी कानूनी राहत मिली है।
न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की पीठ ने सुनाया फैसला
इस पूरे मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की पीठ कर रही थी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी की ओर से अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की गई थी। इस याचिका पर गहनता से विचार करते हुए और मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने दोनों आरोपियों को पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज इस मामले में अग्रिम जमानत देने का आदेश पारित किया।
कोर्ट की सख्त हिदायत, मीडिया में बयानबाजी पर लगाई पूरी तरह रोक
अग्रिम जमानत देने के साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले से जुड़े सभी पक्षों के लिए एक बेहद सख्त और स्पष्ट निर्देश भी जारी किया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और जमानत पाने वाले दोनों याचियों (स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद) को यह कड़ी हिदायत दी है कि वे इस संवेदनशील मामले को लेकर मीडिया के सामने किसी भी तरह की कोई बयानबाजी नहीं करेंगे। कोर्ट का यह आदेश इसलिए दिया गया है ताकि न्यायिक प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके और किसी भी तरह के अनावश्यक विवाद से बचा जा सके।










