
यूपी में तीसरा डिप्टी सीएम? चर्चा में बेबीरानी, असीम और भूपेंद्र चौधरी का नाम
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में योगी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. शुक्रवार को लखनऊ में बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक हुई जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और आरएसएस के सह कार्यवाह अरुण कुमार भी शामिल हुए। इस बैठक में मंत्रिमंडल विस्तार, संगठन के पुनर्गठन से लेकर कई मुद्दों पर चर्चा हुई लेकिन सबकी निगाहें मंत्रिमंडल विस्तार पर हैं।

सूत्रों के मुताबिक जातिगत समीकरण साधने और योगी सरकार की हैट्रिक के लिए मंत्रिमंडल में तीसरे डिप्टी सीएम की ताजपोशी हो सकती है।
फ़िलहाल, केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक डिप्टी सीएम हैं. जिसमे से एक ओबीसी और दूसरे ब्राह्मण वर्ग से हैं। लिहाजा, इस बार किसी दलित या जाट को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है जबकि मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन पुनर्गठन में ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने के लिए उन्हें भी समुचित जिम्मेदारी दी जा सकती है।
सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जो चर्चाएं हैं, उनमें कहा जा रहा है कि बीजेपी सरकार से लेकर मंत्रिमंडल तक जातिगत समीकरण साधने में जुटी है। तीसरे डिप्टी सीएम के लिए जिन प्रमुख चेहरों का नाम शामिल है, तीन नाम प्रमुख बताए जा रहे हैं.

पहला नाम है बेबी रानी मौर्य का, जो जाटव समुदाय से आती हैं। बेबी रानी मौर्य उत्तर प्रदेश की सियासत में दलित नेतृत्व का एक मजबूत चेहरा मानी जाती हैं। वह उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल रह चुकी हैं और लंबे समय से भाजपा से जुड़ी हैं। आगरा से आने वाली बेबी रानी मौर्य ने मेयर से लेकर राज्यपाल तक का राजनीतिक सफर तय किया है, जो उनके संगठनात्मक अनुभव को दर्शाता है। दलित समाज, खासकर जाटव वोटबैंक में उनकी पकड़ भाजपा के लिए बेहद अहम है। उत्तर प्रदेश में सामाजिक समीकरण साधने और महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिहाज से उनका कद लगातार बढ़ा है, जिससे वे पार्टी की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
दूसरा नाम हैं असीम अरुण का.. वह प्रदेश की राजनीति में प्रशासनिक अनुभव से उभरे एक प्रभावशाली चेहरा हैं। वे आईपीएस अधिकारी रहे हैं और भारतीय पुलिस सेवा में रहते हुए कानपुर समेत कई अहम जिलों में पुलिस कमिश्नर के तौर पर काम कर चुके हैं। नौकरी छोड़कर उन्होंने भाजपा जॉइन की और कन्नौज से विधायक बने। दलित समुदाय से आने वाले असीम अरुण कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक पकड़ के लिए जाने जाते हैं। उनकी छवि एक सख्त और टेक्नोक्रेट नेता की है, जिससे भाजपा को शहरी और युवा वोटर्स के बीच मजबूती मिलती है। सामाजिक समीकरण और सुशासन के एजेंडे में उनका रोल महत्वपूर्ण माना जाता है।

तीसरा नाम सामने आ रहा है भूपेंद्र सिंह चौधरी का वह उत्तर प्रदेश में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पश्चिमी यूपी के प्रमुख जाट चेहरे के रूप में जाने जाते हैं। वे मुरादाबाद क्षेत्र से आते हैं और संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। चौधरी ने प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और बूथ मैनेजमेंट को धार देने में अहम भूमिका निभाई। जाट समुदाय में उनकी प्रभावशाली पकड़ भाजपा के लिए खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बेहद महत्वपूर्ण है। यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए उनका कद और भी बढ़ गया है और उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करने की भी चर्चा है। लिहाजा पार्टी के लिए सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
सूत्र यह भी बता रहे हैं कि मंत्रिमंडल से कई मंत्रियों की छुट्टी भी हो सकती है। इतना ही नहीं करीब डेढ़ दशक से संगठन में बैठे कई पदाधिकारी को भी हटाया जा सकता है। उनकी जगह नए चेहरे को मौका मिल सकता है। दरअसल, यह मैसेज देने की कोशिश है कि बीजेपी में नीच लेवल तक का कार्यकर्ता भी महत्व रखता है।
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