संवाद कार्यक्रम में राज्यपाल जी ने मीडिया प्रतिनिधियों के साथ अपने अनुभवों एवं विभिन्न नवाचारों को साझा किया। शिक्षा के क्षेत्र में ‘केजी टू पीजी’ की अवधारणा पर बल देते हुए, उन्होंने कहा कि तीन वर्ष के बच्चों का आंगनवाड़ी में शत प्रतिशत नामांकन तथा छह वर्ष की आयु वाले सभी बच्चों का कक्षा एक में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने अपने गुजरात के अनुभव साझा करते हुए बताया कि वहां घर-घर सर्वेक्षण कर बच्चों के नामांकन को प्रोत्साहित किया जाता था तथा शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों को पुस्तकें वितरित की जाती थीं। जिन गांवों में महिलाओं की साक्षरता दर 35 प्रतिशत से कम थी, वहां बालिकाओं के नामांकन पर ‘नर्मदा बॉन्ड’ के अंतर्गत प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती थी। राज्यपाल जी ने बताया कि शिक्षा में ड्रॉपआउट दर कम करने के लिए विशेष प्रयास किए गए तथा गर्भवती महिलाओं के लिए स्थानीय पोषक आहार ‘सुखड़ी’ तैयार कर वितरित किया जाता था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ उच्च शिक्षा में 50 प्रतिशत नामांकन के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु समन्वित प्रयास किए जाने चाहिए।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राज्य विश्वविद्यालयों की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों ने नैक, एन0आई0आर0एफ0, क्यू0एस0 एशिया एवं क्यू0एस0 वर्ल्ड सहित विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों पर उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 के कोरोना काल में भी विश्वविद्यालयों के साथ ऑनलाइन समीक्षा बैठकें की जाती थीं तथा समय-समय पर नैक की तैयारियों की समीक्षा की जाती थी। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए निरंतर परिश्रम, सीखने की प्रवृत्ति और दूसरों को सुनने की आदत अत्यंत आवश्यक है। विश्वविद्यालयों को ऐसा वातावरण विकसित करना चाहिए जहां छात्र-छात्राओं की समस्याओं को सुना जाए और उनके समाधान हेतु कार्य किया जाए।
राज्यपाल जी ने बताया कि प्रदेश में उच्च शिक्षा की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है तथा विभिन्न राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर राज्य विश्वविद्यालयों की रैंकिंग बेहतर हुई है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में नियुक्तियां पूर्ण पारदर्शिता के साथ की जा रही हैं तथा कुलपतियों की नियुक्ति भी निष्पक्ष एवं विवादमुक्त रही है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल जी ने बताया कि प्रदेश में बालिकाओं एवं महिलाओं के लिए सर्वाइकल कैंसर से बचाव हेतु निःशुल्क टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत अब तक लगभग 50 हजार बालिकाओं का टीकाकरण किया जा चुका है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इण्डिया, पुणे के सहयोग से प्रदेश के आकांक्षी जनपदों में आदिवासी बेटियों के लिए एचपीवी वैक्सीन की तीन लाख निःशुल्क डोज भी उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि पुलिस कर्मियों की बेटियों का भी टीकाकरण कराया जा रहा है।
राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालयों को सामाजिक दायित्व निभाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्रत्येक विश्वविद्यालय को गांवों से जुड़ना चाहिए। इसी उद्देश्य से विश्वविद्यालयों द्वारा पांच-पांच गांव गोद लिए गए हैं, जहां स्वच्छता, वृक्षारोपण, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रतियोगिताओं एवं जनजागरूकता अभियानों का संचालन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालयों में निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों के बच्चों के लिए वस्त्र, साड़ियां एवं पुस्तकें एकत्र कर वितरित की जाती हैं। विश्वविद्यालयों के विकास में कुलपति, कुलसचिव तथा सभी कार्मिकों की सामूहिक जिम्मेदारी होती है और सभी के सहयोग से ही संस्थान आगे बढ़ते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालयों द्वारा राज्य स्थापना दिवस का भी आयोजन किया जाता है।
राज्यपाल जी ने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हेतु आयोजित ‘नैक मंथन’, ‘शिक्षा मंथन’ तथा वर्ल्ड रैंकिंग से संबंधित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोहों में प्राथमिक विद्यालय के विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाती है तथा उन्हें पुस्तकों के रूप में उपयोगी उपहार प्रदान किए जाते हैं। इन समारोहों में विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी जाती हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 56 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों को संसाधन-संपन्न बनाया जा चुका है।
राज्यपाल जी ने यह भी बताया कि दीक्षांत समारोहों में ऐसे व्यक्तियों को मानद उपाधि प्रदान करने की परंपरा प्रारंभ की गई है जो समाज में धरातल पर उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं, जैसे कारीगर एवं हस्तशिल्पी।
उन्होंने जन भवन द्वारा आयोजित साइकिल रैली के माध्यम से कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय मेें स्वच्छता, वृक्षारोपण एवं संवाद कार्यक्रमों के आयोजन की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों में सभी अधिकारी और कर्मचारी जातिगत या पदगत सीमाओं से ऊपर उठकर एकजुट होकर कार्य कर रहे हैं, जो जनसेवा की उत्कृष्ट मिसाल है।
इस अवसर पर विशेष कार्याधिकारी (शिक्षा) डॉ. पंकज एल. जानी ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की स्थिति तथा राज्य विश्वविद्यालयों में गुणात्मक शिक्षा के विकास में राज्यपाल महोदया के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा की चर्चा की। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में 18 विश्वविद्यालयों ने नैक मूल्यांकन में ‘ए’ अथवा उससे ऊपर की रैंकिंग प्राप्त की है, जिनमें 9 विश्वविद्यालयों को ‘ए प्लस प्लस’, 4 को ‘ए प्लस’ तथा 5 विश्वविद्यालयों को ‘ए’ श्रेणी प्राप्त हुई है।
उन्होंने बताया कि एन0आई0आर0एफ0 की 11 श्रेणियों में प्रदेश के 14 राज्य विश्वविद्यालयों को स्थान प्राप्त हुआ है। इसके अतिरिक्त क्यू0एस0 एशिया रैंकिंग में प्रदेश के 7 विश्वविद्यालयों को स्थान प्राप्त हुआ है, जबकि क्यू0एस0 वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भी प्रदेश के 2 विश्वविद्यालयों को स्थान मिला है। साथ ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की श्रेणी-1 में प्रदेश के 6 राज्य विश्वविद्यालयों को दर्जा प्राप्त हुआ है।
विशेष कार्याधिकारी, श्री राज्यपाल (अपर मुख्य सचिव स्तर) डॉ. सुधीर महादेव बोबडे ने राज्यपाल जी की प्रेरणा से स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए गए कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में टीबी उन्मूलन के लिए व्यापक अभियान चलाया गया, जिसके अंतर्गत लगभग चार लाख टीबी मरीजों को गोद लिया गया है। उन्होंने बताया कि महिलाओं एवं बालिकाओं को सर्वाइकल कैंसर से बचाव हेतु एचपीवी टीकाकरण का अभियान डॉ0 राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ से प्रारंभ किया गया।
संवाद कार्यक्रम में मीडिया प्रतिनिधियों ने भी राज्यपाल जी के साथ अपने विचार साझा किए तथा विभिन्न विषयों पर चर्चा की। इस दौरान मीडिया प्रतिनिधियों ने राज्यपाल जी से आंगनवाड़ी, ‘केजी टू पीजी’ शिक्षा व्यवस्था, महिला सशक्तिकरण, शिक्षक नियुक्ति, उत्तर एवं दक्षिण भारत में शिक्षा के स्तर, बाल विवाह, टीन एज प्रेग्नेंसी तथा राज्य सरकार के साथ समन्वय जैसे विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका राज्यपाल जी ने सहजता एवं विस्तार से उत्तर दिया।
राज्यपाल जी ने कहा कि आंगनवाड़ी भर्ती, शिक्षक नियुक्ति तथा अन्य चयन प्रक्रियाएं पूर्णतः पारदर्शी एवं योग्यता आधारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया जितनी अधिक सरल और पारदर्शी होगी, उतना ही बेहतर परिणाम सामने आएगा।
एक पत्रकार द्वारा स्थानीय उत्पादों को पर्याप्त बाजार न मिलने के संबंध में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में राज्यपाल जी ने कहा कि स्थानीय उत्पादों की व्यापक पहचान के लिए विभिन्न राज्यों में उनकी प्रदर्शनियां आयोजित की जानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि इन उत्पादों को भारत मंडपम नई दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों में प्रदर्शित किया जाए, जिससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर बाजार मिल सके।
महिला सशक्तिकरण के विषय में उन्होंने कहा कि नारी स्वयं प्रेरणा का स्वरूप है, किंतु कई बार वह अपनी शक्ति को पहचान नहीं पाती। जब वह अपनी क्षमता को पहचान लेती है तो वह ‘नारायणी’ के रूप में समाज का नेतृत्व करने लगती है। उन्होंने बताया कि आगामी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जन भवन में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को आमंत्रित कर सम्मानित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि महिलाएं एक साथ अनेक भूमिकाओं का निर्वहन करती हैं, इसलिए जो महिलाएं समाज में आगे बढ़ रही हैं, उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने जेंडर बजट की भी चर्चा करते हुए कहा कि महिलाओं के कल्याण के लिए निर्धारित संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं की समस्याओं को संवाद के माध्यम से समझना चाहिए तथा उन्हें सफल और कार्यरत महिलाओं के साथ जोड़कर मार्गदर्शन प्रदान किया जाना चाहिए।
शिक्षकों एवं आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों पर अतिरिक्त कार्यभार के संबंध में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में राज्यपाल जी ने कहा कि उनकी समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त कार्य यदि लिया जाए तो वह अवकाश के समय में लिया जाए तथा उसके लिए उचित पारिश्रमिक भी दिया जाना चाहिए।
उत्तर एवं दक्षिण भारत में शिक्षा के स्तर के विषय में उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में पहले शिक्षा के प्रति जागरूकता अपेक्षाकृत कम थी, किंतु अब स्थिति में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं, जहां लगभग 80 प्रतिशत पदक छात्राओं को प्राप्त हो रहे हैं।
बाल विवाह एवं दहेज प्रथा जैसी सामाजिक समस्याओं पर उन्होंने जागरूकता को अत्यंत आवश्यक बताते हुए कहा कि समाज के प्रबुद्ध एवं जिम्मेदार लोगों को इन कुप्रथाओं के विरुद्ध आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं में शिक्षा का प्रसार और जागरूकता ही इन समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम है। साथ ही सामूहिक विवाह को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर राज्यपाल जी द्वारा मीडिया प्रतिनिधियों को जन भवन द्वारा प्रकाशित पुस्तकें हमारा राजभवन, राजभवन बैंड, टीबी मुक्त भारत, आंगनबाड़ी मेरी आत्मा, चुनौतियां मुझे पसंद है, लोकहित के मुखर स्वर तथा परिवर्तन की सुगंध भेंट स्वरूप प्रदान की गईं।
इस अवसर पर ए0डी0जी0, पी0आई0बी0 गुवाहाटी कृपा शंकर यादव, निदेशक पी0आई0बी0, लखनऊ दिलीप कुमार शुक्ला, सुश्री करिश्मा पंत सहायक निदेशक, पी0आई0बी0 बेंगलुरू सहित कर्नाटक एवं त्रिपुरा राज्य के विभिन्न मीडिया संस्थानों के पत्रकार बन्धु उपस्थित थे।