कॉमनवेल्थ गेम्स-त्रिपुरा की 23 साल के जूडोका अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स में इतिहास रच दिया।
भारत को 15 मिनट में दो स्वर्ण पदक, अस्मिता-हर्ष ने गोल्ड मेडल जीत रचा इतिहास
ग्लासगो(AGENCY )भारत ने ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में शुक्रवार को 15 मिनट के अंदर दो स्वर्ण पदक जीत लिए। भारतय जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने रात 8:56 बजे जूडो के वूमंस 48 किग्रा वेट कैटेगरी के फाइनल में कनाडा की खिलाड़ी हेइडी क्वाच को 2-1 से हराया। उसके बाद 9:11 बजे जूडो खिलाड़ी हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किग्रा में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज को 10-0 से हराया और दूसरा गोल्ड दिलाया। त्रिपुरा की 23 साल के जूडोका अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स में इतिहास रच दिया। महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग के फाइनल मुकाबले में शानदार वापसी करते हुए अस्मिता ने कनाडा की हेडी क्वाच को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इसके साथ ही अस्मिता कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में जूडो में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाली खिलाड़ी बन गई हैं। फाइनल मुकाबले की शुरुआत अस्मिता के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रही। कनाडाई प्रतिद्वंद्वी हेडी क्वाच ने शुरुआत में ही एक युको अंक हासिल कर लिया और अस्मिता को एक शिदो पेनल्टी भी झेलनी पड़ी। हालांकि, भारतीय खिलाड़ी ने हिम्मत नहीं हारी और आक्रामक रुख अपनाते हुए तय समय के मध्य में 1-1 की बराबरी कर ली। इसके बाद दोनों ही खिलाड़ी निर्धारित समय में निर्णायक अंक नहीं बना सकीं, जिससे मुकाबला गोल्डन स्कोर में चला गया। अत्यधिक दबाव वाले इस गोल्डन स्कोर पीरियड में अस्मिता ने अपनी एकाग्रता बनाए रखी और सही मौके का इंतजार किया।
एक बेहतरीन और सटीक आक्रमण करते हुए अस्मिता ने दूसरा युको अंक हासिल कर मुकाबला और गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। इससे पहले उन्होंने स्कॉटलैंड की ईवा इविंग और समर शॉ को शिकस्त देकर फाइनल में जगह बनाई थी। वहीं, 23 साल के हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज को वाजा-अरी (10-0) से हराया। काट्ज ने आक्रमक शुरुआत की, लेकिन हर्ष ने शानदार बचाव किया और बढ़त नहीं दी। एक मौके पर ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने उन्हें पिन करने की कोशिश की, लेकिन हर्ष उससे बाहर निकल गए और जवाबी दांव भी लगाया। चार मिनट के मुकाबले में दोनों खिलाडिय़ों को लंबे समय तक कोई अंक नहीं मिला। मैच के आखिरी मिनट में हर्ष ने निर्णायक दांव खेलते हुए वाजा-अरी हासिल की और 10-0 की बढ़त बना ली। आखिरी में हर्ष ने प्रतिद्वंद्वी को वापसी का मौका नहीं दिया और गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया।









