नई दिल्ली- कनॉट प्लेस को समय से पहले बंद करने के सरकारी फरमान पर बरसी सीजेपी और आप
क्षेत्र के आसपास उत्पन्न परिस्थितियों और सुरक्षा एजेंसियों की सलाह को देखते हुए यह कदम उठाया गया
इस फैसले के तुरंत बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।
नई दिल्ली.(BNE)दिल्ली के जंतर मंतर में चल रहे धरना प्रदर्शन को लेकर गुरुवार को कनॉट प्लेस के बाजारों, कार्यालयों और रेस्तरां को शाम 6:30 बजे तक बंद करने की एडवाइजरी जारी होने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया। न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (एनडीटीए) की ओर से जारी इस सलाह के बाद विपक्षी दलों और आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सीजेपी ने केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। दूसरी ओर व्यापारियों के संगठन ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय केवल एहतियाती कदम के तौर पर लिया गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से लोगों और कारोबार को सुरक्षित रखा जा सके।
गुरुवार शाम जारी एडवाइजरी में कनॉट प्लेस के सभी दुकानदारों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, कार्यालयों और रेस्तरां संचालकों से अनुरोध किया गया कि वे शाम 6:30 बजे तक अपने प्रतिष्ठान बंद कर दें। एडवाइजरी में कहा गया कि क्षेत्र के आसपास उत्पन्न परिस्थितियों और सुरक्षा एजेंसियों की सलाह को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। व्यापारियों से निर्देशों का पालन करने और प्रशासन के साथ सहयोग करने की अपील भी की गई।
इस फैसले के तुरंत बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। छात्र आंदोलन का समर्थन कर रही सीजेपी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर सरकार क्या करना चाहती है और कनॉट प्लेस की सभी दुकानों को समय से पहले बंद कराने की जरूरत क्यों पड़ी। संगठन ने इसे मौजूदा हालात से जोड़ते हुए सरकार के इरादों पर सवाल खड़े किए।
आम आदमी पार्टी ने भी इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर एडवाइजरी साझा करते हुए कहा कि कनॉट प्लेस में भारी सुरक्षा व्यवस्था और बड़ी संख्या में एंबुलेंस तैनात किए जाने से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने पूछा कि दुकानों को समय से पहले बंद करने की आवश्यकता क्यों महसूस हुई और क्या प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ फिर से सख्त कार्रवाई की आशंका है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई।
उधर न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन ने इस पूरे विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि एडवाइजरी किसी राजनीतिक कारण से नहीं बल्कि केवल सुरक्षा के मद्देनजर जारी की गई है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अतुल भार्गव ने बताया कि न्यू दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की ओर से टेलीफोन पर मिली सलाह के बाद यह निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि कनॉट प्लेस में सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक भीड़ देखी जा रही थी और बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। ऐसे में लोगों की सुरक्षा और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को किसी भी संभावित नुकसान से बचाने के लिए एहतियाती कदम उठाया गया।
अतुल भार्गव ने यह भी स्पष्ट किया कि कनॉट प्लेस में लगभग 1,400 दुकानें और एक हजार से अधिक छोटे-बड़े कार्यालय संचालित होते हैं। यदि किसी कारण से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है तो इसका सीधा असर व्यापारियों और आम लोगों पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अब तक किसी प्रकार की संपत्ति को नुकसान पहुंचने की सूचना नहीं मिली है और एसोसिएशन का उद्देश्य केवल जोखिम को कम करना था।
एडवाइजरी में यह भी उल्लेख किया गया कि कनॉट प्लेस के आसपास की स्थिति को देखते हुए सभी प्रतिष्ठानों को निर्धारित समय से पहले बंद करना आवश्यक है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना, संपत्ति के नुकसान या लोगों के घायल होने जैसी परिस्थितियों से बचा जा सके। व्यापारियों से प्रशासन के निर्देशों का पूर्ण पालन करने की अपील की गई।
दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से ही माहौल संवेदनशील बना हुआ है। बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती, बैरिकेडिंग और सुरक्षा प्रबंधों के बीच कनॉट प्लेस को समय से पहले बंद कराने का फैसला चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर विपक्ष इसे सरकार की मंशा से जोड़कर सवाल उठा रहा है, वहीं प्रशासन और व्यापारी संगठन इसे पूरी तरह एहतियाती और सुरक्षा संबंधी कदम बता रहे हैं।









