नई दिल्ली-सरकार से बातचीत के लिए कॉकरोच पार्टी ने रखी ये शर्त
‘हम नड्डा के दफ्तर नहीं जाएंगे, वो जंतर-मंतर आएं’
नई दिल्ली(BNE )-दिल्ली के जंतर मंतर में चल रहे कॉकरोच पार्टी के धरना प्रदर्शन में दिनी दिन लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अभी तक कॉकरोच पार्टी और सरकार के बीच बातचीत को लेकर किसी तरह की सहमति नहीं बन सकी है।
सरकार जहां लगातार आंदोलनकारियों से वार्ता के लिए आगे आने की अपील कर रही है, वहीं CJP ने स्पष्ट कर दिया है कि बातचीत उनकी शर्तों पर ही होगी। इसी बीच संगठन ने शुक्रवार को देशव्यापी प्रदर्शन करने का भी ऐलान किया है।
CJP के प्रमुख नेता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के आवास या मंत्रालय में किसी भी तरह की बैठक स्वीकार नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में समाधान चाहती है तो बातचीत जंतर-मंतर या दोनों पक्षों की सहमति से तय किसी तटस्थ स्थान पर आयोजित की जाए।
रांका ने अपने बयान में कहा कि केवल औपचारिक बैठकें या आश्वासन अब स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उनका कहना है कि सरकार को बातचीत के दौरान आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों पर स्पष्ट रुख अपनाना होगा। यदि सभी मांगें तुरंत पूरी नहीं की जा सकतीं, तो उन्हें पूरा करने की समय-सीमा सार्वजनिक रूप से बताई जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल बातचीत के नाम पर समय बिताने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
इससे पहले केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने जानकारी दी थी कि सरकार की ओर से CJP प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए अब तक चार औपचारिक प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों और युवाओं के साथ हर मुद्दे पर चर्चा करने के लिए पूरी तरह तैयार है और आंदोलनकारी अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी समय वार्ता में शामिल हो सकते हैं।
जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि बैठक स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के आधिकारिक कार्यालय या उनके सरकारी आवास पर आयोजित की जा सकती है। उनके मुताबिक सरकार बातचीत के स्थान को प्रतिष्ठा का विषय नहीं मानती और उद्देश्य केवल छात्रों के हित में समाधान निकालना है।
उधर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी दोहराया कि केंद्र सरकार संवाद के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी उनके आधिकारिक कार्यालय या आवास पर आकर बातचीत कर सकते हैं और सरकार सभी मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा करने के लिए तैयार है। हालांकि, CJP की ओर से फिलहाल इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया है, जिससे दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बरकरार है।










