समाज कल्याण विभाग की पहल, सर्वोदय विद्यालयों और छात्रावासों में हर पेड़ की होगी डिजिटल पहचान*
*मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हरित विकास संकल्प को मिला नया आयाम*
*पेड़ों को मिलेगा संस्थान की संपत्ति का दर्जा, पर्यावरण संरक्षण का आदर्श मॉडल बनेंगे संस्थान*
*लखनऊ, (BNE)* मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास के विजन को आगे बढ़ाते हुए समाज कल्याण विभाग ने एक अभिनव पहल की शुरुआत की है। विभाग ने अपने सभी जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों, आश्रम पद्धति विद्यालयों, छात्रावासों एवं अन्य संस्थानों में मौजूद पेड़ों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए वृक्ष परिसंपत्ति प्रबंधन व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इस व्यवस्था के तहत प्रत्येक पेड़ को एक यूनिक पहचान संख्या प्रदान की जाएगी, जिससे उसकी निगरानी, संरक्षण और प्रबंधन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। इस संबंध में प्रमुख सचिव समाज कल्याण अनुराग यादव ने आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
*हर पेड़ का तैयार होगा डिजिटल डाटा बैंक*
नई व्यवस्था के अंतर्गत विभागीय संस्थानों में मौजूद सभी पेड़ों का व्यापक सर्वेक्षण कराया जाएगा। प्रत्येक पेड़ को एक विशेष पहचान संख्या दी जाएगी और उसकी प्रजाति, स्थान, अनुमानित आयु तथा वर्तमान स्थिति का पूरा विवरण वृक्ष परिसंपत्ति पंजिका में दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही सभी पेड़ों की फोटो लेकर उनका डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार किया जाएगा। इससे समय-समय पर उनकी स्थिति का आकलन करने और आवश्यक संरक्षण उपाय करने में सुविधा मिलेगी।
*पेड़ों को मिलेगा संस्थान की संपत्ति का दर्जा*
समाज कल्याण विभाग ने स्पष्ट किया है कि संस्थानों में मौजूद सभी पेड़ों को अब परिसंपत्ति के रूप में दर्ज किया जाएगा। किसी भी पेड़ की कटाई अथवा बड़े स्तर पर छंटाई बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के नहीं की जा सकेगी। साथ ही प्रत्येक वर्ष इन पेड़ों का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा, ताकि उनकी सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। यह व्यवस्था हरित संपदा को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
*पर्यावरण संरक्षण का आदर्श मॉडल बनेंगे संस्थान*
समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि पेड़ हमारी अमूल्य प्राकृतिक धरोहर हैं और उनका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है। इसी कड़ी में विभागीय संस्थानों में वृक्ष परिसंपत्ति प्रबंधन व्यवस्था लागू की जा रही है। इससे न केवल पेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि विद्यार्थियों और समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।
समाज कल्याण विभाग का प्रयास है कि उसके विद्यालय, छात्रावास और अन्य संस्थान शिक्षा व सामाजिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के भी आदर्श केंद्र बनें। यह पहल प्रदेश में हरित धरोहर के संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं दूरगामी कदम साबित होगी।