मंत्री ने लिखा- अत्यंत खेद के साथ आपका ध्यान रोमा स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुई अव्यवस्था की तरफ आकर्षित करना चाहता हूं। मुझे शाम 5:30 बजे मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया था। मैं तय समय पर पहुंच भी गया, लेकिन वहां न तो समय का पालन हुआ और न ही शिष्टाचार दिखा।
मुख्य आयोजक एसडीएम वैशाली मेरे पहुंचने के करीब 15 मिनट बाद आईं, उसके बाद एडीएम पहुंचे। मैंने 45 मिनट तक कार्यक्रम शुरू होने का इंतजार किया। इस दौरान मंच से बार-बार कहा जाता रहा कि कार्यक्रम डीएम के आने के बाद शुरू होगा जबकि यह साफ नहीं था कि डीएम कब आएंगे। इससे स्थिति असहज हो गई।
मजबूरी में मुझे कार्यक्रम छोड़कर जाना पड़ा। एक लोक सेवक के रूप में सभी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से समय की पाबंदी और अनुशासन सीखना चाहिए।
भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों में समय का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। अनुशासन ही प्रशासन की बुनियाद है। मैं अपनी टीम से भी वही समयबद्धता चाहता हूं, जिसका पालन मैं खुद करता हूं।
भाजपा जिलाध्यक्ष वीर सिंह भदौरिया ने भी इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया दी है उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट एक चिट्ठी में लिखा है गत दिवस रोमा स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रदेश सरकार के माननीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री असीम अरुण जी के साथ जो व्यवहार और अव्यवस्था सामने आई, वह अत्यंत चिंताजनक और अनुचित है। एक अनुशासित और कर्मठ जनप्रतिनिधि के रूप में माननीय मंत्री जी निर्धारित समय पर कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित थे, लेकिन स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों (एसडीएम, एडीएम एवं अन्य) की भारी देरी और वहां व्याप्त कुप्रबंधन के कारण उन्हें लगभग 45 मिनट तक प्रतीक्षा करनी पड़ी। एक लोक सेवक और जन-प्रतिनिधि का समय क्षेत्र की जनता के लिए समर्पित होता है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी की कार्यशैली पूरे देश के लिए समयबद्धता और कड़े अनुशासन की मिसाल है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन की यह ढिलाई और गैर-जिम्मेदाराना रवैया शासन की मंशा के बिल्कुल विपरीत है।
मैं भारतीय जनता पार्टी, जिला इकाई कन्नौज की ओर से यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि इस पूरी घटना की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की है। जिला प्रशासन को इस घोर लापरवाही पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए और अपनी ओर से आधिकारिक रूप से खेद प्रकट करना चाहिए। किसी भी वरिष्ठ जनसेवक को इस प्रकार उपेक्षित महसूस कराना न केवल व्यक्तिगत अनादर है, बल्कि ये जनपद की प्रशासनिक साख को भी धूमिल करता है।
हम जिला प्रशासन से यह अपेक्षा करते हैं कि भविष्य में आयोजित होने वाले समस्त कार्यक्रमों में समय की गरिमा का पूर्ण ध्यान रखा जाए। प्रशासन की नींव अनुशासन और जवाबदेही पर टिकी होती है, और हम आशा करते हैं कि भविष्य में ऐसी किसी भी पुनरावृत्ति (दोहराव) की गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी।
प्रशासन का पक्ष
इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक सफाई तो नही आयी लेकिन स्थिति साफ करने के लिए कुछ तथ्य जरूर उपलब्ध हुए। दरअसल यह कार्यक्रम 5.30 पर रखा गया था किंतु विदेश से कुछ मेहमानों को लेसर प्रणाली के जरिये कन्नौज के लोगों से बात करनी थी। प्रकाश होने के कारण ट्रायल में यह पाया गया कि कार्यक्रम एक घंटा आगे बढ़ाना ठीक होगा।
इस समय परिवर्तन की सूचना जिला पर्यटन अधिकारी डॉ. मकबूल द्वारा मंत्री असीम अरुण के अधिकृत प्रतिनिधि विवेक पाठक को दी गयी और उन्होंने मंत्री जी तक संदेश पहुँचाने का आश्वासन दिया। किन्तु यह संदेश उन तक नही पहुँचा क्यो यह तो पाठक ही जाने।
और मंत्री लाव लश्कर के साथ पूर्व वाले समय पर ही पहुंच गए।
किसी की भी परवाह न करने वाली एसडीएम सदर को लेकर कल फूटा गुस्सा कोई नया नही है समूचे कन्नौज के मन मे उनकी कार्यशैली के प्रति पल बढ़ रहा आक्रोश के ज्वालामुखी को कभी न कभी तो फटना ही था कई महीनों से मौके का इंतज़ार कर रहे अधिवकाओं ने कल की घटना को हवा दी और मामले का बिस्फोट हो गया।
स्वयम मंत्री जी अनेक बार एसडीएम सदर को हटाने की जीतोड़ कोशिश कर चुके है पर एसएआर के चलते उन्हें हटा पाना फिलहाल राज्य सरकार के बूते की बात नही। जाहिर है ऐसे में लगभग निरंकुश अफसर किसी प्रोटोकॉल की परवाह नही करते। तब ये घटना तो होनी ही थी।