
*अमेरिका के साथ प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौता किसान-मजदूर विरोधी नीतियों की कड़ी*
*गांव-गांव विरोध कार्यक्रम, मोदी-ट्रंप के पुतले दहन की अपील*
*चारों लेबर कोड, बिजली व बीज विधेयकों के विरोध में 12 फरवरी की देशव्यापी आम हड़ताल में केकेयू का समर्थन एवं साथ देने का ऐलान*
क्रांतिकारी किसान यूनियन (केकेयू) की राष्ट्रीय कमेटी की विस्तारित ऑनलाइन बैठक में अमेरिका के साथ प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते के प्रारूप पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। बैठक में इसे संघ-भाजपा सरकार की किसान-मजदूर विरोधी आर्थिक नीतियों की निरंतरता बताया गया, जो देश की कृषि, श्रम और सार्वजनिक ढांचे को कमजोर करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दर्शन पाल ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा सहित देश के अधिकांश किसान संगठन इस समझौते के मसौदे से आक्रोशित हैं। करोड़ों किसानों, खेत मजदूरों और छोटे उत्पादकों के हितों को नजरअंदाज कर केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय दबाव में नीतिगत समझौते कर रही है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के व्यापार समझौते देश की खाद्य सुरक्षा, बीज संप्रभुता और कृषि बाजारों पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों का नियंत्रण बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पहले से ही किसान बढ़ती लागत, गिरते दाम, कर्ज़ और प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहे हैं। ऐसे समय में—
संशोधित बिजली विधेयक के माध्यम से बिजली क्षेत्र के निजीकरण,
बीज विधेयक के जरिए बीज पर कॉरपोरेट नियंत्रण,
वीबी-जीरामजी बिल तथा
कृषि विपणन की राष्ट्रीय नीति
जैसे कदम किसानों की आत्मनिर्भरता को खत्म कर उन्हें कंपनियों पर निर्भर बनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं।
यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि इन नीतियों को लागू किया गया तो खेती की लागत बढ़ेगी, सार्वजनिक वितरण प्रणाली कमजोर होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इससे छोटे और सीमांत किसान खेती छोड़ने को मजबूर होंगे तथा कृषि क्षेत्र में कॉरपोरेट एकाधिकार तेज होगा।
बैठक में निर्णय लिया गया कि पंजाब सहित सभी राज्यों में व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। गांव-गांव सभाएं, पदयात्राएं और विरोध कार्यक्रम आयोजित कर किसानों को इस समझौते के संभावित दुष्परिणामों से अवगत कराया जाएगा। केकेयू ने इस समझौते को किसानों पर “आर्थिक-साम्राज्यवादी हमला” बताते हुए मोदी-ट्रंप के पुतले दहन के कार्यक्रम आयोजित करने की अपील की।
यूनियन ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि देश के किसानों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
केकेयू ने यह भी घोषणा की कि वह चारों लेबर कोड, संशोधित बिजली विधेयक, बीज विधेयक और जनविरोधी आर्थिक नीतियों के खिलाफ 12 फरवरी को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की अपील पर आयोजित देशव्यापी आम हड़ताल का पूर्ण समर्थन करेगी। यूनियन के कार्यकर्ता किसानों, खेत मजदूरों और श्रमिक संगठनों के साथ संयुक्त रूप से सड़कों पर उतरकर विरोध-प्रदर्शन में भाग लेंगे।
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि यदि सरकार ने व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए अथवा संसद में किसान-मजदूर विरोधी विधेयक पारित कराने की कोशिश की, तो देशभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
बैठक में विभिन्न राज्यों से प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें प्रमुख रूप से पंजाब से गुरमीत सिंह महिमा, अवतार सिंह; हरियाणा से सतीश आजाद; दिल्ली से अर्जुन प्रसाद; उत्तर प्रदेश से शशिकांत अलीगढ़, रामनयन यादव, नगेन्द्र चौधरी, गरीब राजभर, तेज नारायण सिंह, सुरेशचंद्र गांधी; बिहार से मनोज कुमार, संजय श्याम; झारखंड से अशोक पाल; छत्तीसगढ़ से रमाकांत बंजारे, भोला सिंह, अंजोर जोशी; राजस्थान से बजरंग लाल, पोकर सिंह, रामबिलास एवं करणीराम सहित अन्य साथियों ने अपने विचार रखे।
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