संभल-पुलिस पर FIR का आदेश देने वाले जज को हटाने पर भड़के वकील; कोर्ट के बाहर प्रदर्शन
वकीलों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए ‘सीजेएम साहब को वापस लाओ’ की मांग बुलंद की
वकीलों ने बताया लोकतंत्र की हत्या, आंदोलन की चेतावनी
संभल (BNE ): संभल हिंसा मामले में एएसपी अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने वाले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर के अचानक हुए तबादले ने न्यायपालिका और पुलिस प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी है। बुधवार को इस तबादले के विरोध में वकीलों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने कोर्ट परिसर के बाहर जमकर प्रदर्शन किया। वकीलों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए ‘सीजेएम साहब को वापस लाओ’ की मांग बुलंद की। वकीलों का सीधा आरोप है कि पुलिस के आला अधिकारियों पर एफआईआर का आदेश देने की सजा जज को तबादले के रूप में मिली है।
पुलिस पर कार्रवाई के आदेश के बाद रातों-रात ट्रांसफर
सीजेएम विभांशु सुधीर वही न्यायिक अधिकारी हैं, जिन्होंने हाल ही में संभल हिंसा मामले में एएसपी अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने का ऐतिहासिक आदेश दिया था। यह आदेश 9 जनवरी 2026 को दिया गया था और 12 जनवरी को सार्वजनिक हुआ था। पुलिस प्रशासन को एफआईआर दर्ज करने के लिए एक निश्चित समय-सीमा दी गई थी, जो 22 जनवरी को खत्म होने वाली थी। लेकिन इस समय-सीमा के खत्म होने से ठीक पहले, 20 जनवरी की रात को सीजेएम का तबादला सुल्तानपुर कर दिया गया। वकीलों ने इस टाइमिंग पर गंभीर सवाल उठाए हैं और इसे पुलिसिया दबाव का परिणाम बताया है।
वकीलों ने बताया लोकतंत्र की हत्या, आंदोलन की चेतावनी
आज चंदौसी में प्रदर्शन कर रहे वकीलों ने कहा कि आलम नामक युवक की मौत के मामले में पुलिस पर कार्रवाई का आदेश देने के कारण ही जज को निशाना बनाया गया है। यह पूरा विवाद 24 नवंबर 2024 की संभल हिंसा से जुड़ा है, जिसमें यामीन नामक व्यक्ति ने पुलिस पर अपने बेटे को तीन गोलियां मारने का आरोप लगाया था। वकीलों का कहना है कि जब न्यायपालिका पुलिस की मनमानी पर नकेल कसने की कोशिश करती है, तो इस तरह के तबादले न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं। वकीलों ने चेतावनी दी है कि अगर यह फैसला वापस नहीं लिया गया तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
पुलिस महकमे में मचा रखी थी खलबली
18 सितंबर 2025 को कार्यभार संभालने वाले विभांशु सुधीर ने अपने कुछ ही महीनों के कार्यकाल में कई सख्त फैसले लिए थे। संभल हिंसा मामले के अलावा, उन्होंने इससे पहले एक फर्जी एनकाउंटर मामले में भी 13 पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज करने का कड़ा आदेश दिया था। पुलिस प्रशासन ने इन आदेशों पर बगावती रुख अपनाते हुए एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया था और हाईकोर्ट जाने की बात कही थी। अब विभांशु सुधीर की जगह आदित्य सिंह को संभल का नया मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया है, लेकिन पुराने सीजेएम के जाने पर सियासत और विरोध दोनों गर्मा गए हैं।










