
शादी विकल्प, जीवन मिशन: आज की लड़कियों की सोच
डॉ विजय गर्ग
आज के समय में लड़कियों का विवाह और जीवन-लक्ष्य को लेकर सोच में स्पष्ट बदलाव देखने को मिल रहा है। पारंपरिक रूढ़ियों के साथ आधुनिकता, शिक्षा, करियर और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी कई नई प्रवृत्तियाँ उभर रही हैं—जो सिर्फ़ शादी को जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं मानतीं।
1. शिक्षा, करियर और व्यक्तिगत लक्ष्य अब प्राथमिकता
आज की लड़कियाँ पहले शिक्षा और करियर को महत्व देती हैं।
शादी कई के लिए पहले प्राथमिकता नहीं रह गई है, बल्कि यह जीवन के कई संभावित विकल्पों में से एक बन गई है। विद्यार्थी खासकर उच्च शिक्षा पूरी करना, नौकरी में स्थापित होना, यात्रा और आत्मानुभव को प्राथमिकता देते हैं। उदाहरण के तौर पर, भारत में युवतियाँ अविवाहित रहने को भी विकल्प मान रही हैं क्योंकि शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता उन्हें पारंपरिक पथ से आगे बढ़ना सिखा रही है।
2. शादी अब ज़रूरी “लक्ष्य” नहीं—एक विकल्प है
परंपरागत समाज में “शादी ही जीवन का उद्देश्य” जैसी सोच आज भी कहीं-न-कहीं मौजूद है, लेकिन इससे हटकर लड़कियाँ अब सवाल उठाती हैं:
“कब और क्यों शादी करनी है?”
“क्या करियर पूरा होने के बाद ही रिश्तों पर ध्यान देना चाहिए?”
“क्या शादी ज़रूरी है या बस सामाजिक अपेक्षा?”
युवा महिलाओं में यह समझ बढ़ रही है कि शादी सिर्फ एक सामाजिक संस्था है, न कि जीवन की अंतिम मंज़िल।
3. रिश्तों में बदलाव: शादी के नए आयाम
शादी के प्रति सोच अब अधिक विवेकपूर्ण और चयनात्मक हो चुकी है:
स्वेच्छा से रिश्ता चुनना
लड़कियाँ अब लिव-इन रिलेशनशिप, साझा जीवन लक्ष्यों और समान सम्मान-आधारित रिश्तों पर भी विचार करती हैं—कुछ लोग इसे स्वतंत्रता और वैकल्पिक रिश्तों का संकेत मानते हैं।
व्यक्तिगत जोखिम और अनुभव
बॉलीवुड हस्तियों या सोशल मीडिया से सन्दर्भ में, कई महिलाओं ने बहुत कम उम्र में शादी न करने की सलाह दी है, ताकि पहले खुद को जान सकें और जीवन के अनुभव पा सकें।
4. सामाजिक दबाव Vs. व्यक्तिगत फैसला
आज भी कुछ क्षेत्रों में परंपरागत सोच दबाव बनकर आती है—जैसे जल्दी शादी को प्राथमिकता देना या शादी को हर समस्या का समाधान मानना।
लेकिन युवतियाँ अब खुद के फैसले पर ज़ोर देती हैं—चाहे वो शिक्षा हो, करियर हो, या शादी का निर्णय।
5. वैश्विक रुझानों की झलक
वैश्विक शोध और सर्वे भी यही संकेत देते हैं कि:
किशोरियों में अब शादी की अपेक्षा कम है—बहुत सारी लड़कियाँ शादी को भविष्य की प्राथमिकता के रूप में नहीं देखतीं।
महिलाएँ (साथ) खोजती हैं न कि सिर्फ़ पारंपरिक बंधन।
निष्कर्ष
आज की लड़कियों की सोच बहुताधिक बहुआयामी हो गई है:
शादी अब ज़िंदगी का मात्र लक्ष्य नहीं, बल्कि स्वयं के फैसले, करियर, स्वतंत्रता और जीवन अनुभव का विकल्प है। शादी या अविवाहित रहना, दोनों को सम्मानजनक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ व्यक्ति स्वयं तय करता है कि उसका जीवन मिशन क्या है।
समाज की अपेक्षाएँ बदल रही हैं, और लड़कियाँ उस परिवर्तन की नायिकाएँ हैं—जो अपने लक्ष्य खुद तय कर रही हैं।
डॉ विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब
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