



SHRINAGAR :मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुलाई इमरजेंसी बैठक ,मोदी सरकार को दी ये चेतावनी
यह विधेयक देश के मुसलमानों और अल्पसंख्यकों के हितों के खिलाफ है और गठबंधन इसका पुरजोर विरोध करता है।
श्रीनगर (BNE ):जम्मू -कश्मीर की गठबंधन सरकार ने केंद्र की मोदी सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वह जम्मू-कश्मीर में लोगों के व्यापक जनादेश को कमतर न आंके और लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को बिना किसी हस्तक्षेप के कार्य करने दे.इस विशेष बैठक में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला,उपमुख्यमंत्री के अलावा नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के सभी विधायक और सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी दल शामिल हुए।आज की आपातकालीन बैठक उपमुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास फेयरव्यू, गुपकार में हुयी जिसकी अध्यक्ष मुख्यमंत्री ने की।
बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता और कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन भट्ट ने बताया कि आज की बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें संसद में पारित वक्फ विधेयक प्रमुख था। उन्होंने कहा कि यह विधेयक देश के मुसलमानों और अल्पसंख्यकों के हितों के खिलाफ है और गठबंधन इसका पुरजोर विरोध करता है।
भट्ट ने आगे कहा कि बैठक में जम्मू-कश्मीर की जनता द्वारा एनसी के नेतृत्व वाली सरकार को दिए गए जनादेश के सम्मान पर भी जोर दिया गया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत सरकार को इस जनादेश का सम्मान करना चाहिए और इस पर किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। विधायकों ने इस संबंध में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किए।
उन्होंने केंद्र सरकार को आगाह करते हुए कहा कि हमारी चुप्पी और सहर्चा हुई और बैठक में उपस्थित सभी लोगों की यह राय थी कि यह संशोधन जम्मू-कश्मीर में मुसलमानों और उनकी धार्मिक आस्था पर सीधा हमला है।
कांग्रेस नेता निजाम-उद-दीन भट ने बताया कि बैठक में दीर्घकालिक और अल्पकालिक दोनों तरह के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि सरकार में सभी विधायक सदन के नेता के साथ मजबूती से खड़े हैं। विधेयक, वक्फ और जनादेश जैसे संवेदनशील मामलों पर सभी की यही राय है कि इन मुद्दों को केंद्र सरकार के साथ बातचीत के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि यह आपातकालीन बैठक उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा हाल ही में 48 जम्मू और कश्मीर प्रशासनिक सेवा (जेकेएएस) अधिकारियों के तबादलों के राजनीतिक और प्रशासनिक निहितार्थों पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई थी। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इन तबादलों का कड़ा विरोध करते हुए इन्हें ‘अवैध’ करार दिया है और दावा किया है कि यह कार्रवाई निर्वाचित सरकार से आवश्यक मंजूरी के बिना की गई है, जिससे जम्मू-कश्मीर सरकार और राजभवन के बीच गतिरोध पैदा हो गया है।