नई दिल्ली/ रांची: यहां सरकार को ठेंगा दिखाकर खुद के बनाये कानून पर चलता है राज ,

Posted at : 2018-03-11 05:49:12

नई दिल्ली। झारखंड राज्य की राजधानी रांची से महज 35 किमी दूर खूंटी में पत्थलगड़ी की वर्षगांठ के अवसर पर आदिवासियों की बड़ी पंचायत का आयोजन किया गया। इसमें कई मुद्दों पर बात हुई और फैसले भी हुए। पंचायत में ऐलान किया गया कि ग्रामसभा अपनी मुद्रा चलाएगी, रिवर्ज बैंक की मुद्रा को मान्यता नहीं देंगे। सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ने नहीं भेजेंगे क्योंकि सरकार का एजुकेशन सिस्टम ही गलत है। इतना ही नहीं आदिवासी चुनावों का पूरी तरह से बहिष्कार करेंगे। खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय का कहना है कि यह एक नया राज्य बनाने की साजिश है। इसे समय रहते रोकना चाहिए। जब स्वशासन नहीं है तो आजादी कैसी डॉ जोसेफ पूर्ति के नेतृत्व में भंडरा मैदान में विशाल सभा का आयोजन किया गया। जोसेफ पूर्ति के मुताबिक, अंग्रेजों से अबतक भारत आजाद नहीं हुआ है, सिर्फ सत्ता का हस्तांतरण हुआ है। आजादी का मतलब स्वतंत्र होता है। स्वतंत्रता स्वशासन हम आदिवासियों को नहीं मिली है। अभी आदिवासी लोग भारत सरकार के नियमों को पत्थरों पर अंकित करने काम कर रहे हैं। ताकि सरकार के लोग यह देखें कि भारत सरकार का नियम क्या हैं? पूरे देश में सरकार की एक इंच जमीन नहीं है। देश का मालिक आदिवासी है। सरकार बनाने के लिए भूमि चाहिए। भारत के पास अपनी कोई भूमि नहीं है, तो सरकार कैसे बन सकती है। 5वीं अनुसूचि के अनुसार सभी सरकारी चुनाव अवैध जोसेफ पूर्ति ने कहा कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को गलत बातें पढ़ाई जाती है। इसलिए आदिवासियों ने सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को भेजना बंद कर दिया है। ग्रामसभा गांव-गांव में अपना स्कूल चलाएगी। जहां रूढ़ीवादी ढंग से पढ़ाई होगी। पांचवीं अनुसूची के मुताबिक क्षेत्र में चुनाव नहीं हो सकता। इसलिए इन क्षेत्रों में लोकसभा, विधानसभा और पंचायत चुनाव अवैध है। ग्रामसभा सांसद और विधायक को असंवैधानिक मानती है। दिकुओं को यहां का नियम-कानून मानना पड़ेगा। आदिवासी तो मालिक हैं, वे नियम का पालन क्यों करेंगे?