(दीपक कुमार त्यागी) देशहित में जरूरी है वर्षा जल संचयन व उसका उचित प्रबंधन (लेख)

Posted at : 2019-09-23 12:23:39

जल ही जीवन है, जल जीवन का अमृत है इसके बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना करना भी संभव नहीं है। आज समय की मांग है कि हम सभी को वर्तमान व भावी पीढ़ियों के लिये जल संरक्षण व उसके उचित प्रबंधन पर तेजी से कार्य करना होगा। आज देश में प्राकृतिक स्वच्छ जल स्रोतों का अस्तित्व तेजी से सिमटता जा रहा है और देश में अंधाधुंध भूजल दोहन के चलते अब यह स्थिति हो गयी है कि नदियों की गोद में आबाद क्षेत्रों में भी स्वच्छ पेयजल की किल्लत होने लगी हैं। वैसे तो हमारे देश में भविष्य में भीषण पेयजल संकट और लातुर जैसे हालत पैदा न हों, इसके लिए समय रहते ही केंद्र सरकार व राज्य सरकारों के स्तरों पर देश में विभिन्न जल परियोजनाएं शुरू कर दी हैं और देश के अधिंकाश जल बोर्ड ने वर्षा जल संचयन और जल प्रबंधन करके स्वच्छ जल के उपलब्ध स्रोतों के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। लेकिन अभी ये सब प्रयास नाकाफी है हम सभी आम देशवासियों को इसके लिए सरकार के साथ कंधा से कंधा मिलकर लगातार सामुहिक प्रयास धरातल पर करने होंगे। तब ही देश में भविष्य में जल संकट की इस ज्वंलत समस्या का कोई स्थाई समाधान हो पायेगा। हालातों पर नजर डाले तो पिछले लगभग सौ वर्ष के दौरान विश्व में जल संचयन व प्रबंधन के मामले में लोगों की आदत में दो बड़े बदलाव समय के साथ हुए हैं। पहला- आम व्यक्ति और समुदायों ने अब जल संचयन व उसके उचित प्रबंधन से अपने हाथ खींच लिए है और देश में सरकार को यह जिम्मेदारी सौंप दी है, जबकि पहले किसी भी सरकार द्वारा लोगों को पानी उपलब्ध नहीं कराया जाता था। आमजनमानस पानी का संचयन व इंतजाम स्वयं करता था। जो चलन विश्व में अब पूर्ण रूप से समाप्त हो गया हैं। दूसरा- वर्षा जल के इस्तेमाल और इकट्ठा करने के आसान तरीकों में अब काफी कमी आई है, जबकि अब बांधों के माध्यम से नदियों और नल व नलकूपों के माध्यम से भूजल का बहुत तेजी के साथ रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए दोहन किया जाने लगा और इन्हें ही सभी लोगों को जल प्रदान करने का मुख्य स्त्रोत बना दिया गया। आकडों के अनुसार नदियों और जलाशयों का जल वर्षा के जल का एक छोटा सा हिस्सा मात्र है। जबकि उन पर सभी को पानी पिलाने का दबाव दिनप्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। जो स्थिति भविष्य के लिए ठीक नहीं हैं।